अनुराधा अगले दिन साड़ी पहन कर ऑफिस आई थी, ऑफिस पहुंच कर देखा कि अभी तक तो कोई भी नहीं आया है यहां पर, वह खाली वक़्त देखकर कुमार सर की दी हुई एक फाइल का अध्ययन करने लगी।
लगभग बीस मिनट बाद कुमार सर की गुड मॉर्निंग अनुराधा की आवाज से उसका ध्यान टूटा, उसने भी मुस्कुराकर कुमार सर को गुड मॉर्निंग रिप्लाई किया, और चाय मंगवा ली, चाय पीते पीते अनुराधा ने कुमार सर की तरफ देखा तो वो बहुत खुश लग रहे थे, “ऐसा इंसान जिसकी पूरी मेहनत का श्रेय कोई दूसरा ले रहा हो, फिर भी वह ख़ुश हो” सचमुच कितना मासूम हृदय है कुमार सर का..
चाय ख़तम होते ही कुमार सर ने एक फाइल निकाली और उसकी ब्रीफिंग करना शुरू कर दिया, जब वह काम के बारे में बात करते है तो एकदम खो से जाते हैं, न उनको वक़्त का पता चलता न ही अनुराधा को, दो बज गए थे अब तो, लंच टाइम भी निकल चुका था.. अनुराधा ने ही कुमार सर को टोकते हुए कहा कि सर भूख लग रही है, कुछ ऑर्डर करू क्या खाने का?
कुमार सर ने कल वाले रेस्टोरेंट में फ़ोन लगा कर खाने का आर्डर कर दिया।
अनुराधा ने कुमार सर से कहा, सर कल आपने मेरे लिए खाना मंगाया था, इसलिए आज खाने का पेमेंट मै करूंगी, कुमार सर जो कि सुबह से फाइल की ब्रीफिंग करते करते तनाव में लग रहे थे, उसकी बात सुनकर मुस्कुरा दिए, बोले उस रेस्टोरेंट में मेरे नाम से मंथली अकाउंट है, पूरे महीने भर का हिसाब मै हर महीने के अंत में कर देता हूँ, इसलिए अभी उसे पैसे देने की कोई जरुरत नहीं है।
इस पर अनुराधा ने कुमार सर से कहा कि तो फ़िर आपको मेरी एक बात माननी पड़ेगी?
कुमार सर ने कहा क्या बात है बोलिए तो सही।
अनुराधा ने कहा जब तक आप यहां पर हैं, मेरा लंच आपकी तरफ से होगा तो आपका डिनर मेरी तरफ़ से होगा।
कुमार सर ने हँसकर कहा कि बड़े ही सस्ते में निपटा रही हैं मुझे तो आप? पहली आपकी ज्वाइनिंग की पार्टी, फिर मंत्री जी को पकड़वाने की पार्टी, ये सब एक डिनर से नहीं निपटेगा अनुराधा जी, जब आप यहां शिफ्ट हो जाएंगी, मुझे अपने हाथों से बना खाना खिला दीजियेगा हिसाब बराबर हो जाएगा!
उनकी बात सुनकर अनुराधा बस मुस्कुरा कर रह गई, उसने तो कुमार सर के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त गुजारने के लिए ही कुमार सर से डिनर भी साथ करने का आग्रह किया था, वरना वो जानती थी कि खाने के बिल का छोटा मोटा अमाउंट कुमार सर कि हैसियत के हिसाब से बहुत ही छोटी सी बात थी।
परन्तु कुमार सर ने अभी तो डिनर तक की बात तो कन्फर्म नहीं की थी, इसलिए उसने दुबारा कुमार सर को टटोला, सर मै तो गाजियाबाद में नई हूँ, यहां पर मेरा कोई परिचित और रिश्तेदार भी नहीं है, शाम को गेस्ट हाउस में जाने के बाद से रात को सोने के समय तक का वक़्त बिल्कुल भी नहीं कटता, इसलिए मैंने आपसे साथ में डिनर का आग्रह किया था, आप उस वक़्त कहीं और व्यस्त होंगें मुझे पता नहीं था, वरना मै आपसे ऐसा आग्रह करती ही नहीं।
अनुराधा की बात सुनकर कुमार सर ने उसे चुप कराते हुए कहा, अभी लंच के बाद शाम तक इस फाइल की ब्रीफिंग कंप्लीट कर लें, डिनर की बात उसके बाद भी कर सकते हैं।
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अनुराधा को उसके खुद के व्यवहार पर आश्चर्य हुआ, महज़ तीन चार दिन की पहचान के दम पर वह कितना अधिकार जमाने लगी है कुमार सर पर, ऐसा नहीं कि ट्रेंनिग के दौरान उसे कोई पुरुष सहयोगी नहीं मिले, पर उसने कभी किसी से बात करना तक पसंद नहीं किया, फ़िर कुमार सर पर वह क्यों इतना दबाव बना रही है?
लंच आने पर दोनों ख़ामोशी से लंच करने लगे, कुमार सर ने नोट कर लिया था, कि उनकी बात शायद अनुराधा को चुभ गई है, इसलिए उन्होंने अनुराधा से कहा, बुरा मत मानो मै काम के वक्त पूरी शिद्दत से सिर्फ काम की ही बात करता हूं, इसलिए मैंने आपको बाकी बातों के लिए मना कर दिया, डिनर का क्या है, हम कहीं भी किसी ढाबे में कर लेंगे, वैसे भी जब से मैंने बार में जाना बंद कर दिया है, मेरा भी वक़्त खाली ही गुजरता है।
अनुराधा ने उनकी बात पर फीकी सी हँसी देकर शांत हो गई, वो सोच रही थी कि कहां वो इतने रोमांटिक अंदाज़ में कुमार सर के साथ डिनर और फिर घूमने का प्लान बना रही थी, और यह महाशय उसे सिर्फ किसी ढाबे में खाना खिलाकर वापस गेस्ट हाउस में छोड़ कर चले जाएंगे।
बेरुखे मन से अनुराधा ने शाम तक कुमार सर की उस फाइल कि ब्रीफिंग कंप्लीट की, शाम छह बजे ऑफिस बंद करके जाने लगी तो कुमार सर ने अनुराधा से कहा, चलिए आपको गेस्ट हाउस ड्रॉप कर देता हूँ।
अनुराधा ने बुझे मन से कहा, नहीं सर मै पैदल ही चली जाऊंगी, वैसे भी दिन से भर बैठे बैठे पैरों को थोड़ा चलने कि जरूरत है।
कुमार सर ने कहा कि साफ साफ क्यों नहीं कहती कि, आप मुझे चाय नहीं पिलाना चाहती, अब मुझे अपने क्वार्टर में जाकर खुद चाय बनाने में आलस आ रहा है।
अनुराधा मुस्कुराकर उनके साथ कार कि आगे की सीट में बैठ गई, सोचने लगी कितना प्रोफ़ेशनल इंसान है कुमार सर, ऑफिस के वक़्त एकदम हिटलर, उस ठेकेदार के साथ में दिहाड़ी मजदूर की तरह और अब ऑफिस के बाद एकदम दोस्त की तरह व्यवहार कर रहे हैैं।
गेस्ट हाउस आते ही अनुराधा ने वहीं लॉबी में चाय और स्नेक्स का ऑर्डर किया, कुमार सर ने खुद ही कहा कि चाय पीने के बाद वो अभी अपने क्वार्टर जाएंगे, रात 8.30 बजे तक आएंगे, तब साथ में डिनर के लिए किसी रेस्टोरेंट में चलेंगे।
अनुराधा मन ही मन बहुत खुश हुई, पर फिर भी उसने खुशी छुपाते हुए कुमार सर से कहा कि सर आप क्यों तकलीफ़ कर रहे है, यहीं गेस्ट हाउस में भी तो ठीक ठाक खाना मिल ही जाता है, आप भी आ जाएंगे तो यहीं पर खाना खा लेंगे।
कुमार सर ने अनुराधा से कहा कि ये भी ठीक है, चलो फ़िर मै खाने के वक़्त पर ही आता हूं रात को 9 बजे तक।
अनुराधा तो अपनी ही होशियारी में मारी गई, पर अब वह कर भी क्या सकती थी, कुमार सर के जाने के बाद उसे खुद की बेवकूफी पर गुस्सा भी आया, पर वह करे भी तो क्या करें।
अपने रूम में जाकर फ्रेश होने के बाद वह अच्छे से तैयार हो कर लॉबी में आ गई, करीब आधे घंटे अपने पिता और सुलक्षणा आंटी से दिन भर की घटना बताई, और यह भी बताया कि आज डिनर में उसके सीनियर कुमार सर आ रहे हैं।
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फ़ोन रख कर वह बेसब्री से कुमार सर के आने की प्रतीक्षा करने लगी, घड़ी में तो अभी सिर्फ 8.45 ही हुआ था, कुमार सर के मन में अगर उसके लिए कुछ होगा तो वो खुद ही जल्दी आकर उसे बाहर घुमाने और खाना खिलाने ले जाते, शायद उनके मन में अनुराधा के लिए ऐसा कोई विचार नहीं होगा,
तो क्या मै कुमार सर से एक तरफा प्यार करने लगी हूं। अनुराधा अपने विचारो के समंदर में गोते लगा रही थी, नहीं शायद कुमार सर भी उसे प्यार करते होंगे और उसे सरप्राइज देते हुए अच्छी तरह से तैयार होकर आएंगे और बोलेंगे कि चलो अनुराधा हम डिनर पर बाहर चलते है.. अनुराधा हर एंगल से सोचे जा रही थी, तभी कुमार सर की कार रुकती है, उसमें से कुमार सर सिर्फ लोअर और टी शर्ट पहने, पैरो में स्लीपर पहने हुए बाहर निकलते हैं।
कुमार सर को इस तरह देख कर अनुराधा ने सिर पकड़ लिया, हे भगवान, कितना नीरस इंसान है ये, क्या कोई किसी लड़की के साथ डिनर करने के लिए सिर्फ लोअर और टी शर्ट, स्लीपर पहनकर आता है? और वह खुद एक घंटे बैठकर फ़ुरसत से पूरा मेकअप करके तैयार हो कर आईं थी।
तभी कुमार सर उसके पास तक आ गए थे, वह उसे इतनी अच्छी तरह से तैयार हुए देख कर अपलक देखते ही रह गए, उनके इस तरह देखने पर अनुराधा को ही शर्म सी महसूस होने लगी, उसने सहज होते हुए कहा कि बैठिए सर, हम खाने का ऑर्डर करते हैं।
कुमार सर उसके सामने की कुर्सी पर बैठ कर बोले क्या पसंद है खाने में आपको, अनुराधा ने हंसते हुए कहा, जी मुझे जो पसंद है, वह तो यहां नहीं मिलेगा.. मुझे पानीपूरी, आलू चाट, पाव भाजी, छोले भटूरे , डोसा, मिठाईयां बहुत ही पसंद हैं, पर इस गेस्ट हाउस में तो सिर्फ सादा खाना दाल, चावल, सब्जी रोटी, दही, सलाद और पापड़ के अलावा तो कुछ भी नहीं मिलेगा।, यही खाना दो साल से मसूरी में ट्रैनिंग में खा खाकर मै ऊब गई थी, फिर यहां आकर वहीं खाना ..मै तो पक सी गई हूं यही सब खाते खाते..
कुमार सर ने हंसते हुए कहा और मेरा तो बिल्कुल उल्टा है आपसे, पिछले चार पांच साल से पनीर, मशरूम, बटर नान, पुलाव, पूरी भाजी जैसे भारी खाने को खा खाकर मै भी ऊब गया था, मुझे यही सादा खाना खाए हुए बरसों हो गए है, कोई भी कभी मुझे खाने को बुलाता भी है, तो वहीं सब हेवी खाना खिलाने के लिए रखता है, यह सब दूसरों के लिए स्पेशल होगा पर मुझे तो मन ही नहीं करता ये सब खाने को।
ओह तो फिर आप यहां आकर खा लिया कीजिए और ऐसी जगहों पर मुझे खाना खाने को भेज दिया करिएगा, कहकर अनुराधा खिलखिला उठी।
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अनुराधा को इस तरह सजे धजे देख कर कुमार सर तो पहले ही उस पर मोहित हो चुके थे, इस तरह उसकी उन्मुक्त खिलखिलाहट ने तो कुमार सर के दिल में भी घंटियां बजा दी थी, अनुराधा हमेशा साधे सलवार सूट पहनकर बिना ज्यादा मेकअप के ही ऑफिस आती थी, इसलिए शायद कुमार ने उस पर गौर नहीं किया, या हो सकता हो कि कुमार खुद काम में इतना डूबा रहता था, कि उसका ध्यान कभी अनुराधा पर नहीं गया था।
अनुराधा ने दो लोगों के लिए खाने का ऑर्डर किया, खाना खाते खाते ही कुमार सर ने अनुराधा से पूछा आपके घर में कौन कौन है?
अनुराधा ने कहा, अब सिर्फ पिताजी है, लखनऊ में रहते है, मॉं का करीब चार साल पहले ही देहांत हो गया था।
कुमार ने दुखी होकर कहा, ओह सॉरी, आप यहां पर अपने क्वार्टर में शिफ्ट होते ही अपने पिता को अपने साथ ही गाजियाबाद बुला लीजिएगा, नहीं तो वह इस बुढ़ापे में अकेलापन महसूस करेंगे।
अनुराधा ने कुमार सर से कहा, जी बिल्कुल मेरा भी यही प्लान है।
सर आप भी कुछ बताइए अपने बारें में, आपके माता पिता? अनुराधा ने भी कुमार सर से सवाल पूछ ही लिया।
सुनते ही कुमार सर ने कहा, अनुराधा मै इस सवाल का जवाब कभी फ़ुरसत में दूंगा, और तब तक कभी मुझसे दुबारा यह सवाल मत करना।
कुमार सर का दुखी चेहरा देख कर, अनुराधा समझ गई, कि जरूर कुमार सर के माता पिता के साथ कोई न कोई अनहोनी हुई है, और शायद यही उनके दुख का कारण होगा।
इसके बाद न कुमार सर ने अनुराधा से कोई सवाल किया, न अनुराधा ने कोई सवाल किया। हालांकि दोनों के मन में बहुत से सवाल थे एक दूसरे से पूछने के लिए।
खाना खाकर कुमार सर ने अनुराधा को उनके मनपसंद का खाना खिलाने के लिए धन्यवाद किया, और जाते जाते कहा कि कल रात को हम खाने के लिए यहां की चौपाटी पर चलेंगे, उनकी बात सुन अनुराधा कि आंखो में चमक आ गई, बोली सच में फिर तो मज़ा ही आ जाएगा।
अगले दिन का काम ख़तम करके अनुराधा को गेस्ट हाउस में ड्रॉप करके कुमार सर दो घंटे बाद आने को बोलकर चले गए।
अनुराधा कुमार सर के साथ जाने के लिए बैताब सी थी, उसने आज जींस और टीशर्ट के साथ स्पोर्ट्स शूज पहने, बाल खुले ही रखे थे, चहरे पर हल्का सा मेकअप और पसंदीदा परफ्युम लगा कर अच्छे से तैयार हो कर, कुमार सर का इंतजार करने लगी।
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लगभग आठ बजे कुमार सर की कार आते ही वह दौड़कर कार तक पहुंची, तब तक कुमार सर अपनी कार से निकल कर गेस्ट हाउस की तऱफ देख कर, उसी के आने का इंतजार करने लगे, अनुराधा को जींस और टीशर्ट में शायद कुमार सर पहचान ही नहीं पाया थे, इसलिए अनुराधा के बिल्कुल पास तक आने के बावजूद भी कुमार सर की नज़र गेस्ट हाउस की तरफ ही थी, वो अनुराधा के आने का इंतजार ही कर रहा थे।
अनुराधा ने शोखी से कुमार सर की तरफ देखकर कहा कि कोई और भी आने वाला है क्या सर वहां से ?
अनुराधा कि आवाज़ सुनकर कुमार सर ने अचरज ने उसकी और ध्यान से देखा!
बोले यार लड़कियां भी कमाल की होती हैं, साड़ी पहन कर एकदम आंटी लगती है, तो जींस और टीशर्ट में एकदम कॉलेज जाने वाली लड़की।
अनुराधा ने कार की आगे की सीट पर बैठते हुए कहा, ओह तो कितनी लड़कियों को देखा है अब तक आपने?
कुमार सर ने तब तक कार स्टार्ट कर ली थी, बोले अरे मेरा मतलब था कि तुम इस ड्रेस में एकदम कॉलेज जाने वाली स्टूडेंट लग रही हो!
अनुराधा ने कहा कि इसका मतलब मै कल साड़ी में आंटी लग रही थी क्या?
कुमार सर सफाई दिए जा रहे थे, और अनुराधा उनकी खींचाई करने का लुफ़्त उठा रही थी।
इसी बीच कुमार सर ने चौपाटी में आते ही कार रोक दी, चौपाटी में अनुराधा ने जी भरकर अपनी मन पसन्द पावभाजी, छोले भटूरे और पानी पूरी खाया, हालांकि यह सब कुमार सर को पसंद नहीं था, परन्तु अनुराधा का साथ देने के लिए उन्हें भी खाना पड़ा।
वहां से आगे बढ़कर अनुराधा ने आइस्क्रीम कि दुकान देखकर कुमार सर से आइस्क्रीम खाने की बात की, हालांकि नवंबर का महीना होने से वातावरण वैसे ही ठंडा था,परन्तु अनुराधा की बच्चों सामान जिद के आगे कुमार सर को झुकना पड़ा।
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आइस्क्रीम खाकर अनुराधा ने कुमार सर से कहा कि सर आज तो मज़ा ही आ गया आपके साथ यहां आकर, इतनी स्वादिष्ट पाव भाजी मैंने कभी नहीं खाई।
कार से वापस आते समय कुमार सर ने किशोर कुमार के मनपसंद रोमांटिक सॉन्ग लगा दिए थे, उन्हें सुनकर अनुराधा “रोमांटिक” होकर कुमार सर से पूछ बैठी, सर एक पर्सनल सवाल पूछूं क्या?
कुमार सर ने कहा, हाँ बिल्कुल!
अनुराधा ने पूछा सर अब तक आपने शादी नहीं की?
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कुटील चाल (भाग-10) – अविनाश स आठल्ये : Moral stories in hindi
स्वलिखित
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अविनाश स आठल्ये