मुझे माफ कर दो… – रश्मि प्रकाश 

 आभा अभी-अभी ब्याह कर इस घर में आई थी। सब घरवाले अपनी नई नवेली बहू को सिर माथे पर रखें हुए थे पर कोई था जो आभा सेना ठीक से बात करता था ना उसके पास बैठना चाहता था….वो उसका ही पति अद्वैत था।

परिवार वाले बोलते भी,‘‘जा नई बहू से दो चार बातें कर ले, पूछ ले कुछ परेशानी तो नहीं ?‘‘ पर अद्वैत काम का बहाना कर उधर सेनिकल जाता।

आभा अद्वैत की शादी जान पहचान में ही हुई थी। आभा की बुआ अद्वैत की दूर की चाची लगती थी। सुन्दर सुशील आभा एक नजर मेंसबको भा गई पर जिसे भानी चाहिए वो ही उससे दूर दूर रहता।

शादी की भीड़ में आभा अद्वैत से कुछ बात भी नहीं कर पाई थी पर आज उसने सोच लिया कि अद्वैत से बात कर के रहेगी… पता नहींकुछ ऐसा था जो अद्वैत को अंदर अंदर खा रहा था और आभा से बात नहीं कर रहा था वो दर्द उसे और कचोट रहा था….शादी के बाद हरपत्नी पति के सामिप्य की चाह रखती है और जब वही दूर दूर रहे तो दर्द मुमकिन है।

रात को जब अद्वैत कमरे में आया उसने पूछ ही लिया कि ,‘‘आखिर मुझमें क्या कमी है? जो आप मुझसे दूर दूर रहते हैं , बात नहीं करतेहैं….एक कमरे में रहते हुए भी हम अजनबी से है….जब मैं पसंद नहीं थी तो मना कर देना था ….फिर शादी ही क्यों किए? ‘‘बोलते बोलतेआभा रोने लगी। 

अद्वैत आभा को रोता देख कर  सकपका गया। 

‘‘ प्लीज़ आप रोये नहीं, कोई सुन लेगा तो क्या सोचेगा।’’कहता हुआ अद्वैत अपना रुमाल उसकी तरफ बढ़ा दिया

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‘‘ क्या बात है अद्वैत आप मेरे साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे और प्लीज़ मुझे आभा बोले ,आप नहीं।‘‘ आभा बढ़े रूमाल को लेकरसाइड में रख दी और अपने आँचल से आँसू पोंछने लगी।

‘‘ आभा ”बहुत धीमे स्वर में अद्वैत बोला,‘‘ तुम प्लीज़ मुझे माफ करना, पर सच यही है कि मैं शादी नहीं करना चाहता था, पर घरवालोंकी खुशी के आगे चुप रह गया। मैं चाहकर भी नहीं बोल पाया कि मैं किसी और से प्यार करता हूँ।’’ सिर झुकाए अद्वैत आभा के सामनेघुटने पर बैठ माफी मांगने लगा।

‘‘ क्या?‘‘ लगभग जोर से चिल्लाते हुए आभा ने बोला

अद्वैत जल्दी से उसके मुँह पर हाथ रख दिया ताकि आवाज बाहर नहीं जाए।

‘‘अब  क्या सोचा है अद्वैत? क्या पूरी जिंदगी मैं यूं ही आपके इंतजार में बिताऊं और आपको छोड़ कर चली जाऊं? क्या करूं मैं? घरपरिवार की बदनामी होगी वो अलग। आपको ये बात शादी से पहले सोचनी चाहिए थी, मेरी क्या गलती इसमें?, आप जो फैसला लेनाचाहते ले सकते हो, क्योंकि खुश रहने के लिए साथ बहुत जरूरी है।‘‘कहकर आभा फफक फफक कर रो पड़ी

‘‘ मैं इतने दिन आपसे दूर दूर रहा, आप किसी से कुछ भी नहीं बोली, मेरा रवैया आपके प्रति अच्छा नहीं रहा फिर भी आप चुप रही।सचकहूं तो मैं उन दिनों खुद से लड़ रहा था। माना मैंने किसी से प्यार किया, शादी भी करना चाहता था पर आज आपसे बात कर के एहसासहो रहा कि वो मेरी किस्मत में थी ही नहीं।

जिसके साथ मेरी किस्मत जोड़ी गई उसको ही अपनी किस्मत मान कर सच्चे दिल सेअपनाऊँगा। इतने दिनों में मैं बस तुम्हे ये बात कैसे कहूं और तुम क्या जवाब दोगी इसी उधेड़बुन में लगा था पर तुमने जिस तरह अपनीबात कह दी मैं समझ गया कि मेरे अतीत को अतीत समझ कर अपने अद्वैत को तुम अपना लोगी।‘’  अद्वैत की आवाज में दर्द आभामहसूस कर रही थी



‘‘ क्या तुम अब भी मुझे अपनाने को तैयार हो? क्या तुम मुझे अपना प्यार दे पाओगी?‘‘अद्वैत पुनः घुटनों पर बैठ सिर झुकाए आभा सेपूछा

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‘‘ हाँ अद्वैत, मैं हमेशा सोचती थी पति ही मेरा पहला प्रेमी होगा जिसपर मैं सारा प्यार उड़ेल दूंगी,बस आप एक वादा करे कि अब से उसप्यार को भूलकर मुझे अपनाकर जिन्दगी भर साथ देंगे….अगर आपका जवाब हाँ है  तो मैं कल भी आपकी ही पत्नी थी आज भी आपकीही हूं। हमारे रिश्ते में अतीत एक सपना बन कर रह जाएगा। आपको इतना प्यार दूंगी कि आप बस मुझे ही याद रखेंगे।‘‘ कहते हुए आभाने अपना हाथ अद्वैत की तरफ बढ़ा दिया

अद्वैत आभा का हाथ पकड़ कर वादा किया और बोला,‘‘ आज से अभी से ये अद्वैत बस तुम्हारा है सिर्फ तुम्हारा।‘‘ कहते हुए उठा औरआभा को प्यार से अपने समीप ले आया।

सब की नजरों में उनकी सुहागरात तो शादी के दूसरे दिन ही मना दी गई थी पर सही मायने में आज उनका संगम हुआ, जिनके बीच अबकोई नहीं आ सकता था।

प्यार तो बस प्यार होता हैं, किसी से कभी भी हो सकता पर जब बंधन में बँध कर प्यार होता तो वो शायद ज्यादा गहरा होता।सब के आशीर्वाद और खुशी से बाँधे इस बँधन को अद्वैत को भी स्वीकार करना पड़ा पर मजबूरी में नहीं उसने दिल से आभा को अपनाकर अपना भरपूर प्यार उसे दे दिया।

कहते हैं वक्त सब गम भुला देता, अगर गम पर खुशी की बारिश हो तो वो गम ज्यादा दिन नहीं रहता। बस ऐसा ही अद्वैत आभा के साथहुआ। 

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धन्यवाद 

रश्मि प्रकाश 

# दर्द 

2 thoughts on “मुझे माफ कर दो… – रश्मि प्रकाश ”

  1. स्नेही, श्री, रश्मी प्रकाशजी ! सादर नमस्कार। कहानी बहुत बढ़िया लगी। हार्दिक शुभकामनाएं। – गोपाल व्यास वड़ोदरा।

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