“जिम्मेदारी” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा
“देखिये भैय्या ,आपको सुनने में थोड़ा कड़वा लगेगा लेकिन मुझे यह मजबूर होकर कहना पड़ रहा है कि हम पूरे खानदान भर का बोझ नहीं उठा सकते! मेरी भी अपनी जिन्दगी है। जिन्दगी की छोटी- मोटी खुशियां हैं ,बाल बच्चे हैं। मुझे उनके लिए भी सोचने की जरूरत है। बचपन से हमने जो जोड़- तोड़कर … Read more