पिकनिक – गीता वाधवानी

पश्चिम बंगाल का एक शहर, वहां रहने वाले चार दोस्तों में वहां के घने जंगल के आसपास पिकनिक पर जाने का प्लान बनाया। इस घने जंगल में बहुत सी हत्याएं हो चुकी थी और स्थानीय लोगों ने कई बार अजीबोगरीब, डरावनी चीजें महसूस की थी। कई बार आत्माओं की उपस्थिति का भी उन्हें आभास हुआ … Read more

मां की इज्जत – शुभ्रा बैनर्जी

निर्मला आज पूरे कॉलोनी में लड्डू लेकर अपने कैंटीन के उद्घाटन का न्योता दे रही थी।समय के साथ जैसे हर दिन एक नई निर्मला अवतरित होती जा रही थी।वही जोश,वही उमंग,वही हंसी।बहुत कुछ बदला था उसकी ज़िंदगी में,पर नहीं बदली तो उसकी हिम्मत।पिछले बीस सालों से जानती थी मैं उसे। हमारी सोसायटी के बाहर एक … Read more

“कैसी इज्जत” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

“नालायक कहीं का!” मेरी इज्जत का जरा भी परवाह नहीं है इस लड़के को! इंजीनियरिंग की डिग्री क्या मिल गई अपने आप को ज्यादा काबिल समझने लगा है। बाप का सिर झुकाने पर लगा है।मेरा सारा इज्जत प्रतिष्ठा मिट्टी में मिला देगा यह लड़का! “ पिताजी का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया था। वह … Read more

आत्मदाह – मुकुन्द लाल 

 रात-भर अनिमेष बिस्तर पर करवटें बदलता रहा, लेकिन नींद उससे नाता तोड़कर दूर चली गई थी। चतुर्दिक सन्नाटा छाया हुआ था, जिसको रह-रहकर कुत्तों की आवाजें भंग कर रही थी। जब भी आंँखें लगती उसके जेहन में उसकी पत्नी मिनाक्षी के बाॅस का चेहरा उभरने लगता और वह बेचैन हो जाता। उसके दिल में उसका … Read more

पता नहीं, इतनी आलस यह कहां से लाती है..? – रोनिता कुंडू

अरे यार सीमा…! लेकर जाओ ना इसे यहां से… 1 दिन तो घर पर रहता हूं… उस पर भी इसे पकड़ा जाती हो…  रमन ने चीखते हुए कहा…  रमन का इतना कहना हुआ नहीं कि, उसकी मां रमावती कहती है… सच कहते हो बेटा..! छुट्टी के दिन तुझे और बाकी दिन मुझे… इसे तो बस … Read more

 मैं अपनी बेटी की इज्जत से खिलवाड़ नहीं करने दूंगी – सुषमा यादव

कुछ समय की बात है,, मेरे घर में एक महिला खाना बनाने आती थी। उसकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वह अपनी बेटी को तो प्रायवेट स्कूल में पढ़ाती थी, और सब गांव वालों की सोच के विपरीत अपने एकलौते बेटे को मेरे सरकारी स्कूल में पढ़ाती थी। मैं उससे कहती, तो बोलती,, मैडम … Read more

इज़्ज़त पर बट्टा – पूजा मनोज अग्रवाल

” गोपाल दास जी घर के मेन गेट पर मुझे सिर्फ सफेद लिली की ही डेकोरेशन चाहिए ,,,, साथ ही साथ वहां से बंगले की एंट्रेंस तक सफेद गुलाबों का गलीचा बिछा दो ,,,”   “और रामदीन काका आप इस बात का खास ख्याल रखिएगा ,,,आज डिनर के मेनू में वंश और मेहर के फेवरेट डिशेज … Read more

इज्ज़त – कल्पना मिश्रा

“रमा,जल्दी से कुछ खाने को दे दो,,,देर हो रही है,,एक मरीज़ को दस बजे का समय दिया था,पर देखो दस यहीं बज गए,,,”  डॉक्टर नीरज ने कहा तो रमा भड़क गई। “जब देखो तब देर हो जायेगी, देर हो जायेगी। ऐसा करो,वहीं कमरा ले लो,,मरीजों को आराम हो जायेगा। दुनिया के तमाम डाक्टर पैसे कमा … Read more

खुशहाल जीवन – कंचन श्रीवास्तव

अपना घर अपनों का ख्याल,यही तो किसी लड़की की स्त्री बनकर  कोरी कल्पना होती है,बढ़ती उम्र और निखरते यौवन के साथ ,एक लड़की कितना अच्छा सपना देखती है।जिसे सोचकर यदा कदा मुस्कुराती है तो कभी आइने में खुद को निहार कर लजा जाती है। जिस पर सिर्फ और सिर्फ मां की नज़र पड़ जाती है,पड़े … Read more

मणिका – निभा राजीव “निर्वी”

यूं तो गांव के प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य थे निरंजन बाबू, मगर उनके आचरण और उनके ओजस्वी व्यक्तित्व, निस्सवार्थ सेवा भावना के कारण गांव में उनकी लोकप्रियता और उनका सम्मान बहुत अधिक था। पूरे गांव में किसी पर कोई मुसीबत आए या किसी को सहायता की आवश्यकता पड़े तो निरंजन बाबू बिना बुलाए सबकी सहायता … Read more

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