माता पिता भगवान का दूसरा रूप होते हैं – बीना शर्मा

उम्र 65 घुटनों में दर्द कहां तक वह भागदौड़ कर सकती थी अपने और अपने पति के लिए खाना बनाते बनाते सरला देवी मन ही मन यही सोच रही थी जिस उम्र में औरतें आराम से बैठकर खाना खाती हैं उस उम्र में वह अभी घर का सारा काम करती थी।        कितने चाव से उसने … Read more

रौशन घर, अंधियारा मन – सविता गोयल

अरे वाह, बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है क्या बना रही हो श्रीमती जी?? घर में घुसते हीं रसोई से आती देसी घी की खुशबू सूंघते हुए मनोहर जी बोले। अजी देसी घी के लड्डू बना रही हूँ। राज को तो बहुत पसंद हैं मेरे हाथ के लड्डू। इस बार दिवाली पर जब राज बहू … Read more

मैं मां हूं ना – बीना शर्मा

कभी-कभी प्यार भरा मन भी रिक्त हो जाता है कमला देवी ने कितने प्यार से अपने बेटे रवि के जन्मदिन की तैयारी की थी । आज रवि का जन्मदिन था। इसलिए उसने सोचा आज रवि की पसंद का चॉकलेट वाला केक, मटर पनीर की सब्जी, गाजर का हलवा, बूंदी का रायता और खसता कचोरी बनाकर … Read more

आँखों देखा कहर – रवीन्द्र कान्त त्यागी

सोने की तैयारी में खाट पर लेटे लेटे मिट्टी के तेल की रोशनी में मेरा ध्यान अचानक खूंटी पर लटके बाबा जी के कुर्ते की जेब पर गया। एक बोतल का ढक्कन सा बाहर झाँक रहा था। बिस्तर छोड़कर उत्सुकता व आश्चर्य से मैंने उनकी जेब को टटोला तो वहां शराब का एक भरा हुआ … Read more

रिटायरमेंट – रंजीता पाण्डेय

शर्मा जी सरकारी स्कूल में अध्यापक थे।उनके परिवार में उनका बेटा रोहनऔऱ उनकी पत्नी रमा जी थी। रमा जी बहुत ही ज्यादा पढ़ी लिखी ,समझदार महिला थी। रमा जी जब शादी करके आयी ,तभी शर्मा जी से बोली की मैं भी कोई नौकरी करना चाहती हूँ। लेकिन शर्मा जी हर बार टाल जाते, की रमा … Read more

इत्ती सी बात – लतिका श्रीवास्तव

शहर की व्यस्ततम सड़क। भारी ट्रैफिक ।आवाजाही का शोर।ग्रीन सिग्नल की प्रतीक्षा में कतारबद्ध खड़ी गाड़ियां।आज कुछ ज्यादा ही भीड़ थी। अनुराग का धैर्य समाप्ति पर था।उसका इंटरव्यू था ।टाइम पर पहुंचना कितना बहुमूल्य था आज समझ में आ रहा था उसे। कार की स्टीयरिंग में ठहरे हाथ उतावले हो रहे थे।सिग्नल के परमिशन की … Read more

क्रोध – एम पी सिंह

रामलाल एक माध्यम परिवार से था और पढ़ने मैं बहुत तेज। रामलाल के पिताजी सोहनलाल जी प्राइवेट बैंक मे क्लर्क थे और माताजी गृहणी। रामलाल को पढ़ाई के आलावा कोई शौक नहीं था, किसी से भी ज्यादा बातें नहीं करता था, बस अपनी मॉ से लगाव था। वैसे तो सोहनलाल एक नेक इंसान था पर … Read more

कर्मों का फल – सुनीता माथुर

बहुत समय पहले एक गाँव में हरिदास बहुत ही मेहनती किसान था लेकिन स्वभाव से बहुत आलसी था जब मौसम आता, तो वह बीज तो बो देता, मगर समय पर सिंचाई और निराई-गुड़ाई नहीं करता हरिदास के बचपन का दोस्त गोपी भी इसी गांव में रहता था और उसके पास ही उसका खेत था लेकिन—— … Read more

रिटायरमेंट – क़े कामेश्वरी

श्रेया सुजाता को फोन कर रही थी और वे उठा नहीं रही थी । श्रेया को चिंता होने लगी कि माँ एक रिंग में ही फोन उठा लेती हैं आज क्या हुआ है जो फोन नहीं उठा रही है । उसी समय सुजाता ने फोन उठाया और हेलो कहा । माँ आपको फोन उठाने में … Read more

स्त्री कभी रिटायर नहीं होती – कमलेश राणा 

अरे भाई सुरैया कहां हो तुम सुबह से चाय का रास्ता देख रहा हूं लेकिन अभी तक तुम्हारा कुछ अता- पता ही नहीं है।पहले तो तुम जॉब करती थी तो व्यस्त रहती थी.. मन को तसल्ली थी लेकिन अब तो रिटायर हो गई हो तो लगता है और भी ज्यादा बिजी हो गई हो। अरे … Read more

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