एक आंख ना भाना – हेमलता गुप्ता

तनु को समझ नहीं आ रहा था उसकी मामी उसके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रही है, 3 साल पहले तनु की मम्मी पापा की एक एक्सीडेंट में मृत्यु हो गई थी तब तनु 12वीं कक्षा में थी परीक्षा के बाद में तनु की मामी उसे अपने साथ ले आई तनु की मामी के दो … Read more

बुढ़ापे का सहारा ना बेटा ना बेटी बल्कि बहू होती है – डोली पाठक

क्या पिताजी आज फिर से बिस्तर गीला कर दिया आपने???  जूही ने अपने ससुर सुखदेव जी से जब ये सवाल किया तो वो शर्मिंदगी से नजरें चुराते हुए बोले- नहीं तो!!!  मैंने तो नहीं किया… मैं तो अभी-अभी बाथरूम से आ रहा हूं…  जूही पिताजी से बिना बहस किए   गीली बिस्तर हटाया साफ बिस्तर बिछा … Read more

बुढ़ापे की लाठी एक बहू ही होती है !! – स्वाती जैंन

नहीं नहीं कामिनी , तुम जितनी सीधी- सादी समझती हो उतनी सीधी नहीं हैं मेरी बहू , अरे बड़ी चंट हैं वह , अब जो घर में रहता हैं वहीं जानता हैं , हम तो सारे भेद जानते हैं उसके मगर अब अगल बगल वालो से क्या बातें करना वह भी अपने ही घर की … Read more

आग में तेल छिड़कना – लक्ष्मी त्यागी

‘आग में घी डालना हो या तेल आग तो भड़केगी ही,निर्भर इस बात पर करता है, कि क्या वो आग पहले से ही प्रज्ज्वलित थी ? ”इसी प्रकार रिश्तों में ,यदि थोड़ी सी भी, किसी के प्रति कोई शिकायत रह जाती है और दूसरा आकर उसके मन की, उस बात को हवा दे दे या … Read more

बुढ़ापे का सहारा, बहु! – लक्ष्मी त्यागी 

दीप्ती जी ,बहुत दिनों से बिमार थीं ,उनकी बहु ऋचा ने अपनी सास की खूब सेवा की एक बार को तो उन्हें लग रहा था ,अब वो नहीं बचेंगी किन्तु बहु ने अपने व्यवहार और सेवा से उन्हें बिस्तर से खड़ा कर दिया। उसका व्यवहार और उसकी सेवा देखकर कई बार उनकी आँखों में आंसू … Read more

दहेज में सम्मान और प्रेम – प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’

आज विनीता और निखिल बहुत खुश थे आखिर हों भी क्यों न…आज वह अपने बेटे विवान के लिए सुरभी को जो देखकर आए थे और वह उन्हें और उनके बेटे को पसंद भी आ गई…विवान और सुरभि की जोड़ी बिल्कुल ऐसी लग रही थी जैसे राम सीता की जोड़ी, रंग रूप, योग्यता सभी कुछ तो … Read more

सोच बदल भी सकती है – विमला गुगलानी

    रिया मां बाप की इकलौती बेटी थी, बहुत लाड प्यार से पली , पढ़ाई में खूब होशियार। सब गुण थे उसमें लेकिन उसे घर में लोगों की भीड़ बिल्कुल पंसद नहीं थी। दरअसल जब से उसने होश संभाला घर में उससे चार साल बड़ा उसका भाई अमन और उसकी माँ सुनयना ही थे। उसके पिताजी … Read more

तेरी छाँव रहे – रवीन्द्र कांत त्यागी

सत्तर की उम्र आते आते श्रीनिवास जी की जिंदगी का एक रूटीन बन बन गया था. सुबह शौच आदि से निवृत होकर गाय की सानी पानी करना. दूध दुहकर घर चले जाना और चूल्हे के पास धनवंती से बतियाते हुए दो ग्लास गुड़ की चाय पीना. फिर अपने बँटाई पर दिये खेतों का एक चक्कर … Read more

“बुढ़ापे का असली सहारा न बेटा न बेटी बल्कि बहू होती है“ – सोनिया अग्रवाल 

” अरे वाह बेटा क्या सब्जी बनाई है, बिल्कुल मेरी मां के हाथ के स्वाद की याद आ गई । जब से तुम्हारी सास इस घर में आई तो मां को कभी कोई कार्य ही नहीं करने दिया। आज तुम्हारे हाथ की सब्जी बिल्कुल मां के हाथ के खाने की याद दिला गई।” ससुर रमेश … Read more

रिश्ते अहंकार से नहीं त्याग और माफी से चलते हैं – मंजू ओमर 

आज बेटे के घर से वापस आते वक्त संध्या के गले से लगाकर सौम्या रो पड़ी, मम्मी मुझे माफ कर दो , मम्मी मैंने आपका बहुत दिल दुखाया है।आप मुझसे बात करो , मुझे अच्छा नहीं लगता आप बात नहीं करती तो। संध्या जी का मन थोड़ा पसीज गया और कह उठी ठीक है पुरानी … Read more

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