निशा ओ निशा कहा मर गई।सुनाई नहीं देता तुझे जी ताई जी क्या हुआ।चाय कहा है मनहूस,जी ला रही हूं।तेरी मां तुझे हमारे दरवाजे पर फेक कर अपने आशिक़ के साथ भाग गई। यह कलंक कभी नहीं मिटेगा।रोज़ यही बात सुनते हुए निशा बड़ी हो रही थी।उसका क्या दोष उसकी मां भाग गई और पिताजी आनंद घर से अलिप्त थे।
इस लिये निशा पर बड़ी पाबंदी थी कि वो कही आ जा नहीं सकती थी। स्कूल से घर और घर से स्कूल। कोचिंग पर जाती तो भी कोई ना कोई साथ होता ।ताऊजी उनका बेटा मयंक और शशि।निशा की सहेलिया कहती भी कितना बंधन और रोकटोक है तुझ पर।निशा कुछ नहीं कहती थी वो अपनी ताई जी से बहुत डरती थी।
दसवीं में निशा ने जिले में टॉप किया और वो आगे मेडिकल की पढ़ाई कर अपने माथे पर लगा कलंक साफ करना चाहती थी ।वो कसूर जो उसने किया ही नहीं उसकी सजा वो बचपन से भुगत रही हैं। ताई जी ने तो साफ मना कर दिया कि अब इसे नहीं पढ़।
ना पर ताऊजी और मयंक भैया बोले मां ये पढ़ने में जहिंन है और फुल स्कॉलरशिप पर इसे स्कूल में दाखिला मिल रहा है मत रोको पढ़ लेने दो।मयंक उसका एडमिशन करवा आया।अगले दिन से स्कूल शुरू था निशा बैग तैयार कर रही थी कि ताईजी ने उसे बुलाया और बोली सुन तू जा रही है
पर एक बाद याद रख अगर तू किसी लड़के से बोली मिली घूमी तो तेरी पढ़ाई बंद इस गीता पर हाथ रख कसम खा की तू किसी से बात नहीं करेगी और तूने कसम तोड़ी तो इस घर के दरवाजे तेरे लिए बंद पढ़ाई बंद सब बंद समझी और ताई का वही पुराना राग शुरू हो गया पता नहीं आनंद को क्या दिखा था
काजल में जो जिद कर उससे शादी की और वो मनहूस इस 6 माह की बच्ची और उस आनंद को छोड़ अपने आशिक़ रवि के साथ भाग गई ।रवि आनंद का दोस्त था जिनका इनके घर बहुत आना जाना था।आनंद अपने दोस्त विशाल की शादी में गया था वही उसने काजल को देखा और घर आ कर जिद पकड़ ली कि शादी करूंगा
तो काजल से ।तब निशा की दादी रमा जिंदा थी वो बोली कौन लड़की है क्या जात है ब्राहमण है क्या।मां पता नहीं बस आप चलो ।
अरे पहले तू तो पता कर वो कौन है फिर हमे ले जाना।आनंद विशाल के घर गया और उसकी शादी की एल्बम में उसने काजल का फोटो देख पूछा ये लड़की कौन है अरे ये तो काजल है मेरी बहन श्वेता की
सहेली पर तू क्यों पूछ रहा है अरे यार ये मुझे पसंद आ गई है इससे शादी करना चाहता हूं।ओ ये बात है चल मै श्वेता से पूछता हूं।श्वेता ये काजल कहा रहती है क्यों भैया अरे उसके घर का पता चाहिए ।मम्मी पापा से मिलना है उसके जी भैया मै उससे पूछती हूं।
श्वेता ने काजल को फोन किया कि घर पर भैया का कोई दोस्त आया है और तेरा पत्ता मांग रहा है दे दूं।काजल चहकते हुए बोली देदे ।आनंद को पता मिल गया वो घर गया और सपरिवार काजल के घर रिश्ते को पहुंच गया।छोटा सा घर था 2 कमरों का जिसमें मां जानकी पिताजी राजेश जी MTNL में क्लर्क थे छोटा भाई वैभव और काजल ।
काजल का मुंह उतर गया आनंद को देख पर माता पिता खुश थे कि इतने बड़े घर से रिश्ता आया है।काजल मां बाप की बात का विरोध ना कर सकी और 2 महीने में उसका विवाह आनंद से हो वो घर आ गई।आनंद काजल को बहुत प्यार करता था।उसकी हर जिद नाज़ नखरे सब उठ।ता ।काजल ने कहा मै आगे पढ़ना चाहती हूं उसे पढ़ने भी भेजा वही उस की मुलाक़ात रवि से हुई ।
रवि का आनंद के घर भी आना जाना था वो बातूनी खुश मिज़ाज था जबकि आनंद का स्वभाव ठहराव वाला था।उसी बीच काजल के गर्भवती होने की खबर आई ताई जी बोली अब काजल का कॉलेज जाना बंद करवाओ। सास रमा का भी यही कहना था।
आनंद ने काजल से कहा काजल बोली शुरू के महीने जाने दो फिर नहीं जाऊगी।एक दिन शाम को रवि काजल को छोड़ने आया आनंद ने पूछा तू ये तुझे कहा मिली । अरे मैं तो जा रहा था कि ये सड़क किनारे सिर पकड़ कर बैठी थी। इसलिए मैं इसे घर ले आया।
थैंक्स यार रवि काजल अपने कमरे में चली गई और अब सास और आशा ताई की जिद के सामने उसकी एक नहीं चली। रवि बीच बीच में मिलने आता तब काजल वही बैठती और उसकी बातों पर हस्ती मुस्कुराती वरना तो वो गुम सम अपने कमरे में रहती या फिर बात ही नहीं करती ।
आनंद से भी वो कम ही बोलती थी।उधर काजल की डिलीवरी हुई बेटी हुई काजल ने कहा मै अपने माता पिता के घर कुछ दिन जाना चाहती हूं।12 दिन का हवन हो जाए फिर चली जाना जबरदस्ती काजल ससुराल आई । निशा रोती तो आनंद उसे संभालता।काजल कहती मुझे थोड़ी सब आता है इसलिए कह रही थी कि मां के घर जाना है ।
जैसे तैसे 12 दिन बीते और काजल अपनी मां के घर आ गई।काजल अपनी मां बाप से भी बात नहीं करती थी।उसकी मां बोली इतने बड़े घर में तेरी शादी हो गई इतना पैसा है आनंद इतना अच्छा है फिर भी तू साल भर से घर में एडजेस्ट नहीं हुई क्यों एडजेस्ट करू मै रवि से प्यार करती थी।आप लोगों ने लालच में मेरी शादी उस बेवकूफ आनंद से कर दी।
सारा दिन आगे पीछे मै उससे बात भी करना पसंद नहीं करती।उसका छूना भी नाकाबिले बर्दाश्त है।उसकी भाभी आशा और मां रमा सारा दिन घर गृहस्थी और आशा तो मेरी मां बनाना चाहती थी।मै मां नहीं बनना चाहती थी जबरदस्ती ये मुसीबत मेरे माथे मढ़ दी और उसने निशा को बिस्तर पर पटक दिया
और वो अपने कमरे में चली गई।रवि को कॉल कर बोली मै वहां से आ गई हूं अब क्या करना है अब मै बर्दाश्त नहीं करूंगी।मेरी जान सुनो अभी तुम 4 महीने वही रुको आनंद से कुछ पैसा निकलवाओ और गहने कपड़े भी ले लो।नहीं रवि, अरे बाबा मेरा इंटरव्यू है परसो मैं लखनऊ जा रहा हूं।
जॉब का होते ही मुझे घर लेना है सब मैनेज करना है इसलिए प्लीज़ तुम घर लौट जाओ और सब कुछ इकट्ठा कर इस बच्ची को छोड़ कर आना प्लानिंग के तहत काजल एक हफ्ते में घर आ गई अब वो घर में रुचि लेने लगी। रमा सारा दिन निशा को संभालती आनंद भी खुश था कि काजल घर में दिल लगा रही है।
एक दिन आनंद ने एक फाइल काजल के हाथ पर रखी ।यह क्या है अरे रवि ने बताया थी कि प्लॉट कट रहे है लखनऊ में तो मैने भी इन्वेस्ट कर तुम्हारे नाम जमीन ले ली है ये आज ही आए है।संभाल के रख लो एक दो दिन में रवि उनके घर आया और बातों बातों में उसने बताया कि परसो रात की गाड़ी से वो परमानेंटली बैंगलोर शिफ्ट हो रहा है।
जाते जाते वो काजल को टिकट पकड़ा गया और बोला कि कुछ सॉलिड बहाना बना लेना।अगले दिन काजल बोली मेरी सहेली आरती की शादी है क्या मैं जाऊं हा हा चली जाओ पर निशा को अकेले कैसे संभालोगी ।हा फिर मै चलू नहीं सब सहेलियां आ रही है।प्लीज़ मुझे जाने दो एक दिन तुम लोग निशा को संभाल लेना प्लीज़ ।
आनंद ने कहा ठीक है निशा ने गहने कपड़े और प्रॉपर्टी के कागज़ भी रख लिए ।बैग देखकर रमा बोली कितने दिन के लिए जा रही है इतना बड़ा बैग लेकर जी दादी 2 दिन के लिए 4 फंक्शन है सब देखेंगे कि इतने बड़े घर की बहु है ढंग से जाऊंगी तो आपका ही सम्मान होगा आनंद बोला हा हा तुम अच्छे से जाओ। आनंद ने कहा मै छोड़ दूँ नहीं नहीं मै खुद चली जाऊंगी।
आनंद चाहता था कि वो छोड़ने जाये पर काजल आनंद के आने से पहले ही चली गई और उसके बाद वो लौटी ही नहीं।3 दिन के बाद रवि आया घर माहोल समझ आ रहा था कि टेन्स है उसने पूछा तो आशा बोली तीन दिन हो गए काजल शादी में गई थी लौटी ही नहीं।
सब तरफ ढूंढा उसके मायके में पता किया पता चला आरती नाम की उसकी कोई सहेली नहीं थी। आनंद बिल्कुल टूट गया वो अपने आप में ही सिमट गया ना वो लड़की पर ध्यान देता ना ही दफ्तर पर उसने फैक्ट्री ऑफिस सब जगह जाना बंद कर दिया।
वो घंटों अकेला कमरे में बैठा रहता। निशा बड़ी हो रही थीं पर अपने बाप से दूर और आज जब वो आगे पढ़ने जाने वाली थी तो आशा के मुंह से ये सब सुन उसे अपनी मां से नफरत हो गई थी जिसके कारण उसका बचपन और उसके पापा की जिंदगी बिखर गई थी।
निशा ने अपना वादा निभाया स्कूल और कॉलेज में उसने कभी किसी से दोस्ती नहीं की हमेशा एक दूरी बनाए रखें अपना सारा ध्यान सिर्फ पढ़ाई में लगाया। उसके साथ पढ़ने वाला विवेक उसे बहुत पसंद करता था वह उससे बात भी करना चाहता था पर निशा ने कभी उसे मौका नहीं दिया।
आज निशा एक सफल गायनोलॉजिस्ट थी और वह अपने ही शहर के गवर्नमेंट हॉस्पिटल में ज्वाइन कर रही थी घर में सब खुश थे आज पहली बार आशा ने उसे कहा बेटा तूने अपना वादा निभाया
इसका शुक्रिया आज पहली बार आनंद ने उसे प्यार से गले लगाया।घर में सब खुश थे। निशा को 3 महीने बाद ट्रांसफर मिली लखनऊ में उससे पहले आशा उसकी शादी करना चाहती थीं उन्होंने सबसे घर में विचार विमर्श किया । आनंद ने कहा भाभी आपकी ही सुनूंगा।
फिर भी शशांक ने कहा एक बार निशा से पूछते है। निशा बोली मैं आप लोगों की पसंद से ही शादी करूंगी परंतु मुझे कुछ वक्त चाहिए ऐसा कह निशा लखनऊ जाने की तैयारी करने लगी। उधर विवेक में अपने माता-पिता से निशा के बारे में बात की और अपना रिश्ता निशा के घर भेजा।
जब आशा ने सुना कि वह दोनों एक ही कॉलेज में थे तो आशा ने पूछा क्या वह तुम्हें जानती है ।आटी शायद नहीं निशा तो कभी कि सी से बात ही नहीं करती थी सिर्फ पढ़ाई करती थी कहीं आना नहीं कही जा ना नहीं इसलिए शायद वो मुझे नहीं जानती ।
सबकी मर्ज़ी से रिश्ता पक्का हो गया। निशा और विवेक को लखनऊ हॉस्पिटल में पोस्टिंग मिली तो 10 दिनों में उनकी शादी करवा दी गई और वो लखनऊ आ गए ।आकर घर वगैरह ले कर उन्होंने हॉस्पिटल जाना शुरू कर दिया । आज एक औरत आई तो निशा की सहेली माला बोली अरे ये फिर आ गई कौन है
अरे ये कोई काजल काजल है हर 2 महीने में आ जाती है मेरा बच्चा करवा दो।काजल नाम सुन निशा चौक गई अरे इस उमर में बच्चे होते है वही तो ये आज से नहीं 15 सालो से आ रही है।ivf सब करवा चुकी पर ईश्वर ने इसे संतान सुख नहीं दिया।और इसका पति पहले आता था
अब तो वो भी नहीं आता बस फीस भर देता है।निशा के रूम में काजल आई और बोली आप नई डॉक्टर है कोई न्यू टेक्नोलॉजी होगी मै मां बनना चाहती हूं।इस एज में तो पाॅसिबल नहीं है ये जी मै जानती हूं पर मैं पिछले 20 सालों से ट्राय कर रही हूं फिर मुझे ivf का पता चला तो 15 साल से यहां आ रही हूं।
क्या आपको कभी प्रेगनेंसी नहीं रही ।रही ना मेरी एक बेटी थी तुम्हारी उमर की फिर उसके जन्म के 3 महीने में मुझे फिर दिन रहे मैने अबॉर्शन करवा लिया।फिर हम लखनऊ आए मैने दूसरी शादी कर ली शुरू में दो बार गर्भपात करवा लिया क्योंकि तब बंधन नहीं चाहिए था।
सात साल बाद बच्चे की जरूरत लगी तो मेरी गोद में वो सुख ही नहीं रहा।ये मेरा गुनाह है जो कलंक में अपने पति परिवार और मासूम बच्ची के माथे पर लगा कर आई थी ना ना धुलने वाला कलंक।वही कलंक मेरे माथे पर लग गया है बाँझ का जो पति मेरी तारीफ में कसीदे पढ़ता था
उसने भी बच्चे की चाहत में दूसरी शादी कर ली।मै उसी घर में तनहा अकेली रहती हूं एक पोर्शन में बाकी उसकी पत्नी बच्चे दूसरे पोर्शन में इस लिए मुझे बच्चा चाहिए।निशा बोली ये अब हो नहीं सकता दुबारा यहां मत आइएगा और दूसरी बात जो लोग भले लोगों का दिल दुखाते है उन्हें इसी जनम में हिसाब देना पड़ता हैं
आप अपने सुख के लिए एक भले आदमी का दिल तोड़ कर आई जो जिन्दा लाश बन गया वो लड़की जिसका कोई दोष नहीं वो उस जुर्म और कलंक को सहती आई जो उसने किया ही नहीं अब आपकी सहने की बारी है चली जाओ यहां से।तुम तुम ये सब कैसे जानती हो क्या तुम मेरी बेटी निशा हो मै किसी की बेटी नहीं हूं मैं तो वो लड़की हूं
जिसने बचपन से ताने सुने जिसकी चाल बोलने उठने बैठने तक पर तंज़ किए जाते आप जाओ यहां से बेटी मुझे माफ करदो प्लीज़ जाओ जाओ यहां से।काजल रोते हुए घर आई और उसी रात उसने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।आज बहुत दिन बाद निशा शांत सो रही थी
और विवेक भी देख रहा था नींद में डर कर उठने वाली निशा आज आराम से सो रही है।कुछ दिन बाद अस्पताल में उसे पता चला कि काजल ने खुदखुशी कर ली हैं।निशा को लगा जैसे वो उस कलंक से आजाद हो गई जो उसके माथे पर लगा था।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी
#*यह कलंक कभी ना मिटेगा*