मेरा भी स्वाभिमान – बिमला रावत जड़धारी

रजनी बैठी सोच रही थी। क्या ये मकान बेच दूॅं? जैसे बच्चें कह रहे हैं, तीन फ्लैट ले लेते हैं। तीनों भाइयों के नाम से तीन

फ्लैट एक साथ ही ले लेते हैं। आपका जहॉं मन करे वहॉं रह लेना। जितने पैसे बचेंगे वो हम तीनों आपस में बांट लेंगे। आप

पैसे का क्या करोगी? आप को अगर किसी चीज की जरूरत होगी तो हमें बोलना, हम ले आएंगे।अभी रजनी विचार कर ही

रही थी तभी उसकी दीदी अंजली आ गयी। दीदी नमस्ते, आओ बैठो। रजनी अपनी दीदी के लिए पानी लेने जाती है।

रजनी अपनी दीदी को पानी देती है। अंजली पानी लेते हुए पूछती है, रजनी तुम्हारा चेहरा क्यों उतरा हुआ है? कुछ हुआ

है क्या?नहीं दीदी, सब ठीक है। वो थोड़ा बुखार सा लग रहा है बस।रजनी तुम मुझसे पंद्रह साल छोटी हो। मैंने तुम्हें

अपने बच्चे की तरह पाला है। मुझे सब पता है जब तुम परेशान होती है तो तुम्हें सिर दर्द और बुखार हो जाता है। अपना कुछ

होश ही नहीं रहता! तुमने अपना क्या हाल बना दिया है! बेटे बहुओं ने कुछ बोला है क्या?नहीं दीदी ऐसा कुछ नहीं

है।देख रजनी मैं तेरी सगी बहन नहीं हूॅं। तुम मेरे चाचा की बेटी हो। मेरी मम्मी तो पहले ही गुजर गयी थी। तब मैं नौ

साल की थी। चाची ने मुझे कभी मम्मी की कमी नहीं होने दी। चाची के काफी इलाज के बाद तुम पैदा हुईं, मैं बहुत खुश थी,

मेरे लिए तो तुम खिलौना थी। चाची कहती मैं तेरा ख्याल रखूंगी तुम रजनी का ख्याल रखना। जब तुम तीन साल की थी

चाची को केंसर हो गया। मैं उन्हें चाची माॅं कहती थी। उन्होंने मुझे पढ़ाई के साथ – साथ घर का काम करना, तेरा ख्याल

रखना, सब सिखा दिया था। उन्हें सब रिश्तेदारों के ताने भी सुने की बिन माॅं की बच्ची है उसे नौकरानी बना दिया। चाची

कुछ नहीं कहती। मेरे पापा और चाचा जी मुझे कहते बेटा लोगों की बातों में नहीं आना, तुम्हें सब कुछ आना चाहिए, कल

को अपने ससुराल जाओगी तो तुम्हें कोई ताने नहीं देगा। पर किसी ने भी नहीं कहा की चाची माॅं को केंसर है। उनकी

तबीयत दिन-ब-दिन खराब होने लगी और एक दिन तेरा हाथ मेरे हाथ में देकर गुजर गयी। जब मेरी शादी हुई तब तुम

समझदार हो गयी थी और दुनियादारी समझने लगी थी। और अब तुम मुझे बताओ क्या बात है? रजनी की आंखों में आँसू

आ गये। दीदी जब जीजाजी गुजरे थे तब आप के बच्चों ने आप से बोला था कि यह मकान बेच कर कर दूसरी जगह मकान

लेते हैं। वहॉं से हमारा आफिस पास है। और आप मकान बेच कर बच्चों के साथ चली गई।हाँ रजनी, इन्हें गुजरे तीन साल

हो गए।आज वही स्थिति मेरे साथ हो रही है दीदी। बस यही सोच कर परेशान हो रही हूॅं।रजनी जब मैंने तुम्हें बताया

था बच्चे मकान बेचने के लिए बोल रहे हैं तब तुमने मना किया था कि दीदी आप ऐसी गलती भूल कर भी मत करना। और

जब मैंने तुम से पूछा था कि मेरी जगह अगर तुम होती तो तुम क्या करती।हाॅं दीदी मुझे याद है।देख रजनी, मैंने तो

गलती कर दी और उस एक गलती की सजा मैं आज तक भुगत रही हूॅं। मेरा स्वाभिमान तो मर गया है। अगर तुम्हें अपना

स्वाभिमान बचाना है तो जो सलाह तुम ने मुझे दी थी, तुम्हें अपने निर्णय पर अटल रहना होगा।दीदी अपने बिल्कुल ठीक

कहा, स्वाभिमान मेरा भी है।कल ही मैं बच्चों को अपना निर्णय सुना दूँगी।दूसरे दिन रविवार था, बच्चे घर ही थे। रजनी

तीनों बेटे बहुओं को अपने पास बुलाती है और कहती है, मैंने फैसला कर लिया है। मैं तुम तीनों में से किसी के साथ भी नहीं

रहूँगी। तुम लोगों को अगर मेरे साथ रहना हो तो रह सकते हो।पर मम्मी हम तीनों भाई चाहते हैं कि ये घर बेच दें।इस

मकान के हमें अच्छे पैसे मिल जाएंगे। कल को हमारा परिवार बढ़ेगा तो कैसे हो पाएगा।बच्चों अभी मेरी बात पूरी नहीं

हुई है। ये घर तुम लोगों के पापा ने बनाया है। एक एक पैसा जोड़ कर, अपनी इच्छाओं को मार कर। पर कभी तुम लोगों की

इच्छाएँ नहीं मारी। जो तुम लोगों ने मांगा वो दिया। उनकी मर्जी थी अपनी छत हो। मेरा परिवार अपने घर में रहे। उनकी

नौकरी नहीं थी टैक्सी चलाते थे। उन्होंने रात- रात टैक्सी चला कर सवारियाॅं को उनकी मंजिल तक पहुॅंचाया, तब जाकर

हम ये घर बना पाए। और जानते हो वो क्या कहते थे? कहते थे रजनी बच्चे तो बड़े हो कर जहाॅं नौकरी करेंगे वहीं अपनी

गृहस्थी बसा लेंगे। बुढ़ापे में हम दोनों ने ही अकेले रहना है। एक सेट किराए में दे देंगे उससे हमारा खर्चा निकल जाएगा।

बच्चे कभी हम से मिलने आते हैं तो उनके लिए ये दो कमरों का सेट है, उस में आ कर रह लेंगे। और अगर हममें से किसी एक

को भी कुछ हो जाता है तब भी यहीं रहना है। इसलिए मैंने सोच लिया है, मैं तो यहीं रहूंगी। स्वाभिमान मेरा भी है। और

अंजली मौसी भी मेरे साथ रहेगी। ये तुम लोगों के लिए मौसी है पर ये मेरी बहन से बढ़ कर मेरी माॅं है।पर रजनी मैं यहाॅं

कैसे रह सकती हूॅं।दीदी जैसे मैं रहूंगी वैसे ही। और जब आप का मन करेगा तब बच्चों के पास चली जाना। तुम लोगों ने

यहाॅं रहना है तो रहो पर किराया देना होगा। वरना तुम लोग फ्लैट लेकर वह जा सकते हो।पर मम्मी हमारे पास फ्लैट लेने

के इतने पैसे नहीं हैं।बेटा तुम्हारे पापा तो अकेले थे। जब वो कर सकते हैं तो तुम लोग क्यों नहीं। तुम तीनों की पत्नियाॅं तुम

सब कमाते हो और फिर बैंक से लोन लो। सब हो जाएगा। एक रास्ता और है, तुम तीनों मिलकर इस घर के ऊपर अपने

अपने लिए फ्लैट की तरह अपनी पसंद का घर बना लो। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कर सकती।तीनों बच्चे अपने – अपने कमरे

में चले गये।अंजली ने बोला रजनी अगर मैंने उस समय तुम्हारी बात मान ली होती तो आज मेरा भी स्वाभिमान होता।

बिमला रावत जड़धारी

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