मतलब निकल गया तो पहचानते नहीं है। – प्राची अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

चंद्र प्रकाश जी अपने मित्र रमेश की पौत्री का रिश्ता कराने के लिए भागम भाग कर रहे थे। लड़का उनकी जानकारी में था। दोनों पक्षों में उनकी उठ-बैठ थी। रिश्ता कराने के चक्कर में कई बार उन्हें यात्रा भी करनी पड़ी। अपने घर पर भी उनको बातें सुननी पड़ती थी कि बे फालतू के कामों … Read more

क़ाबिलियत और सपने! – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

“शिवानी अधिकारी मछली शहर की पहली आई.पी.स. बनीं।”आज के अख़बार की हेडलाइन पढ़ा तो नाम कुछ जाना-पहचाना लगा… ध्यान से फ़ोटो देखी…. अरे!… यह तो मेरी स्कूल की सखी मिताली की बेटी है। क़रीब दो बरस पहले मेरी बात हुई थी उससे, तब बहुत परेशान थी। बेटी शिवानी आगे पढ़ कर कुछ बनना चाहती थी … Read more

सुकून भरा सफर – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : अरे मम्मी , फ्लाइट में टिकट क्यों नहीं कराया..  ट्रेन में कितना समय लगेगा जानती भी हो..? कंजूस कहीं की..!  ट्रेन का टिकट कंफर्म होते ही सुमेधा ने बेटी स्वर्णा को जानकारी दी थी , बेटी का जवाब सुनते ही सुमेधा बोली …..           अरे हमारे पास तेरे पापा के रिटायरमेंट … Read more

कामचोर बहुएं: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : नितिका और वंदना कहने को दोनो देवरानी जेठानी , दोनो के स्वभाव मे भी जमीन आसमान का अंतर +जहाँ जेठानी वंदना शांत स्वभाव की चुप चुप रहने वाली वहीं देवरानी नितिका साफ दिल की पर मुंह फट जो महसूस करती बोल देती।) पर दोनो मे प्यार बहुत था वंदना की … Read more

दूसरों का दर्द भी समझना चाहिए : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : जगमोहन भारी मन से घर आ गया। उसे लग रहा था कि ईमानदारी से काम करने का कोई मतलब ही नहीं रहा। कितनी मुश्किल से मैंने यह प्रेजेंटेशन तैयार किया था, मैं हर समय इस कम्पनी की तरक्की का प्रयास करता हूँ, कभी यह भी नहीं सोचता कि ऑफिस टाइम … Read more

मर भी जा –   बालेश्वर गुप्ता

अरे हतभागी तू मरती भी तो नहीं, मर जाये तभी तो मैं भी मरूं।कैसे तुझे अकेला छोड़कर,मरूं? कहते कहते इंदर सिसक पड़ा, आंखों से आंसू थमने का नाम ही नही ले रहे थे।         सन 1966 की घटना आज भी मेरे मन मष्तिष्क में ज्यूँ की त्युं अंकित है। मैंने  मेरठ में स्नातक की पढ़ाई करने … Read more

सारे दर्द औरत को ही क्यूँ ???? – मीनाक्षी सिंह

विन्नी – मम्मा ,बहुत दर्द हो रह हैँ पेट में ,पेट के आस पास और कमर में ! लग रहा हैँ मर जाऊंगी ! कुछ तो करो मम्मा ! सीमा (13 साल की विन्नी की माँ ) – कोई बात नहीं बेटा ,अभी तुझे गरम दूध दे दूँगी ! पी लेना आराम मिल जायेगा ! … Read more

भाभी हैं न देख लेंगी – के कामेश्वरी

नर्मदा की शादी राजेंद्र के साथ तब हुई जब उसकी उम्र अठारह वर्ष की थी । पिताजी घुमक्कड़ प्रवृत्ति के थे इसलिए दादा दादी और चाचा लोगों ने मिलकर उनकी शादी जैसे तैसे कर दी कहने के बदले हम कह सकते हैं कि निपटा दी । ससुराल में तीन देवर चार ननदों के बीच उसके … Read more

 दर्द अपना-अपना * –   पुष्पा जोशी

‘कुछ नहीं होने दूंगा मैं आपको।’ बिना सम्बोधन के ही उसने कहा था ‘अभी जीना है आपको,पोते पोतियों को गोद में खिलाना है, आप चिंता न करें कुछ नहीं होने दूंगा मैं आपको।’ क्या था उसकी आवाज में, और उसकी आँखों में कि मैं उसे देखती रह गई।पहली बार ही मिली थी मैं डॉक्टर अविनाश … Read more

” एक परिवार ऐसा भी ” – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

शादी के दिन जैसे जैसे नजदीक आ रहे थे वैसे वैसे सलोनी का मन घबरा रहा था। कारण था ससुराल का संयुक्त परिवार जबकि मायके में सलोनी के पापा की ट्रांसफर वाली जॉब होने के कारण सलोनी एकल परिवार में ही पली बढ़ी थी। ” सलोनी क्या सोच रही है यूं अकेले बैठे ?” एक … Read more

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