हे प्रभु ऐसी ठंड क्यों बनाई आपने.. रमा कांपती जा रही थी और भगवान से ढेर सारे सवाल कर रही थी। अरे भाग्यवान.. भगवान को तो बख्श ही दो अब कोई नहीं मिला तो उनके पीछे ही पड़ गई। सारे शरीर की ताकत इनकी जीभ में ही आ गई है अब… हाथ पैर जकड़ गये हैं ठंड से पर जीभ.. वह तो और भी अधिक दुधारी हो गई है .. र
वि चुटकी लेते हुए बोले वैसे तुमसे कोई काम की बात पूछो तो चार बार बोलूँ तब जवाब देते हो.. सारे दिन मोबाइल और अखबार में ही आँखें गढ़ाये रहते हो पर लड़ने वाली बातें तुरंत सुनाई दे जाती हैं तुम्हें। यह तो नहीं नहा धो कर पूजा पाठ करें बस मेरे पीछे पड़े रहते हैं सारे दिन। तुमसे किसने कहा कि मैं पूजा पाठ नहीं करता.. मन ही मन जाप करता रहता हूँ अब क्या वह भी तुम्हें सुनाकर करूँ। ऐसे कौन करता है पूजा चार चार दिन नहाते नहीं। अरे ये ऋषि मुनि जब तपस्या करते थे
तो सालों एक ही मुद्रा में समाधि में बैठे रहते थे न। वो कौन सा रोज स्नान करते थे.. भगवान भाव देखते हैं भाव…ढकोसला नहीं.. रवि ने अपना बचाव करते हुए कहा ओहो तो श्रीमान तपस्या कर रहे हैं सुबह से लड़ लड़ कर.. बैठे रहो मैं तो चली नहाने वरना भगवान भी बासी बैठे रहेंगे। अब इनसे तो नहीं कह सकती न पर सच में ही बहुत कष्टदायक है ऐसी ठंड में नहाना। बाथरूम तक पहुँचने की हिम्मत जुटाते एक घंटा लग जाता है। रमा जल्दी आओ देखो एक बहुत ज्ञान का समाचार आया है। ऐसा क्या है जी जिसे बताने के लिए इतने उतावले हो रहे हो।
अरे बड़े काम का शोध किया है वैज्ञानिकों ने जिसके अनुसार सर्दियों में रोज नहाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। वह कैसे.. वह ऐसे कि ऐसा करने से हमारी त्वचा खुश्क हो जाती है यह शोध ऑस्ट्रेलिया के वैज्ञानिकों ने किया है
उनका कहना है कि भारत में नियमित रूप से नहाने वालों की संख्या विश्व में सबसे अधिक है। सर्दियों में मौसम खुश्क होने की वजह से जो नेचरल ऑयल हमारी त्वचा छोड़ती है वह गर्म पानी से धुल जाता है और त्वचा खुश्क हो जाती है। इसलिए हफ्ते में बस दो तीन बार ही नहाना चाहिए।
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मिस्टर रवि जी अपने पक्ष को मजबूत करने वाले समाचार भी खूब मिल जाते हैं आपको और हमारे वैज्ञानिकों का कहना नहीं याद है क्या आपको कि नहाने से रोम छिद्र खुल जाते हैं और त्वचा अच्छे से सांस ले पाती है और हम स्वस्थ रहते हैं। अब पढाई लिखाई हो गई हो तो गर्म पानी रख दूँ बाथरूम में।
आज मकर संक्रांति है और आप भारत में हैं। याद आया अम्माँ क्या कहती थी कि मैं याद दिलाऊँ.. दोनों समवेत स्वर में… जो आज नहीं नहाता वो लंका का गधा बनता है अगले जनम में.. और दोनों के ठहाके सारे घर को गुंजायमान करने लगे। ऐसा ही खट्टा मीठा सा है पति पत्नी का रिश्ता अगर नोंक झोंक न हो तो सूना सूना सा लगता है और प्यार भी इसी से बढ़ता है। एक गाना भी है न… हमीं से मुहब्बत, हमीं से लडाई😂
स्वरचित कमलेश राणा
ग्वालियर