दिल का रिश्ता – संगीता त्रिपाठी

“कितने में मुझे ख़रीद कर लाये थे आप लोग ……औलाद की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये ,”मेहर ने गुस्से में सुमन से पूछा..।        “क्या कह रही लाड़ो…भला कोई माँ -बाप औलाद खरीद कर लाएंगे… तुम्हे गलतफहमी हुई है, जो तुम अपनी माँ से इस तरह बात कर रही हो “सुमन ने पीड़ा और गुस्से … Read more

मेरी कहानी – चंद्रमणि चौबे

सौम्या एक बहुत ही भली लड़की थी , पढ़ी लिखी सुंदर, सुशील, हर कला में निपुण उनके पापा ज़िला प्रशासन पदाधिकारी थे एक दिन की बात है वो सारी फैमिली एक रिश्तेदार के शादी में गए हुए थे वहा शादी में आलोक की मां सौम्या को पसंद कर ली आलोक से शादी की बात करने … Read more

तू मेरा बेटा नहीं, बेटी ही है…  -रोनिता कुंडू

पापा…! यह देखिए मुझे स्कॉलरशिप मिली है… हां… पूरी तो नहीं मिल पाई, पर आधी भी बहुत राहत होगी..  पीहू ने चहकते हुए कहा…  पापा (महेश जी): आधी..? उसको लेकर ही तुम इतना उछल रही हो…? और आधा कहां से आएगा, यह भी सोचा है..? देखो पीहू..! मैंने पहले ही कहा था, मेरी हैसियत सिर्फ … Read more

अनचाही सन्तान – आरती झा आद्या

आज अपनी बेटी का छब्बीसवाँ जन्मदिन मनाते हुए सपना बहुत ही खुशी और गर्व की अनुभूति कर रही थी। साथ ही छब्बीस साल पहले घटी घटना के दुःख को चाह कर भी भूल नहीं पा रही थी।      सपना जिसकी शादी बीस साल की उम्र में म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में कार्यरत क्लर्क सुरेश से हुई थी। अभी … Read more

ऐसा बेटा सबको मिले – सुषमा यादव

मेरा एक छात्र है, संदीप,जब वो मेरी कक्षा में अध्ययनरत था, बहुत ही आज्ञाकारी, नम्र और वफादार बच्चा था,हम सभी शिक्षक उसे बहुत पसंद करते थे, पता नहीं क्यों वो मुझे बहुत मानता था, हमेशा सबसे कहता,यादव मैडम मेरी आदर्श मैडम हैं। कभी कभी वो घर भी आता, मेरे कुछ जरूरी काम निपटा जाता, मुझे … Read more

काबिल औलाद – नंदिनी

एक ऐसा शहर जहाँ पड़ोसी सब दुख सुख की बातें एक दूसरे से बतियाते हैं ,कुछ अच्छा बना तो प्लेट पहले ही निकाल दी जाती है। ऐसे शहर में दो पड़ोसी परिवार ,अच्छे से घुले मिले आपस में । मनोहर सुशीला के एक बेटा था ओर दूसरी बार में 2 बेटे जुड़वा हुए ,अनन्त मोहिनी … Read more

आज वो एक बार फिर माँ बनी थी  –  ऋचा उनियाल बौंठियाल

“निकम्मे, नालायक, जब देखो किताब खोल के बैठा रहता है , कौनसा पढ़ लिख कर तूने आईएएस बन जाना है! तेरे माँ बाप तो इस संसार से चले गए, तुझे छोड़ गए मेरी छाती पर मूंग  दलने को, ये किताब छोड़ और  किचन में जाकर बर्तन साफ़ कर उसके बाद झाड़ू पोछा भी लगा देना … Read more

मैं भी तो आपकी बेटी हूं – किरन विश्वकर्मा

आज रेनू जी बहुत खुश थी उनका बेटा और बहू होली के त्यौहार पर घर आए हुए थे दोनों मुंबई शहर में जॉब करते थे और त्यौहार मनाने घर आए हुए थे। घड़ी में सुबह के आठ बज रहे थे उन्होंने चाय बनाई और दो कप चाय लेकर बेटे के रूम में आ गई। रूम … Read more

औलाद का कुछ बनने से ज्यादा जरूरी है उसका होना – संगीता अग्रवाल

” हेलो क्या मैं वंश के पेरेंट्स से बात कर सकती हूँ !” वैशाली के पास एक फोन आया । ” जी मैं वंश की मम्मी बोल रही हूँ कहिये ?” वैशाली ने कहा। ” वो मैडम मैं आपके बेटे के कॉलेज से बोल रही हूँ आप जितनी जल्दी हो सके यहां पहुँचिये !” फोन … Read more

मकान को घर स्त्रियाँ ही बनाती हैं – किरन विश्वकर्मा

गर्मियां जा चुकी थी….अब घड़े की जरूरत नहीं थी कोरोना काल के बाद से श्वेता ने फ्रिज का पानी पीना बंद कर दिया था और केवल घड़े का पानी ही पीती थी पर अब घड़ा दोबारा गर्मी में काम आने वाला नहीं था वैसे भी जब घड़ा बहुत पुराना हो जाता है तो उसमें पानी … Read more

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