मैं अपनी बेटी की इज्जत से खिलवाड़ नहीं करने दूंगी – सुषमा यादव

कुछ समय की बात है,, मेरे घर में एक महिला खाना बनाने आती थी। उसकी सबसे बड़ी खासियत ये थी कि वह अपनी बेटी को तो प्रायवेट स्कूल में पढ़ाती थी, और सब गांव वालों की सोच के विपरीत अपने एकलौते बेटे को मेरे सरकारी स्कूल में पढ़ाती थी। मैं उससे कहती, तो बोलती,, मैडम … Read more

इज़्ज़त पर बट्टा – पूजा मनोज अग्रवाल

” गोपाल दास जी घर के मेन गेट पर मुझे सिर्फ सफेद लिली की ही डेकोरेशन चाहिए ,,,, साथ ही साथ वहां से बंगले की एंट्रेंस तक सफेद गुलाबों का गलीचा बिछा दो ,,,”   “और रामदीन काका आप इस बात का खास ख्याल रखिएगा ,,,आज डिनर के मेनू में वंश और मेहर के फेवरेट डिशेज … Read more

इज्ज़त – कल्पना मिश्रा

“रमा,जल्दी से कुछ खाने को दे दो,,,देर हो रही है,,एक मरीज़ को दस बजे का समय दिया था,पर देखो दस यहीं बज गए,,,”  डॉक्टर नीरज ने कहा तो रमा भड़क गई। “जब देखो तब देर हो जायेगी, देर हो जायेगी। ऐसा करो,वहीं कमरा ले लो,,मरीजों को आराम हो जायेगा। दुनिया के तमाम डाक्टर पैसे कमा … Read more

खुशहाल जीवन – कंचन श्रीवास्तव

अपना घर अपनों का ख्याल,यही तो किसी लड़की की स्त्री बनकर  कोरी कल्पना होती है,बढ़ती उम्र और निखरते यौवन के साथ ,एक लड़की कितना अच्छा सपना देखती है।जिसे सोचकर यदा कदा मुस्कुराती है तो कभी आइने में खुद को निहार कर लजा जाती है। जिस पर सिर्फ और सिर्फ मां की नज़र पड़ जाती है,पड़े … Read more

मणिका – निभा राजीव “निर्वी”

यूं तो गांव के प्राथमिक विद्यालय के प्राचार्य थे निरंजन बाबू, मगर उनके आचरण और उनके ओजस्वी व्यक्तित्व, निस्सवार्थ सेवा भावना के कारण गांव में उनकी लोकप्रियता और उनका सम्मान बहुत अधिक था। पूरे गांव में किसी पर कोई मुसीबत आए या किसी को सहायता की आवश्यकता पड़े तो निरंजन बाबू बिना बुलाए सबकी सहायता … Read more

प्यार की बारिश – लता उप्रेती

आसमान से बरसते ठंडे पानी से मिलने वाला सुकून हर किसी की चाहत होती है। गर्मी के मौसम से परेशान लोग बरसात के मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं। भीषण गर्मी के बाद भला कौन नहीं चाहता कि बारिश की ठंडी फुहारों से थोड़ी ठंडक हो जाए ,बारिश में भीगने का अपना ही आनंद … Read more

“इज्ज़तदार शब्द की इज्ज़त” – सरोज माहेश्वरी

 इज्ज़त जीवन का वह आभूषण है जिसकी चमक व्यक्तित्व में चार चांद लगा देती है, परन्तु अपने आपको इज्ज़तदार कहने वाले रसूखदार भेडियों की काली अंधेरी रातों की काली कहाऩी जब उनके कुकर्मों का पर्दा खोलती है तब भेड़ के रूप में बैठे भेड़ियों का अपावन चोला उतार फेंकना आवश्यक हो जाता है ।इसी विषय … Read more

होली – मधु झा

आइये हम सभी एक मन और नेक मन से होली खेलें,,  होली अर्थात हो लें,,हम सब एक दूसरे के हो लें,,। जब भी होली आती सुहानी को ये शब्द और सुभाष की याद दिला जाती है,,। वैसे तो सुभाष को जीवन में एक पल को भी नहीं भूल सकती मगर होली के समय उसकी याद … Read more

यहां डरने से नहीं डटने से काम चलता है –  सविता गोयल

“क्या हुआ सपना, इतनी अपसेट क्यों लग रही हो?,,  अपनी पत्नी को उदास देखकर रोहित ने पूछा   ।     “कुछ नहीं सोंच रही हूँ ये जाॅब छोड़ दूं  । ,,      “क्यों क्या हो गया  ? कितनी मेहनत से तुम्हें ये जाॅब मिली है । आफिस भी ज्यादा दूर नहीं है । फिर क्यों छोड़ना चाहती … Read more

इन्हें भी इज़्ज़त से जीने दो… – रश्मि प्रकाश 

“ लो आ गई महारानी… जग हंसाई करवा कर.. पूरे मोहल्ले में हमारी इज़्ज़त मिट्टी में मिला कर रख दिया है इसने.. जब देखो तब बसइसकी शिकायतें सुनने को मिलती हैं … घर में बैठ कर पल भर ना रह सकती ।” अपने कमरे से दादी सुनंदा जी की आवाज़ सुन बारहसाल की दीया राशि … Read more

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