क्योंकि सास भी एक मां होती है – मुकेश पटेल

देविका और विनोद आपस में बातें कर रहे थे क्योंकि उनकी बेटी श्रेया अब जवान हो चुकी थी।  उसकी शादी की चिंता उनको सताने लगी थी कि बेटी की शादी अब कर देनी चाहिए आखिर उम्र के 25 वर्ष पूरे कर चुकी थी, अब नहीं होगी शादी तो कब होगी।

वैसे बड़े शहरों में लड़कियों की शादी 25 और 30 साल के बीच ही होती है लेकिन गांव में अभी भी शादी 20 साल से पहले ही कर दी जाती है।

लेकिन फिर भी मां-बाप को तो अपनी बेटी की शादी की चिंता सताती ही है।  ऐसे में श्रेया के माँ ने बोला कि आप अपने जीजा जी से क्यों नहीं बात करते  वह एक बार एक लड़का के बारे में बता रहे थे कि काफी अच्छा लड़का है।

तभी श्रेया के पापा को याद आया की शर्मा जी जो उनके ऑफिस के मित्र थे, एक लड़का  के बारे में बता रहे थे जो उनके ही शहर लखनऊ में रहता था और वह लोक निर्माण विभाग में इंजीनियर के पद पर कार्य करता था।  लड़का बहुत ही नेक और सीधा साधा था, लेकिन उसकी मां नहीं थी बस उसके घर में एक छोटी बहन और उसके पिताजी थे यह बात श्रेया के पापा ने अपनी पत्नी देविका को बताया कि यह बताओ यह लड़का कैसा रहेगा।

बात आगे बढ़ाएं क्या यह खबर सुनते ही कि लड़की की मां नहीं है श्रेया की मां ऐसे उछ्ल पड़ी जैसे पता नहीं क्या सुन लिया हो  उसने बोली बेटी के सास नहीं है यह तो और भी अच्छा है।



वो इसलिए बोल रही थी क्योंकि देविका की सास पुराने ख्यालों की थी और बहुत ही नियम से कोई भी काम करती थी और देविका नए खयालो की औरत थी जिनके अपनी सास से कभी भी बनी नहीं इसलिए देविका को लगता था कि सारी सास अपनी बहू की दुश्मन होती है।

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जबकि ऐसा नहीं है हमारे समाज में बहुत सारी सास ऐसी होती है जो कहीं से भी मां से कम नहीं होती है लेकिन यह भी एक सच्चाई है कि हमारे समाज में सास को एक ऐसा प्रतिबिंब बना दिया गया है जिसका मतलब होता है खडूस औरत जो कभी अपनी बहू से प्यार कर ही नहीं सकती।

ऐसा क्यों है यह मुझे नहीं पता लेकिन यह पूरी तरह से सच्चाई नहीं है और हम इसका कभी भी सपोर्ट नहीं करते कि सारी सास बुरी  होती है।

कहानी की तरफ चलते हैं देविका अपने पति विनोद से उस लड़के से बात करने के लिए कहा तो अगले दिन ऑफिस जाते ही विनोद ने अपने दोस्त शर्मा से उस लड़का के बारे में बात की यार पता करो वह लड़के की शादी अभी तक हुई कि नहीं हुई शर्मा ने बोला रूको मैं उसके पिताजी से बात करके बताता हूं।

शर्मा उसी समय फोन लगाया और और बात किया तो पता चला कि रमेश की शादी अभी हुई नहीं है लेकिन कहीं कहीं बात चल रही है लड़की वाले का आना जाना उनके घर शुरु हो चुका था।

शर्मा जी ने रमेश के पिताजी से अगले रविवार मिलने के लिए दिन फिक्स कर दिया श्रेया के पापा विनोद , रमेश के घर गए, घर जाते ही रमेश से ही सबसे पहले मिले क्योंकि उसी ने दरवाजा खोला था और रमेश को देखते ही विनोद जी को रमेश पसंद आ गया था। रमेश शर्मा जी और विनोद जी के पांव छुए और बैठने के लिए कहा तब तक रमेश की बहन ने चाय पानी ला के रख दिया।



कुछ देर बाद रमेश के पिताजी भी आकर बैठ गए और काफी देर तक बातें चलती रही बातों के दौरान ही रमेश के पिताजी ने बोला कि देखिए जी मैं पहले ही बता देता हूं मुझे कोई भी दहेज नहीं चाहिए मुझे बस एक ऐसी लड़की चाहिए जो रमेश की मां की परछाई हो हमारे घर को घर नहीं स्वर्ग बना दे।

बस एक औरत की कमी है हमारे घर में बस वही पूरी हो जाए बाकी मुझे कुछ नहीं चाहिए।

यह सुन विनोद जी भी बहुत खुश हुए इस जमाने में भी इस तरह के लोग हैं जहां आजकल लड़का सरकारी नौकरी में गया नहीं उनकी डिमांड सातवें आसमान पर पहुंच जाती है, दहेज तो ऐसे मांगने लगते हैं जैसे लड़की के पिताजी को उन्होंने कर्ज दे रखा है।

चलिए छोड़िए बात तय हो गई लड़के वाले देखने के लिए श्रेया के घर पर आए मैंने आप लोगों को श्रेया के बारे में तो अभी तक बताई नहीं श्रेया वाकई बहुत ही खूबसूरत थी उसे कोई लड़का ना कर ही नहीं सकता था अगर सिर्फ चेहरे से पसंद करना हो तो और यहां श्रेया तो चेहरे और अपने स्वभाव दोनों से अच्छी थी आखिर में श्रेया और रमेश की शादी तय हो गई दोनों की शादी के दिन 6 महीने बाद नवंबर में फिक्स हुई।

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लेकिन उनकी बातें लगातार वीडियो कॉल के द्वारा होनी शुरू हो गई श्रेया अपने शादी के सपने देखना शुरु कर दिया रमेश को भी श्रेया बहुत पसंद थी दोनों घंटे फोन पर बातें किया करते थे रमेश अपनी मां के बारे में बताता है कि आज मेरी मां होती तो कितना खुश होती। मां को बताता मां बहू के रूप में तुम्हारा ही प्रतिबिंब लेकर आया हूं मुझे तो ऐसा लगता है कहीं तुम तो श्रेया के  रूप में नहीं आ गई है श्रेया भी अपने आपको इतनी इज्जत मिलते देख फूली नहीं समाती थी।



धीरे-धीरे समय बीतता गया शादी के दिन नजदीक आ गया और श्रेया और रमेश दोनों एक बंधन में बंध गए।

श्रेया अपने ससुराल पहुंची तो वहां पर स्वागत करने के लिए रमेश की ही एक मुंह बोली चाची जो  उनके पड़ोस में ही रहती थी उनको घर के अंदर प्रवेश कराया।

आज रमेश के पिताजी बहुत उदास थे अपनी पत्नी के बारे मे  सोच रहे थे कि आज अगर रमेश की मां होती तो कितनी खुश होती एक पल के लिए तो रमेश की चाची में ही उनको अपनी पत्नी नजर आने लगी थी ऐसा लग रहा था कि श्रेया की स्वागत रमेश की मुंह बोली चाची नहीं बल्कि रमेश की मां कर रही है।

धीरे धीरे श्रेया ने पूरे घर को संभाल लिया 6 महीने में ऐसा लगता था कि वह इस घर में 6 साल से रह रही हो सबका ख्याल रखना अपनी ननद को मां से भी कहीं कम प्यार नहीं करती थी।

उसकी ननद भी बहुत खुश थी का सबको श्रेया भाभी जैसी भाभी मिले दोस्तों ननंद भाभी का रिश्ता वाकई बहुत ही अनमोल होता है अगर प्यार से रहे तो इससे बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता है और अगर दुश्मनी पर आ जाए तो इससे बड़ी दुश्मनी का कोई रिश्ता नहीं होता है।

जो भी कहे लेकिन कहीं ना कहीं श्रेया को भी अपनी सास की कमी महसूस जरूर हो रही थी क्योंकि ससुराल बिना सास का कैसे हो सकता है।

दोस्तों हम ऐसे बहुत लोग पता नहीं क्यों सास से  इतनी नफरत करते हैं जबकि ऐसा नहीं है सास भी एक महिला होती है।

उसके अंदर भी दिल होता है वह हमारी गार्जियन होती है जब हम एक मां को छोड़कर जाते हैं तो हमें सास एक दूसरी मां के रूप में मिलती है वह हम पर निर्भर करता है कि हम अपने सास बहू के रिश्ते को कैसे मैनेज करते हैं हमारा गुस्सा उनके पुराने ख्यालों से  होती हैं लेकिन उनकी इज्जत करके उनकी भी मर्यादा रखें और अपनी भी मर्यादा को निभा सकते हैं

उम्मीद ही नहीं पूरा विश्वास है कि आप को यह कहानी पसंद आई होगी अगर आपको यह कहानी पसंद आई है तो हमारे पेज को लाइक कीजिए शेयर कीजिए और अपनी सास से  नफरत नहीं बल्कि प्यार कीजिए क्योंकि सास भी एक मां होती है

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