कुछ गलती की माफ़ी नहीं होती – लतिका पल्लवी

रामायण जी के घर पर सत्यनारायण की पूजा हो रही थी। करीब करीब पूरा गाँव इकट्ठा था।आज रामायण जी के पोते का पहला जन्मदिन था।वे इस ख़ुशी मे नारायण पूजा करवा रहे थे उसके बाद भोज का भी इंतजाम था।पूजा हो ही रही थी कि तभी उनके पड़ोस का लड़का संजय दो लड़को के साथ … Read more

दुआ का असर – लतिका श्रीवास्तव

शाम ढल रही थी धीमे धीमे।सूर्यास्त की लालिमा बहुत मनोयोग से आसमान को अपने आगोश में लेने को तत्पर हो चली थी।सांध्यकालीन आकाश में बादलों की मनोहारी छटा किसी अनोखे अबूझ चित्रकार की सधी हुई तूलिका से अनुपम रंग संयोजन  उकेरने में दत्त चित्त थी।कैसा चित्रकार है यह जो रोज उसी काम को पूरी तत्परता … Read more

बद्दुआ – के आर अमित

नया नया बंदूक का लाइसेंस बनवाया था। अब पूरे गांव में वो पहला और इकलौता शख्स था जिसके पास दोनाली बंदूक थी। भैंस चराने जंगल जाता तो बंदूक चंबल के डकैतों की तरह कंधे पे रखकर निकलता था। बार बार हाथ अनायास ही मूछों पे चला जाता चाल भी पहले से बदल गई थी। एक … Read more

बहू ही घर की असली लक्ष्मी है – विमला गुगलानी

       सुजाता के घर किट्टी प्रार्टी चल रही थी। पद्रहं- बीस औरतें सज धज कर बैठी तबोला खेल रही थी। फिर खाना पीना, गाना – बजाना, साड़ियों , जेवरों की बातें और सबसे जरूरी बहुपुराण या फिर बिना मतलब की यहां वहां की बातें, रसोई की , कामवालियों की यानि कि हर घरेलू मुद्दे पर बातें … Read more

सीरत – कल्पना मिश्रा

काला रंग,एक आंख आधी बंद सी और बाहर निकले हुए दांत,,,कुल मिलाकर वह मुझे एक आंख ना भाती। मैं बहाने बनाकर उसे निकालना चाहती लेकिन उसकी मां हाथ जोड़कर अपनी कमजोर स्थिति का हवाला देकर मुझे चाहकर भी उसे नही निकालने पर मजबूर कर देती। फिर एक दिन अचानक मेरे पति नही रहे।उनकी तेरहवीं के … Read more

ओहदा – (अर्चना सिंह)

रिटायरमेंट के बाद विभूति जी के पास ये पहला मौका था जब तसल्ली से बिना बहाना किए अपनी बेटियों के पास रह सकते थे । दोनो बेटियाँ एक ही शहर दिल्ली में ब्याही हुई थीं । ईश्वर की दया से किसी भी चीज में कोई कमी नहीं थी। दोनो दामाद सरकारी ऑफिसर थे । कभी … Read more

 बद्दुआ दुआ बन जाती है – विभा गुप्ता

 ” बस दीदी..आप बहुत बोल चुकीं..मैं जब से इस घर में आई हूँ, आप मुझमें कोई न कोई कमी निकालती ही रहीं हैं।फिर मेरी बेटी को..।ये भी नहीं सोचती कि वो आपके ही देवर की बेटी है।और आज तो आपने श्रद्धा को..।” कहते हुए आनंदी का गला भर आया।   ” तो फिर यहाँ से चली … Read more

धरती के जीव – करुणा मलिक

पवन ! ये मोहल्ले के सारे कुत्ते हमारे घर के बाहर  क्यों  बैठे हैं? दो दिन से देख रहा हूं कि कुत्तों की फौज घर के सामने खड़ी रहती है। वो दरअसल साहब जी ,माँ जी ने यहाँ इनके लिए रोटियाँ डाली हुई हैं………… घर के बाहर बैठे गार्ड की बात सुनकर शहर के एस० … Read more

सहारा – खुशी

निशा जी दो बेटों निमिष और निलेश और दो बेटियों प्रीति और निशि की मां थी।पति राघव सेल्स टैक्स में ऑफिसर थे अच्छा खाता कमाते थे। घर में किसी चीज की कमी नहीं थी। निशा अपने बच्चों पर जान छिड़कते थी। सब को लगता ये इतना बेटी बेटी करती हैं तो पता नहीं कल को … Read more

निर्दोष की बद्दुआ – गीता वाधवानी

 बड़ा ही रोब था उसका, नाम था उसका पुत्तन  भैया।   वाहन,दुकान, पैसा,दो मकान और ढेर सारे चमचे, गुर्गे, जो पुत्तन भैया को भरपूर मक्खन लगाते थे। कई गैर कानूनी कामों से पैसा कमाया जाता था। और शायद उन पापों को धोने के लिए कभी माता की चौकी, तो कभी मंदिर में भंडारा करवाया जाता और … Read more

error: Content is protected !!