एक बार फिर (भाग 35 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

शेखर प्रिया के साथ मिसबिहेव करता है जिससे प्रिया बहुत अपसैट हो जाती है। शेखर को रियलाइज होता है वो परेशान हो जाता है वह घर आकर डिनर के बाद समर को फोन करता है अब आगे- हैलो! शेखर! “नाईस” आज‌ कैसे याद कर लिया दोस्त को?? भाभी से फुर्सत मिल गई समर ने हंस … Read more

बेनकाब – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : विभा की शादी को दो वर्ष ही हुए थे वह एक निर्धन परिवार की बेटी थी।पढ़ी लिखी , सुन्दर, काम में निपुण, संस्कारी लड़की थी।ससुराल में इतने कम समय में ही उसने सवका दिल जीत लिया था। सब उससे बहुत प्यार करते थे। इसके विपरीत उसकी जेठानी यानी घर की … Read more

अहसान नहीं फ़र्ज़ – प्रेम बजाज 

मि० गुप्ता  एक बैंक कर्मचारी  10वीं क्लास में बेटा आकाश और 6वीं क्लास में बेटी प्रेज़ी पढ़ती है‌। मिसेज गुप्ता की तबीयत कुछ ढीली – डाली सी रहती है,  बस ले-दे कर घर का गुजारा ठीक-ठाक चल रहा है।  मिसेज मल्होत्रा, ” मिसेज गुप्ता आप एक बाई क्यों नहीं रख लेती?  आपकी तबीयत भी ढीली … Read more

आज का श्रवण कुमार

माता पिता दो बेटे… बिल्कुल साधारण सा परिवार… पिता कृत संकल्प अपने दोनों बच्चों को खूब पढ़ाना है, काबिल बनाना है ताकि वो एक शानदार जिन्दगी बसर कर सकें… किसी भी तरह का अभाव न रहे उनके जीवन में!! प्राइवेट नौकरी गिनी चुनी तनख्वाह हाथ में आती जिसे लाकर पत्नि के हाथ में थमा देते… … Read more

पिता.. – सुधा सिंह: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आज सिया का तीसरा दिन था ससुराल में वो जब से दुल्हन बनकर आई थी तबसे कोई न कोई उसे कुछ न कुछ बात पर सुना रहा था कभी दहेज़ को लेकर कभी रस्मो को लेकर क्युकी उसके यहाँ की कुछ रस्मे ससुराल की रस्मो से नहीं मिलती थी और … Read more

एक बार तो सोचती…. : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : रत्ना के हाथ रखने से पहले ही उसका ननदोई श्रीधर ने अपना हाथ पुस्तक पर से हटा लिया तो वह तिलमिला गई।अपनी इच्छा पर पानी फिरते देख उसने श्रीधर को नीचा दिखाने का ठान लिया। आठ साल पहले रत्ना की छोटी ननद दीपाली के साथ श्रीधर का विवाह हुआ था।श्रीधर … Read more

आरोप–प्रत्यारोप – आरती झा आद्या : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi :  तुम्हारे ही मजे हैं सोनम, एक हमें देखो नौकरी भी करो, घर का काम भी देखो। गृहिणी की एकदम टिप टॉप मस्त ज़िंदगी होती है। जब मन करे टीवी के सामने बैठ जाओ, जब मन करे सो जाओ। एक साथ ही ढलती शाम में ठेले पर से सब्जी लेती हुई … Read more

“इलज़ाम” – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : स्वाति कमरे में सोने गई थी पर नींद उसकी आँखों से कोसों दूर थी फिर भी आँखें बंद करके सोने की कोशिश कर रही थी । उसी समय माँ के कमरे से चीखने की आवाज़ें सुनाई देने लगी। वे भाई को पुकार रहीं थीं रवि जल्दी आ देख तेरे पापा … Read more

संस्कारी बहू – बीना शर्मा  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : राजीव अपनी कंपनी के किसी काम से अपनी ससुराल के नजदीकी शहर में गया था काम खत्म होने के बाद जब वह वापसी करने के लिए अपने गंतव्य की तरफ चला तो रास्ते में उसका ससुराल पड़ गया था वह अपनी ससुराल जाना तो नहीं चाहता था परंतु, घर के … Read more

इल्ज़ाम – अनु माथुर : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : शाम का वक़्त था नैना चाय बना रही थी.. तभी डोरबेल बजी.. वो किचन से हाथों को पोंछती हुयी बाहर आई और दरवाज़ा खोला | सामने उसके जेठ और जेठानी खड़े थे… वो साइड में हो गयी और उनको अंदर आने के लिए बोला.. झुककर उनके पैर छुए.. उनको बैठने … Read more

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