नित्या जब मायके से ससुराल आईं तो उसने सास सुनयना के सामने तीन चार बड़े बड़े गिफ्ट के पैकेट रख दिए , और एक छोटी डिब्बी में एक सोने की चेन और अंगुठी भी थी ।ये क्या हैं नित्या सुनयना ने पूछा। नित्या बोली वो भतीजी का मुंडन कराया था न तो पापा मम्मी ने ये सब गिफ्ट आप सबके लिए भेजे हैं ।
इतने सारे गिफ्ट , हां इसमें एक साड़ी आपके लिए और एक दीदी के लिए है और एक सूट का कपड़ा पापा जी के लिए और एक जीजा जी के लिए है और ये दीदी के बच्चे का सूट है और ये चेन और अंगुठी ,ये अपने दामाद को दिया है ।पर बेटा ज़रा से मुंडन में इतना सबकुछ देने की क्या जरूरत थी पापा को मना करो ठीक है
मम्मी अब पापा दे रहे हैं तो मैं क्या ही मना करूं। नहीं बेटा ये सब ठीक नहीं है ।हम लोग तो तुम्हारे पापा के बोझ तले दबे जा रहे हैं। हमारे यहां तो रिश्ते प्यार और मोहब्बत से चलते हैं पैसों के लेने देने से और इस तरह से गिफ्ट्स देने से नहीं।तुम जब भी मायके जाती है कोई न कोई सामान लेकर आती है ।
कोई चीज त्योहार पड़ गया तो उसमें भी ढेरों सामान और नकदी भी भेज देते हैं । अभी देखो कुछ समय पहले दीवाली निकली है तब भी ग्यारह हजार रुपए और कितना सारा मिठाई नमकीन भेजा था । हमने मना भी किया था।अब बस बहुत हो गया ।अब तो तुम्हारी शादी के भी आठ महीने हो रहे हैं बस करें कितना तोहफा भेजेंगे। मगर मैं कैसे उनको मना करूं समझ नहीं आता है।
आनन्द जी के दो बच्चे थे एक बेटी और एक बेटा श्रेयांस। श्रेयांस की शादी पहले हो चुकी थी ।वो भी एक गरीब घर की लड़की से शादी की थी। जिनके पास देने को कुछ नहीं था। शादी का सभी कार्यक्रम यहां तक कि बारात की आव भगत में भी आनन्द जी ने पैसे लगाए थे तब जाकर शादी सम्पन्न हो पाई थी।
लड़की बहुत सुशील और अच्छी थी तो पसंद आ गई थी ।और बहुत सुंदर भी । वाकई बहू बहुत अच्छी निकली।जब भी बहू सोनिया के मम्मी पापा सोनिया से मिलने उसके ससुराल आते तो मिठाई वगैरह लेकर आते । आनन्द जी को उनकी परिस्थिति या मालूम थी तो वो सोनिया के पापा को मना करते थे कि आप कुछ भी उपहार लेकर मत आया करो ।
रिश्ते उपहार से नहीं प्यार मोहब्बत से आगे बढ़ते हैं। आपने बहुत सुशील और सुघड़ बेटी थी है हमें और क्या चाहिए।हम अपनी बहू से बहु खुश हैं ।आप वैसे ही बेटी से मिलने जुलने आइए लेकिन ये सब सामान लेकर मत आइये । शुक्र है कि आप लोग जैसे नेक लोग मिले हैं हमें। बिटिया अपने सास ससुर का बहुत ध्यान रखा करो । अच्छे लोग हैं अच्छा अब हम चलते हैं ।
आनन्द जी के पास कोई नौकरी नहीं थी और ना ही कोई बिजनेस ।वो तो बस शेयर मार्केट का काम करते थे। शेयर बाजार भी जब अच्छा हो गया तो अच्छा नहीं तो फिर ऐसे ही चलता था।बस घर का शादी ब्याह का , रिश्ते दारी का सबकुछ उसी से चलता था। बेटे की शादी के दो साल बाद बेटी नित्या की शादी हुई ,
नित्या थोड़ी सांवली थी , सांवली क्या थोड़ा ज्यादा ही रंग दबा था इसलिए बहुत परेशानी हो रही थी शादी में ।और फिर बहू पसंद करने गए हैं तो बहू तो सुंदर और आकर्षक होनी चाहिए न बेटा चाहे जैसा हो।
एकाध जगह उसकी शादी पक्की भी हुई तो रंग को आड़े हाथों लेकर पैसों की मांग बहुत ज्यादा रखी गई जिसको आनन्द जी पूरा नहीं कर सकते थे। किसी किसी शहर में और किसी किसी समाज में शादी के समय बहुत डिमांड होती है । जिसको पूरा कर पाना हर इंसान के वश में नहीं होता।
नित्या ने जब देखा कि शादी में बहुत परेशानी आ रही है तो शादी से उसका मन ही उचाट हो गया ।और वोसमय पास करने के लिए किसी प्राइवेट कंपनी में नौकरी करने लगी । वहां उसके साथ राहुल नाम का एक लड़का भी काम करता था । दोनों का एक ही काम था।
दिन के दस घंटे साथ साथ ही रहते थे। इसी तरह साथ साथ रहते कब दोनों के मन में प्यार के अंकुर फूट पड़े पता ही न चला।घर में नित्या के शादी के लिए परेशान आनन्द जी और निर्मला जी को कुछ पता ही नहीं चला कि नित्या राहुल के प्रेम में पड़ गई है। नित्या घर पर रोज रोज के ड्रामे से परेशान हो गई थी।
करीब करीब रोज़ ही ये सिलसिला चलता रहता कि घर में कोई शाम को आ रहा है और नित्या को बना संवार कर बैठा दिया जाता। बाकी सबकुछ तो ठीक है लेकिन लड़की का रंग बहुत दबा है ।
वैसे नैन नक्श अच्छे थे नित्या के पढ़ी लिखी थी एम बीए किया हुआ था। आनन्द जी पैसा भी ठीक ठाट खर्च कर रहे थे बस नित्या सांवले रंग से मात खा जाती थी। बहुत ज्यादा मांग 30,40 लाख तो आनन्द जी नहीं पूरी कर सकते थे न ।
इसी बीच नित्या के मामा की लड़की की शादी आई ।और नित्या डांस बहुत अच्छा करती थी । नित्या के मामा की लड़की शिखा की सगाई के समय शिखा के पति के साथ कुछ दोस्त भी संग आए थे । फिर लेडिज संगीत के प्रोग्राम में पति का वो दोस्त फिर आया था कुछ सामान लेकर उसने नित्या को डांस करते देखा तो वो उसका दीवाना हो गया ।
अब वो किसी न किसी बहाने से घर आता रहता था और नित्या शिखा के साथ होती थी तो उससे मुलाकात का बहाना ढूंढ लेता ।वो नित्या को पसंद करने लगा। शिखर नित्या के सांवले रंग पर ही मुग्ध हो गया। शिखा की शादी निपटने के बाद शिखर ने शिखा से कहा कि अपनी सहेली नित्या से मेरी शादी करवा दो। सच में शिखर शिखा चौक गई अरे हां मैं उसे पसंद करने लगा हूं ।
अब शिखा शिखर का प्रपोजल लेकर बुआ फूफा के घर गई और जब सब बातें बताई तो आनन्द जी और निर्मला जी को जैसे विश्वास ही नहीं हो रहा था। लेकिन तब-तक नित्या राहुल के प्रेम में पड़कर बहुत आगे बढ़ चुकी थी।और बस वो मौके की तलाश में थी कि कब घर का माहौल अनुकूल हो
और वो राहुल से शादी की बात घर में करें।इधर आनंद जी शिखा के कहने पर निर्मला जी के साथ शिखर के घर बार देखने पहुंच गए वो जरा भी देर नहीं करना चाहते थे। शिखर के मम्मी पापा से मुलाकात की तो शिखर ने बताया कि हां मैं आपकी बेटी को पसंद करता हूं।और मैं शादी करना चाहता हूं ।
और वो लोग अपनी बिरादरी के भी निकले । आनन्द जी ने पूछा और आपकी डिमांड कया होगी तो शिखर के पापा ने कहा बस बारात का स्वागत सत्कार अच्छे से कर दीजिए बस और कुछ नहीं चाहिए भगवान का दिया बहुत कुछ है हमारे पास। आनन्द जी के तो खुशी का ठिकाना न रहा।
आज नाश्ते की टेबल पर नित्या ने अपने मम्मी पापा से कह दिया कि वह राहुल से शादी करना चाहती है, बेटा कौन है ये राहुल और कहा रहता है , क्या करता है ,किस बिरादरी का है आदि आदि। पापा वो मेरे साथ काम करता है ।एम बीए है अभी नौकरी ढूंढ रहा है ।और किस जाति का है
पापा वो श्रीवास्तव है ।तो क्या बिजातिय से शादी करेंगे क्या हम लोग बनिया है और जानती हो न हमारे यहां अंदर कास्ट में शादी नहीं होती।पर पापा , नहीं बिल्कुल नहीं ।हम लोग कल एक लड़का और उनका घर वार देख आए हैं वो लोग तैयार है अच्छा घर है लड़के को तुम भी जानती हो शिखा की शादी में मिला था तुमसे।
फिर आनन्द जी ने सोचा अच्छा खासा रिश्ता हाथ से न निकल जाए ।कहीं किसी के बहकावे मे आकर कुछ गडबड न हो जाए इसलिए फटाफट सगाई करकें शादी की डेट जल्दी ही निकाल लें ।
उन्होंने आनन फानन में शादी की डेट भी निकलवा ली। नित्या ने बहुत विरोध किया लेकिन उसकी एक न चली जा बिरादरी में मेरी क्या इज्जत रह जाएगी लोग क्या कहेंगे कि आनन्द जी ने बेटी की शादी दूसरी कास्ट में कर दी ।
और फिर नित्या की शादी हो गई ।और शादी हो जाने के बाद भी नित्या राहुल के संपर्क में बनी रहीं। उससे फोन पर बात करती ।एक दिन शिखर ने देख लिया ये तुम किससे बात करती रहती हो । देखो नित्या अब हमारी शादी हो गई है और किसी लड़के से बात करना तुम्हारा इस तरह ठीक नहीं है।तुम ऐसा कोई काम न करो जिससे रिश्ते में दूरियां आ जाए ।
आज शिखर ने नित्या के पापा से कहा कि नित्या किसी और को पसंद करती थी और वो उससे अब भी बात करती है ये बात अपने मुझे बताई नहीं ।अब जबकि हमारी है शादी हो चुकी है नित्या को समझा लें नहीं तो कुछ भी हो सकता है। ऐसा ही न हो मुझे अपने मम्मी पापा को बताना पडे ।
शिखर गुस्से में वहां से चला गया।अब आनन्द जी और निर्मला जी परेशान। बेटी को पापा ने बहुत समझाया देखो बेटा अब तुम्हारी शादी हो गई है अच्छा परिवार है शिखर भी अच्छा है
अब अपना पुराना कुछ याद करके या राहुल से संपर्क रख के अच्छा नहीं कर रही हो । रिश्ते खराब होंगे ।बंद करो फोन करना । आनन्द जी ने नित्या से राहुल का नंबर लेकर उसे भी डांटा और समझाया कि तुम नित्या की जिंदगी से दूर चले जाओ ।
अब शिखर थोड़ा आनन्द जी से नाराज़ रहने लगा तो आनन्द जी ने एक तरीका निकाला कि मौके बेमौके उपहार और गिफ्ट भेजने लगे नित्या के ससुराल में जिससे दामाद जी खुश हो जाए ।
आज नित्या ने एक बेटे को जन्म दिया है ।अब सभी लोग एक साथ मिलकर खुश हैं नित्या ने भी समझदारी से काम लिया।आज फिर आनन्द जी खूब सारा उपहार लेकर बेटी के ससुराल आए हैं । आनन्द जी ने बेटी के सास से कहा समधिन जी आज तो आप उपहार लाने का ताना न दीजिएगा हम तो ये सब अपने नवाशे के लिए लिए है ।
नित्या की सास बोली अच्छा आज तो आपलाए है आगे से मत लाना । रिश्ते उपहार से नहीं प्रेम प्यार से पालते फूलते हैं ।बस आपके और हमारे बीच ऐसे ही प्यार बना रहे। ऐसे ही हम सब फलते फूलते रहे , हां समधिन जी और सभी लोग खिलखिला कर हंस पड़े।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
5 अप्रेल