कौन तुम्हें यूं प्यार करेगा – रजनी श्रीवास्तव “अनंता”

“क्या तुम मुझसे प्यार नहीं करती?” मीरा का हाथ अपने हाथों में लेकर समीर ने थोड़ा उदास होते हुए पूछा।

“करती हूं, तुमसे कौन प्यार नहीं करेगा? तुम एक बेहतरीन इंसान हो!” 

मीरा ने प्यार से समीर की तरफ देखा और धीरे से अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली।

“मगर समीर मैं खुद से बहुत ज्यादा प्यार करती हूं!” एक मीठी सी मुस्कान उसके चेहरे पर खिल गई।

समीर ने परेशान होकर उसकी ओर देखा। 

मीरा ने समीर को अपनी तरफ कुछ खोजती हुई नजरों से देखते हुए देखा तो, खिलखिला कर हऀस पड़ी।

“क्या ढूंढ रहे हो?”

“सच!” वह उदासी से मुस्कुराया।

“इसका मतलब तुम्हें मेरी बातों पर विश्वास नहीं?” वह उसे गौर से देखती हुई बोली।

“विश्वास हीं तो किया था, मगर…..” उसने अपनी बात अधूरी छोड़ दी।

दोनों एक दूसरे को बहुत पसंद करते थे। समीर को पूरा विश्वास था कि शादी का प्रपोजल वह कभी नहीं ठुकराएगी, लेकिन उसके इनकार से वह बहुत आहत हुआ था।

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 एक मिडिल क्लास फैमिली से होने के बावजूद  मीरा का रहन-सहन, पहनावा, सब कुछ आधुनिक था। परिवार का पूरा सपोर्ट उसे मिला था। उसके माता-पिता उस पर बहुत विश्वास करते थे। वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब करती थी। वहीं दोनों की मुलाकात हुई थी। समीर एक टैलेंटेड और सीधा-साधा लड़का था। उसने बहुत बार मीरा की हेल्प की थी। धीरे-धीरे दोनों में एक दूसरे के प्रति झुकाव हुआ। 




समीर को इस बात का पूरा विश्वास हो चला था कि मीरा उसे बहुत पसंद करती है। वह अक्सर उस पर हक जताता, उसके रहन-सहन और कपड़ों को लेकर टोका-टोकी करता था। सुनकर वो सिर्फ मुस्कुरा कर टाल जाती थी। इसकी वजह से समीर को यह विश्वास हो चला कि वह उसे अपने हिसाब से चला सकता है। बाकी सब औरतों की तरह वह भी उसके लिए सारे समझौते करने को तैयार हो जाएगी। जिस परिवार से वह आता था, वहां उसने औरतों को समझौते करते और दूसरों के लिए जीते हीं देखा था। बस इतना चाहता था कि उसके परिवार में मीरा को खुले दिल से सब एक्सेप्ट करें। इसीलिए उसे टोकता था, मगर उसने तो बिल्कुल हीं इंकार कर दिया।

 फिर भी उसका यह दावा कि उससे प्यार करती है, उसे कुछ पल्ले नहीं पड़ रहा था।

मगर? 

मीरा ने अपनी मुस्कुराहट दबाते हुए पूछा।

जवाब में समीर ने उसकी तरफ चिढ़ कर देखा तो, वो हंस पड़ी।

 “जानते हो समीर! हम दोनों एक दूसरे को प्यार करते हैं इसीलिए हमें शादी नहीं करनी चाहिए।” वह सीरियस होते हुए बोली।

 “क्योंकि हम एक दूसरे के लिए बने हीं नहीं हैं। तुम मुझे अपने हिसाब से बदलना चाहते हो, फिर तो मैं, मैं रहूंगी नहीं फिर कौन तुम्हें प्यार करेगा और जब मैं नहीं बदलूंगी तो तुम्हें सिर्फ दुख और दुख हीं मिलेगा, फिर तुम मुझे प्यार नहीं कर पाओगे! इसलिए बेहतर है कि हम सिर्फ और सिर्फ दोस्त बनकर हीं रहें!”

समीर उसकी तरफ देखता रह गया, कितनी सच्ची बात कही थी उसने। ऐसे में दोनों में से कोई भी खुश कहां रह पाएगा! 

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थोड़ी देर मीरा ने उसकी तरफ देखा उसकी सोचों को पढ़ने की कोशिश की, फिर उसकी तरफ हाथ बढ़ाकर बोली- 

“फ्रेंड्स!”

अबकि वह भी मुस्कुराते हुए हाथ मिलाकर बोला- “फ्रेंड्स।”

#स्वाभिमान

रजनी श्रीवास्तव “अनंता”

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