मेरे सैय्या सुपरस्टार. – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा: Moral Stories in Hindi

अपने भैया के साथ लंबी बातचित् में मशगूल बुआ जी  को देख कर पूरे घर में बच्चों के साथ-साथ सभी  बुआ जी को तिरछी नजरो से देख रहे थे। इतना खुश तो वह होली- दिवाली में भी नहीं होती थीं। फोन पर उनके चेहरे और भाव भंगिमा से एक अलग ही खुशी टपक रहीं थी।

भाई…. खुशी की बात तो  थी ही । कैसे  ना हो, भाई का फोन था उनकी बेटी की शादी थी । तीसपर वह अपने मायके की दुलारी बेटी और अपने भाईयो  की लाडली बहन तथा उनके बच्चों की इकलौती  बुआ…….!

भाई के मुँह से यह सुनते ही की भतीजी  की शादी  पक्की  हो गईं हैं  और वह शादी की कर्ता -धर्ता यानि चीफ गेस्ट हैं….वह उत्साहित हो उछल पड़ी थीं । उसपर भी भैया  ने साफ कह दिया कि -” बेटा,  जल्दी आना सब तुझी को संभालना है  तेरी भाभी को  उतना समझ  में नहीं आता है न  और वह क्या ही सम्भाल पाएगी।”

भाभी को नासमझ कहकर भैय्या ने बुआ जी के अंदर और जोश भर दिया। वह फुल जोश में आ गईं और बार- बार अपने भैया को दिलासा देते हुए कहने लगी कि -” भैय्या आप बिल्कुल भी चिंतित नहीं कीजिए सब ठीक से होगा। मैं शादी में अपनी जान लगा दूंगी छुटकी (भतीजी)को  संस्कारों के साथ ससुराल भेजने की जिम्मेदारी मेरी है ।”

ऐसा लगा जैसे उनकी छुटकी ससुराल नहीं जंग पर जा रही थी ! वह जान बूझकर जोर- जोर  से बात कर रही थीं ताकि घर के सभी सदस्य उनकी बातों को सुन सकें। सब सुन रहे थे पर किसी को मज़ाल था जो बीच में टोक देता!

उन्होंने फोन रखने के साथ ही पूरे घर वालों के सामने एलान कर दिया कि उन्हें उनके भाई ने बेटी की शादी में खास जिम्मेदारी सौंपी है और वो जी जान से उसे निभाने अपने मायके जायेंगी । आज से ही घर के सभी सदस्य उनके जाने की तैयारी में हाथ बटाने में लग जाएं । उन्होंने फूफा जी की तरफ देख कर कहा -” अजी बैठ कर टुकड़ -टुकड़ मुझे मत देखिये जाइए बाजार से दस केजी दूध, एक केजी  गोंद काजू ,किशमिश ,बादाम ,अखरोट ,इलायची,गरी ,छुहारे और देसी ……. माँ आपने चीनी नहीं बोला ….बुआ जी ने छोटे बेटे को पीछे मुड़कर आँख दिखाया तो वह धीरे से बाहर चला गया।

फ़ूफा जी ने विस्मित हो अपने आंखों पर से चश्मा खिसकाते हुए टोका -दस केजी दूध…! हे भगवान…  क्या करोगी उसका?

क्या कहा आपने….. क्या करुँगी …पेड़ा बनाऊँगी,गोंद का लड्डू भी लेकर जाऊँगी अपनी लाडली भतीजी के लिए। उसको अपने हाथों से बनाये हुए पेड़े से मुँह मीठा करवाऊंगी ।वह भी जान लें कि उसकी बुआ कितनी गुणी है। “

फुफा जी  ने फिर से समझाने की कोशिश की अरे भाग्यवान! बाजार से खरीद लो ना….इतना मेहनत करने की क्या आवश्यकता है.. वैसे भी नये युग के  बच्चे पेड़ा- वेड़ा ……..

अभी बेचारे पूरी बात कह भी नहीं पाये थे कि बुआ जी अपने आँचल को आँख में घुसेरते हुए बोली-“”हाँ हाँ …मेरे मायके की बात है ना तो आपको तो आँख में गड़ेगा ही…. रहने दीजिये आप मत जाइए  मैं खुद बाजार जाऊँगी लेकर आऊंगी  ……।

   तीर निशाने पर लग चुका था…..बुआ जी की घड़ियाली आँसू देख फुफा जी बिना कोई तर्क किए झट से झोला सम्भाला और दूध लाने चल दिये।  बुआ जी ने आँख पोछते हुए लपक कर एक लंबी सामानों की लिस्ट फुफा जी को थमा दिया ।

अगले दो दिनों के भीतर बुआ जी ने शादी में शामिल होने की सारी तैयारियाँ पूरी कर ली और अपने बच्चों सहित मायके पहुंच गईं। भाई -भाभी ने बुआ जी का बहुत ही गर्म जोशी के साथ स्वागत किया। बुआ जी ने चारो तरफ नजर दौड़ाते हुए कहा-” भाभी इतनी शांति क्यों पसरी हुई है लगता ही नहीं है कि यहां शादी ब्याह का घर है और मेरी छुटकी कहां है? “

भाभी ने सफाई दी-” अरे दीदी शादी घर से थोड़े न हो रही है होटल से होगी।  हम सभी आज शाम को ही वहां चलेंगे वहीँ पर सारी रस्में होंगी और आपकी छुटकी अभी दामाद जी से फोन पर बात कर रही है।”

बुआ जी ने अपने मुँह पर हाथ रख कर कहा- “क्या ?”

 धत झूठी…दो दिन बाद शादी है और वह अभी से दूल्हा से बतिया रही है। तभी छुटकी दौड़ी हुई आई और बुआ जी के गले लगकर बोली-”  बुआ मैं लड़के से पूछ रही थी कि वह शादी में कैसा सूट पहनने वाला है। “

बुआ जी  छुटकी के गाल पर हौले से थपकी लगा कर बोली-” चुप कर झूठी अपनी बुआ से मज़ाक करती है! शादी से पहले कोई दूल्हा से ऐसे भी पूछता है क्या!” दूल्हे के नाम पर छुटकी से ज्यादा बुआ जी के गाल लाल हो गए थे।

दूसरे दिन सब लोग होटल पहुंच गए। शादी की रस्में शुरू हो गई। शाम को हल्दी की रस्म थी। चारो तरफ रंग -बिरंगी बिजली बत्ती के चकाचौंध में एक कमल के फुल के आकार का स्टेज बना हुआ था  जिसके पीछे मोटे अक्षरों में ” हल्दी”  लिखा था। छुटकी अपनी सहेलियों के बीच जिसमें आधे “लड़के” थे वहीँ बैठी थी। आधे बीच-बीच में उठ-उठकर नाच रहे थे। कुछ तो छुटकी को भी उठाकर नचा रहे थे। बुआ जी को उनकी हरकत बिल्कुल भी पसंद नहीं आ रहा था। वह बार-बार उसे हल्दी की रस्म के लिए बैठा  दे रही थीं ।

बुआ जी अपने साथ लाई हुई गाँठ वाली हल्दी -चंदन पीसकर उसमें कुछ दुब रखकर ले आईं। वह अपने हाथों में हल्दी लेकर आगे बढ़ी छुटकी ने हल्दी देख ज़ोर से ऐसे चीखा … जैसे सांड ने लाल कपड़ा देख लिया हो-” नहीं.. नहीं.. नहीं… बुआ आप इस घास -फुस वाली हल्दी मुझे मत लगाना मेरा मेकअप बर्बाद हो जाएगा।।”

 बुआ जी एकाएक छुटकी के चीख से थरथरा गईं। इतने में उसकी एक सहेली” पूरा लंडन ठुमकता” वाले गाने पर नाचते आई और बुआ जी के कमर पर ठुमका लगा दिया उनके हाथ से हल्दी का कटोरा नीचे गिर गया। बुआ जी गुस्से से नागिन की तरह फुंकारते हुए वहां से चली गई। वह दुबारा कमरे से बाहर नहीं आईं। सब नाच गान में लगे हुए थे कोई ढूंढने भी नहीं आया कि वह कहां है।

आधी रात को छुटकी बगल में आकर लेट गई और बोली-” बुआ आप तो नाराज होकर चली आईं और इतना खास इवेंट मिस कर दिया। बुआ जी का गुस्सा उनके माथे पर नाच रहा था फिर भी उन्होंने अपने गुस्से को किसी तरह घोंट लिया। करती भी क्या… आखिर भतीजी की बात थी! माफ कर दिया।

सुबह -सुबह भैया  नसीहत दे गए कि कल तो तू बिना हल्दी लगाए छुटकी को पता नहीं क्यों छोड़कर भाग आई थी पर आज शादी का दिन है हमेशा उसके साथ में ही रहना। उसे वरमाला के लिए तुझे ही तैयार करवाने जाना है। बेचारी बुआ जी क्या बताती कि वह भूली नहीं हैं कल वाली बेइज्जती जो छुटकी और उसकी सहेली ने किया था! फिर भी उन्होंने सिर हिला कर हामी भरी।

शाम होने से पहले उन्हें छुटकी के साथ ब्युटी पार्लर जाना पड़ा। चार घंटे तक अनवरत मेकअप चलता रहा । तबतक बुआ जी  वहीँ नजर बंद रहीं। बीच-बीच में जब वह गुस्से से अकुलाने लगतीं तभी पार्लर वाली एक ग्लास कोको कोला दे जाती और एक आँख मार कर कहती बुआ जी जस्ट टू मिनट! बुआ जी चुपचाप थूक घोंट कर आँख बंद कर लेती।  वह बेचारी वहीँ बैठे -बैठे  कितनी बार झपकी ले चुकी थीं ।

छुटकी ने उठाया तो हड़बड़ाहट में कौन है’ कौन है कहने लगी। अरे बुआ जी- आपने नहीं पहचाना….आपकी लाडली हैं। बुआ जी आंखे फाड़ कर  छुटकी को ढूंढने लगीं। पार्लर वालीं ने फिर से अपनी आंखें मारी और कहा-” नहीं पहचाना न…देखा बुआ जी ….मेकअप का कमाल ! बुआ जी बड़बड़ाते हुए बोलीं-” हूं … रंग- पोत कर असली चेहरा  छुपा दिया  सियार  के जैसे  मेकअप के  नाम पर!”

छुटकी को उठाते हुए बोलीं-“ठीक है -ठीक है, जल्दी चलो बेटा बारात आ गई होगी।” बुआ जी छुटकी के माथे से गिरे आँचल को संभालते हुए माथे पर रखने  लगीं तो ब्यूटीशियन ने कहा-” ना ना बुआ जी आपका वाला ज़माना गया यह आँचल नीचे  ही रहेगा माथे पर मत रखो  लुक खराब हो जाएगा। ” बुआ जी धुएँ की तरह मुँह बनाते हुए छुटकी को लेकर गाड़ी से होटल  आ गईं ।

सच में बारात आ गई थी। अंग्रेजी ढोल नगाड़े डीजे बज रहे थे। बारातियों से सारा होटल पट गया था। दूल्हा अपने दोस्तों के साथ स्टेज पर खड़े -खड़े ठहाका लगा रहा था। सबलोग दुल्हन को जल्दी लाने के लिए बोल रहे थे। भैय्या ने बुआ जी को इशारे कर छुटकी को स्टेज तक लाने के लिए कहा।

बुआ जी ने देखा छुटकी की इतनी सारी सहेलियाँ आईं हुईं थीं पर कोई छुटकी को लेकर आगे नहीं बढ़ रहा था।उन्हें लगा शायद किसी  कोई मतलब नहीं है,  कोई जाए या न जाये बुआ तो है न  ! इसलिए तो वह आईं हैं यहां परछाईं बन कर रहेंगी  भतीजी के साथ!

बुआ जी गौरवांवित मुद्रा में छुटकी का हाथ पकड़ धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी तभी छुटकी ने बुआ जी से अपना हाथ छुड़ाते हुए कहा- ” बुआ अब आप रहने दो इसके बाद मुझे वहां तक अकेले ही जाना है इंट्री में केवल दुल्हन को ही रहना है…….।

क्या कहा ……अकेले जाएगी….नहीं नहीं…..बेटा  मैं तेरे साथ चलूँगी स्टेज तक…..मैं इतनी दूर से तेरे लिए ही तो आई हूँ। तुझे कैसे छोड़ दूँगी अजनबियों के बीच अकेले जाने के लिए।

इतना सुनते ही छुटकी झल्ला गई बोली… ओह बुआ  आपको कुछ नहीं पता ……. आप सचमुच में ओल्ड फैशनड हैं । न्यू  ट्रेंड में दुल्हन अकेले ही जाती है…. वरमाला  लेकर अपने  हबी से  मिलने…  आप जरा साइड होकर इंजॉय कीजिए….!

बुआ जी  का दिल धक्क से रह गया। वह अपने खुले मुँह पर हाथ धरे भतीजी की बात समझने की कोशिश में लगी हुई थीं  तभी स्टेज पर से माइक में कुछ एनाउंसमेंट हुआ और गाना बजने लगा-“””” मेरे सैय्या…सुपर स्टार…मेरे सैय्या… सुपर स्टार मैं फैन हुई…..स्टेज पर उधर से दूल्हा गाने पर मटक रहा था और उसी धुन पर छुटकी नाचते हुए हाथों में वरमाला लिए स्टेज की तरफ बढ़ने लगी  ….  मेरे सैय्या सुपरस्टार….मेरे सैय्या सुपरस्टार…..  मैं फैन हुई………..

बेचारी बुआ जी मुँह  फाड़े बुत बन देखती रह गईं।  उन्होंने भरी आँखों से  भैय्या और  भाभी की ओर देखा जो खीं -खी कर दांत  निपोर रहे थे और अपनी मॉडर्न बेटी के मटकते कमर को देख ताली बजा रहे थे। बुआ जी एक आह के साथ वही परे एक कुर्सी पर बैठ गई और सोचने लगीं… ..हाय रे दुनिया  ….    सच में ज़माना बदल गया है । यह वही भैय्या हैं  जो कभी भोली-भाली भाभी के जोर से हँसने पर उनके संस्कारों का पोस्टमार्टम कर देते थे और आज……! बेकार ही हम बच्चों को दोषी मानते हैं। आज संस्कार तो बड़े खो रहे हैं।

स्वरचित एवं मौलिक

डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा

Leave a Comment

error: Content is Copyright protected !!