रती और निधि दोनों देवरानी जेठानी थी।रती एक बातूनी और मिलनसार औरत थीं जो किसी का भी काम करती थी और सबकी चहेती थी। सास ससुर सबके लबों पर सिर्फ रती रती ही रहता।
निधि कम बोलती अपने काम से मतलब रखती।उसे बड़ा बुरा लगता सब रती रती करते तो उसके पति अनिल भी कहते तुम भाभी से ये सीखो वो सीखो उसे लगता इस घर में उसकी कोई जगह ही नहीं है जबकि रती निधि को बहुत प्यार करती थी पर निधि रती को अपना दुश्मन समझने लगी थी।
वो दिन रात अनिल को कहती भाभी अपने आपकों बहुत ज्यादा समझदार समझती हैं हमेशा मुझे नीचा दिखाती हैं अनिल समझाता पर निधि के मन में विष भर चुका था।
रती और निधि के सास ससुर तीर्थ यात्रा पर जा रहे थे।उन्होंने दोनो बहुओं को बुलाया और रती को बोला सब का ध्यान रखना और निधि को बोला अपना ध्यान रखना और वो चले गए।रती सारा काम करती निधि पूछने भी ना आती ।
अनिल और विमल का सारा काम भी देखती ।अपने बच्चों नमित और नमिता का भी ध्यान रखती। इसी बीच निधि की मां उसके घर आई और उसने निधि को भड़काना शुरू कर दिया।वो धीरे धीरे अनिल को भी बरगलाने लगी और अनिल भी अपनी भाभी की तरफ से बदझन हो गया।इसी बीच निधि के मां बनने की खबर आई
अब तो रती उसका ध्यान रखती पर निधि उसके हाथ का कुछ नहीं खाती। बाहर का या उसकी मां जो देती वो। एक दिन बाहर का खा कर उसकी तबियत खराब हो गई और निधि ने सारा इल्ज़ाम रती पर लगा दिया कि रती ने मुझे बासा खाना दिया।विमल और अनिल भी उस पर चिलाने लगे कि तुम्हे अकल नहीं है तो क्यों करती हो।
आज रती को बड़ा बुरा लगा। निधि अपनी मां से के साथ अपने मायके आ गई और अपनी डिलीवरी तक वही रही उसकी सास का फोन आया तो बोली मै अपने बच्चे को मारना नहीं चाहती। अब निधि के घर जाने का समय पास आ रहा था और वो जिद पर अड़ी थी कि यदि रती वहां रहेगी तो मैं नहीं आऊंगी।
अनिल ने समझाया पर वो ना मानी। घर में क्लेश ना हो इसलिए विमल अपने परिवार के साथ दूसरे शहर शिफ्ट हो गया और साथ में अपने माता पिता को भी साथ ले गया। अब घर में सिर्फ निधि का राज था पर अब असली पापड़ तो उसे बेलने थे।बच्चा ,घर , से खाना पीना सब देखना पहले ये सब काम रती करती थी।
अब सब उस पर आ पड़ा कोई काम सही ना होता अनिल भी चीड़ चीड़ करता अब रती को अपनी गलती का अहसास हो रहा था।वो पछता रही थी वो अनिल से बोली मुझे भाभी से मिलना है वो बोला क्यों? निधि बोली मुझे भाभी से माफी मांगनी है अनिल अगले ही दिन विमल के घर चल पड़ा।वहां पहुंच कर देखा तो सब हसी खुशी खा पी रहे थे
हसी मजाक चल रहा था। अनिल को देखते ही रती दौड़ती हुई आई भैया आप अरे निधि और मुन्ना भी हैं रुको मैं आरती लाती हूं वो अपनी सास को लेकर आई बच्चे और रती की आरती उतार उन्हें अंदर लाई।पर विमल बोला रती तुम निधि के बच्चे को हाथ ना लगाना कही तुम्हारी वजह से उसे कुछ ना हो जाए। रती पीछे हट गई
निधि बोली भाभी मुझे माफ करदो मैने झूठ बोला था मेरी तबियत बाहर का खाकर खराब हुई थी। मेरे मन में आपके लिए जलन थी सब रती रती करते तो मेरा दिल खराब होता।मेरी जलन ने हंसता खेलता घर खराब कर दिया आप सब मुझे माफ कर दे और अपने घर चले।वो जोर जोर से रोने लगी रती बोली तुम रोओ मत मेरे लिए तुम मेरी बहन जैसी हो तुम्हे अपनी गलती का अहसास हो गया मेरे लिए काफी है।
रती के ससुर बोले बेटा तुम्हारे व्यवहार के कारण विमल ने झूठ बोला और हम किराए के घर में आए ताकि घर में शांति रहे बेटा एक घर सभी के साथ से चलता है एक घर में सभी की अपनी अपनी अहमियत होती है।अनिल बोला मेरे लिए भाई भाभी बहुत प्यारे हैं उनका अपमान मै बर्दाश्त नहीं कर सकता था
इसलिए तुम्हे तुम्हारी मां के घर जाने दिया ।आज निधि ने सबसे अपने व्यहवार की माफी मांगी और सब अपने घर आ कर एक साथ रहने लगे निधि को समझ आ चुका था कि एकता में ही ताकत है और यह परिवार की उसकी ताकत है।अंदर से रती पुकार रही थी कि निधि आओ मुन्ना सो गया है तुम खाना खा कर आराम कर लो।
निधि आखों में आंसू लिए अंदर आई उसे अपने किए पर पछतावा था। रती उसे प्यार से खाना खिला रही थी जैसे एक मां बेटी को।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी
vd