नास्तिक – हरीश पांडे

आभा अपने मायके पहुंचते ही फफक फफक कर रोने लगी। माता पिता किंकर्तव्यविमूढ़ खड़े थे। बार बार आशा भरी निगाहों से दरवाज़े की तरफ देखते मगर किसी और के कदमों की आहट न सुनकर उन्हें निराशा ही हाथ लगी। बेटी का रोना बंद नहीं हो रहा था और माता पिता के दिलों का ज़ोर से … Read more

गुनाहों की सज़ा  – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज वृद्धाश्रम में अपनी जीवन संध्या व्यतीत करने वाले बुजुर्ग और वयोवृद्ध लोगों का चेकअप करने के लिए चिकित्सकों की टीम आई हुई थी। सबका बारी-बारी चेकअप हो रहा था। सभी वृद्ध आसानी से अपनी सारी समस्याएं चिकित्सकों से साझा कर रहे थे पर राजेश जी बिल्कुल गुमसुम से थे। वो कुछ दिन पहले ही … Read more

“हम बूढ़ों को पूछता कौन है ? – स्मिता टोके “पारिजात

हॉस्पिटल में पास वाले रूम से अचानक ज़ोर-ज़ोर से आवाज़ें आने लगीं….. “मार डालो मुझे । घरवाले सब नफरत करते हैं । यहाँ क्यों पटककर रखा है ? खाने का डब्बा देकर चले जाते हैं । नहीं खाना मुझे …..” वे बुज़ुर्ग सज्जन चिल्लाने लगे ।  “बाबा, शांत हो जाओ, ऐसे में आपकी तबियत और … Read more

सुनहरा प्यार –   संगीता श्रीवास्तव

बात उन दिनों की है, जब नैना और निशांत स्कूल की पढ़ाई के बाद कॉलेज में दाखिला लेने पहुंचे थे। दोनों अपने -अपने पापा के साथ आए थे। नैना और निशांत के पापा जब आमने-सामने दिखे, तो दोनों एक साथ बोल पड़े थे, अरे…… तुम ….. तुम … कहते हुए एक दूसरे से लिपट गए … Read more

सिमटती दूरियाँ – स्नेह ज्योति

ट्रिन-ट्रिन घर की बेल बज़ी,दरवाज़े पे शोर मचा छोटू-छोटू नाम पर बहुत ऊँचा उद्घोष हुआ।तभी पापा श्री सरपट दौड़ते हुए बाहर निकले कही कोई और ना सुन ले ये नाम,पापा ने फटाफट दरवाज़ा खोल माँ को गले लगाया।आप तो कल आने वाली थी अम्मा! ,अगर आज आ गई तो क्या कचहरी लगाओगे।नहीं अम्मा,अंदर आओ ।मम्मी … Read more

नियति का‌ खेल – संगीता श्रीवास्तव

“आओ बैठो,” उसने गहरी  सांस लेते हुए कहा था। मैं कुर्सी खींचकर उसके सामने बैठ गया ।मैं सोचने लगा, क्या यह वही आमोद है जो मिलते ही गर्मजोशी से गले मिलता था और आज, ऐसा क्यों…..?    मैं उससे 20 साल बाद मिला था ग्रेजुएशन करने के बाद उसकी नौकरी सेंट्रल गवर्नमेंट में हो गई और … Read more

समर्पित पति – मुकुन्द लाल 

सागर, सेठजी के व्यवसायिक प्रतिष्ठान में बैठकर कुछ काम कर रहा था कि अचानक उसका मोबाइल बजने लगा।   उसने पूछा, “हैलो!… कौन हैं?”   “मैं मानसिक आरोग्यशाला से बोल रहा हूँ, आपका पेशेंट ठीक हो गया है। आकर जल्द ले जाइये, यहाँ वह बहुत परेशान है। घर जाने के लिए छटपटा रही है।”  “अच्छा!… मैं कल … Read more

 बेबसी – बालेश्वर गुप्ता

 मुन्ना अब तुम बिन रहा नही जाता रे।लौट आ,हमारे जीवन के कितने दिन बचे हैं, आ जायेगा तो परिवार के बीच मरने की भी संतुष्टि होगी।         पापा रोज ही तो वीडियो काल पर मिलते हैं, हम दूर कहाँ है, आप ही टाल जाते हैं, मैं तो आपको हर साल दो तीन महीने अपने पास रहने … Read more

घर लौट  चलो सुमि – पूनम अरोड़ा  

  जब  सुमेधा  मिनी  के  साथ  नई  दिल्ली  स्टेशन  पर  पहुँची  तो  झेलम एक्सप्रेस  पहले ही  वहाँ  खड़ी  हुई  थी। कोच नंबर देखकर  वे उस  पर चढ़ गए और सीट नम्बर 12 -13  देखकर उसपर  बैठ गए। बैठकर राहत की साँस  ली  और बोतल निकालकर पानी  पिया। थोड़ी  देर में  ही  ट्रेन चल पड़ी। उसने देखा … Read more

  खामोशी – डॉ किर्ति गोयल 

बात कुछ पुरानी है पर यू लगता है मानो कल की ही बात हो। वही शाम के लगभग 4 बजे विश्वविद्यालय से लौटने का समय था, अचानक देखा कुछ बड़े डील डौल वाले लड़के हाथो में तलवार, हौकी और डंडे लिए हुए एक युवक के पीछे दौड़ते हुए आ रहे थे। पीछा करते हुए वी. … Read more

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