भूल अपना समझने की – अंजना ठाकुर
विनोद जी ने बहुत दौलत कमाई थी। मेहनत, लगन और अपने तेज़ दिमाग से उन्होंने अपना कारोबार गाँव-शहर तक फैला दिया था। लोगों की नज़र में विनोद जी की ज़िंदगी किसी राजा से कम नहीं थी—बड़ा सा घर, प्रतिष्ठा, नौकर-चाकर, और चारों तरफ़ नाम। पर उनके दिल के किसी कोने में एक मलाल हमेशा चुभता … Read more