मेरी माँ है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सुमन बेटी..आज तुम्हारी परीक्षा का पहला दिन है.. दही-चीनी खाकर जा.. पेपर अच्छा होगा..।” कहते हुए शारदा सुमन को दही खिलाने के लिये आगे बढ़ी, तभी सुमन उनका हाथ रोकते हुए बोली,” कोई ज़रूरत नहीं है..।” और स्कूल जाने लगी।उसके पिता बेटी को डाँटने ही वाले थे कि शारदा ने उन्हें रोक दिया।

    सुमन चार बरस की थी, तभी उसकी माँ का देहांत हो गया।रिश्तेदारों के कहने पर उसके पिता शारदा से विवाह करके बेटी के लिये नई माँ ले आये।कुछ ही दिनों में शारदा ने सुमन के मन में अपने लिये जगह बना ली।साल भर बाद शारदा एक बेटी की माँ बन गई लेकिन उसने सुमन के प्यार में कभी कोई कमी नहीं की।पहले की तरह ही उसे दुलारती और उसका ख्याल रखती।

    सुमन की एक चाची थी सुलोचना जो शारदा को पसंद नहीं करती थी।उसे सुमन के साथ शारदा का स्नेह रास नहीं आया।वो जब भी आती थी तो सुमन से मीठी-मीठी बातें करके उसके मन में शारदा के लिये ज़हर घोल देती।कभी कहती कि सौतेली माँ तुमसे प्यार का दिखावा करती है तो कभी कहती कि वो तुम्हारे पिता को तुमसे छीन लेगी।बस तभी से शारदा सुमन की #आँखों में खटकने लगी थी।वो शारदा की हर बात का टेढ़ा जवाब देती मगर शारदा ने कभी उसकी बातों को दिल से नहीं  लगाया।सुमन का व्यवहार देखकर उसके पिता चिंतित होते तो शारदा कहती,” धीरज रखिये..सब ठीक हो जायेगा।”

     एक दिन स्कूल से आकर सुमन सो गई।शारदा ने उसका हाथ छूकर देखा तो घबरा गई।उसे तेज बुखार था।उसने तुरंत डाॅक्टर को बुलाया, बेटी को दवा दी और रात भर उसके सिरहाने बैठी रही।

  सुबह जब सुमन ने आँखें खोली और शारदा को अपने पास ऊँघते देखा तो उसकी आँखें नम हो गई।छोटी बहन को आते देख उसने झट-से अपनी आँखें मूँद ली।शारदा बेटी से बोली कि तू दीदी के पास बैठ..मैं दूध गरम करके लाती हूँ।शारदा ने उसे उठाकर दवा खिलाई और जब दूध पिलाना चाहा तब वो फ़फक कर रोने लगी,” माँ..मुझे माफ़ी कर..।”

   ” चुप हो जा मेरी बच्ची..।” कहते हुए शारदा ने उसे अपने हृदय से लगा लिया।आज फिर से वो सुमन की माँ बन गई थी।

   अपनी माँ के प्यार और सेवा से सुमन जल्दी ही ठीक हो गई।एक दिन स्कूल जाने से पहले किचन में गई और शारदा के गले में अपनी बाँहें डालती हुई बोली,” आज लंचबाॅक्स में क्या दोगी माँ..।” शारदा के प्रति सुमन का स्नेह देखकर उसके पिता चकित रह गये।उन्होंने सुमन की ओर देखा जैसे पूछ रहें हों, ये तो तुम्हारी# आँखों में खटकती थी ना..।” सुमन मुस्कुराई जैसे कह रही हो, अब तो मेरी माँ है..।

    कुछ दिनों बाद फिर से सुलोचना चाची आई।उन्होंने आदतन सुमन से शारदा की शिकायत करना शुरु कर दिया, तब वो हँसते हुए बोली,” अब बस भी करो चाची..वो मेरी माँ हैं..उन्हें मुझे डाँटने और मुझे उनसे रूठने का पूरा-पूरा अधिकार है।” फिर अपनी छोटी बहन के साथ शारदा से लिपट गयी,” है ना माँ..।”

 ” हाँ मेरी बच्ची..।” कहते हुए शारदा की आँखें खुशी-से छलछला उठी और सुलोचना चाची अपना-सा मुँह लेकर लौट गई।

                                          विभा गुप्ता

# आँखों में खटकना            स्वरचित, बैंगलुरु

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