सास का दर्द बहू ही समझती है – लतिका पल्लवी 

मालिनी जी भोग के लिए लड्डू बना रही थी तभी उनकी बेटी का फोन आया। उनके फ़ोन उठाते ही उधर से आवाज आई माँ भाभी कहाँ है? मालिनी जी ने पूछा क्यों पूछ रही हो? वो क्या है न माँ मै कब से भाभी को फ़ोन लगा रही हूँ पर उन्होंने उठाया ही नहीं इसीलिए … Read more

करवाचौथ का व्रत – लतिका श्रीवास्तव

बहुरानी पहले करवाचौथ की बधाई सदा सौभाग्यवती रहो खुश रहो सुमित्रा जी ने नवेली बहू नीलम को पैर छूने पर आशीष देते हुए गदगद हो गईं । आओ यहां बैठो तुम्हारा पहला करवाचौथ है इसलिए तुम्हे कुछ परंपराएं बता दूं।जिसे सुन कर तुम्हे अपार खुशी होगी सुनकर नीलम उत्सुक हो उठी। जानती हो हमारे घर … Read more

 क्योंकि जब माँ मुस्कुराती है — तब ही घर ‘घर’ बनता है। – दिव्या सिन्हा

“माँ कैसी हैं अब?”नेहा ने घर में कदम रखते ही अपने बड़े भाई आदित्य से पूछा। आदित्य ने गहरी साँस ली, चेहरे पर थकान और मन में चिंता साफ झलक रही थी —“पहले जैसी नहीं रहीं, नेहा। कुछ महीने से तो जैसे उनमें कोई जान ही नहीं बची। खामोश रहती हैं, किसी से बात नहीं … Read more

असमर्थ – खुशी

जीवन लाल के चार बेटे और एक बेटी थी ।उनकी पत्नी सावित्री और एक विधवा बहन आशा उन्ही के साथ रहती थी।जीवन लाल की कपड़े की मिल थी।जीवन लाल की बच्चों में जान बसती थी।मदन ,बसंत, रमेश और सुरेश और प्यारी सी बेटी चंदा ये उनका भरा पूरा परिवार था। बच्चों के मुंह से एक … Read more

आप बहू को चढ़ाए गहने कैसे उतरवा सकती हैं ?? – स्वाती जैंन

केतकी , तुम तो इन गहनों को मांजी से भी ज्यादा संभाल कर रख रही हो , थोड़े दिनों में मांजी यह गहने तुमसे वापस लेने वाली हैं जेठानी सुमन अपनी देवरानी केतकी से बोली !! केतकी हैरानी से बोली – यह क्या कह रही हो भाभी ?? मुझे शादी में चढ़ाए हुए गहने भला … Read more

याद – आराधना सेन

नीतू आज बेटी की शादी की तैयारी में जुटी हैं उसे आज मांजी को दवा देना याद न रहा ,मेहमानों से घर भरा हुआ हैं लेकिन किसी को मांजी के कमरे में जाने की कोई इच्छा ही नहीं हैं नन्दे भी सजने संवरने में लगी हैं.  नीतू जल्दी सास के कमरे में गई ,कमरे से … Read more

असमर्थ – विनीता सिंह

सुबह सूरज निकल रहा है, सूरज की किरणें चारों दिशाओं में फैल रही पक्षियों के चहकने की आवाज कानों आ रही तभी, आरती जी घर के मन्दिर में पूजा कर रही है, तभी पूजा की घंटी की आवाज सुनकर आरव सोकर उठ गया और तकिए का सहारा लेकर बैठ गया , तभी मां आई और … Read more

बहू बनी सहारा – सुनीता माथुर

मां जल्दी से तैयार हो जाओ आपको कार से मंदिर ले चलती हूं आज तो शरद पूर्णिमा है आपको मंदिर जाना अच्छा लगता है ना—– अंजू बोली हां—— साक्षी बहू  लेकिन तुम्हें समर्थ को होमवर्क भी करवाना है,—– वो यू.के.जी में आ गया है दिन भर काम करके भी तुम थक गई होगी और शाम … Read more

परवरिश – डॉ बीना कुण्डलिया

 आज सुबह से ही स्कूल में खुशी के कारण डौली के तो पांव ही जमीन पर नहीं पड़ रहे थे। मन ही मन सोचती है, पंख होते तो दौड़कर घर पहुँच जाती। जल्दी जल्दी डौली ने स्कूल से घर आकर अपनी मम्मा को आवाज लगाई मम्मा, मम्माऽऽ मम्मा आप कहां है ? अरे मम्मा सुनो … Read more

बुढ़ापे का सहारा न बेटा न बेटी बल्कि बहू होती है । – करुणा मलिक 

आरती! बेटा मैं बाज़ार जा रहा हूँ , तुम सुबह पूछ रही थी ……… कुछ मँगवाना है क्या? हाँ पापा जी ! मम्मी जी की पीने वाली दवाई खत्म हो गई है। अभी डॉ० का पर्चा लाती हूँ । पापा जी! रात में खिचड़ी बना लूँ क्या? कल मिनी का पेपर है थोड़ा पढ़ा दूँगी … Read more

error: Content is protected !!