इतनी-सी बात – विभा गुप्ता

      ” अम्मा जी..जब दिखता नहीं है तो चुपचाप अपने कमरे में ही क्यों नहीं बैठी रहतीं।इतना मंहगा कप तोड़ दिया आपने..मेरा भाई कनाडा से लाया था..आपके बेटे की तो औकात है नहीं कि इतना मंहगा…। ” प्रमिला अपनी बूढ़ी सास पर बरस रही थी कि तभी उसका देवर निशांत आ गया।माँ पर बरसते अपनी भाभी … Read more

रिटायरमेंट – सोनिया अग्रवाल

मोबाइल पर जैसे ही बैंक खाते में पैसे प्राप्त होने का मैसेज मिला तो बुजुर्ग रामलाल जी के चेहरे पर मुस्कान की एक लकीर चमक गई। देखते ही देखते आँखें नम हो गई तो जल्दी से बेटी सपना को फोन कर घर आने के लिए बोल दिया। मासिक पगार  तय तिथि पर आ जाने की … Read more

उधार का अमीर

दोस्तो, यह कहानी नहीं, एक सच्ची घटना है, जो पिछले एक वर्ष से भारत के हर शहर में नित नए रुप में किरदारों के नाम बदल कर घट रहीं है …. (यह  कहानी प्रधान मंत्री जी के आवहान पर इस ग्रुप के सदस्यों को समर्पित…) 100 नम्बर की एक गाड़ी मेन रोड पर एक दो … Read more

मन मार कर जीना भी कोई जीना होता है । – बीना शर्मा

रघुनाथ जी कई दिनों से देख रहे थे उनके बेटे रजत की पत्नी माधुरी पिछले कई दिनों से बेहद उदास रहती थी हर पल कुछ ना कुछ गुनगुनाने वाली बात बात पर खिल खिलाने वाली माधुरी आजकल बेहद खामोश रहती थी। माधुरी का उदास चेहरा देखकर रघुनाथ जी बेहद दुखी थे। महीने भर पहले ही … Read more

विषवृक्ष – रवीन्द्र कान्त त्यागी

छोटे से कस्बे में मेरा आई.आई.टी में उच्च श्रेणी प्राप्त करना कई दिन चर्चा का विषय रहा था. पहले महीने ही एक अंत्तराष्ट्रीय कंपनी में अच्छे पॅकेज की नौकरी लग जाने के बाद पिताजी ने वधु तलाश कार्यक्रम शुरू कर दिया था और ये स्वाभाविक भी था. महानगर की एक पौष कॉलोनी में प्रशासनिक अधिकारी … Read more

रिटायरमेंट – खुशी

आरुषि तीन भाई बहनों मैं सबसे छोटी थी। बड़ी दीदी रेखा जो ips की तैयारी कर रही थी।उससे छोटा विवेक जो बैंक की नौकरी की तैयारी कर रहा था।पिताजी रामनाथ बिजली विभाग में बाबू थे और घर की एक मात्र करता धरता सुहासिनी जिसका दिन 4 बजे शुरू होता और रात ग्यारह बजे वो सोती।हर … Read more

सेवानिवृत – मधु वशिष्ठ

        मोहन जी बिस्तर पर लेटे हुए थे, सुमित्रा जी सोफे से वाकर के सहारे चलती हुई मोहन जी के बिस्तर तक जाकर फ्लास्क में से पानी को गिलास में डालकर उन्हें दवा देने लगी और बोली आज शांताबाई  कह कर गई है कि अब वह 5 दिन बाद राखी का त्यौहार मना कर ही आएगी। … Read more

दूसरी पारी – गीता वाधवानी

 अविनाश ने अपने पापा जगन्नाथ जी से कहा-” पापा, परसों तो आप रिटायर हो रहे हैं, फिर तो आप फ्री रहेंगे हर समय, आपके तो मजे हैं। घर पर सारा दिन आराम करेंगे, गरमा गरम खाना खाएंगे और चैन की बंसी बजाएंगे। ”   पापा-” क्यों भई अविनाश, रिटायर होने का मतलब यह तो नहीं होता … Read more

आपे से बाहर होना – डोली पाठक

आप कितने पढ़े-लिखे हैं… कितनी डिग्रियां ले रखी हैं और आप कितने ईमानदार और नेक इंसान हैं इन सारी हीं बातों का कोई अर्थ नहीं रह जाता जब आपको लोगों के साथ व्यवहार करना नहीं आता… आपकी भाषा शैली और बात करने का सलीका आपकी डिग्री का मोहताज नहीं होता… अक्सर हमने देखा है कि … Read more

अपहरण का बदला – रवीन्द्र कान्त त्यागी

रात के दो बज रहे हैं। आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं है। मेरी पत्नी अनुष्का अपने तीन साल के वैवाहिक जीवन को ठोकर मार कर चली गई है। बरसों से मेरे हृदय में उसके लिए बसे अगाध प्रेम, समर्पण और विश्वास को एक तीन पंक्ति के कागज के पुर्जे से तार तार करके, मेरी … Read more

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