क्या…….
नही …नही माता ( यशोदा चिल्लाई)
वैष्णवी कैसे मुक्ति दे सकती है माता ..( राघव थोड़ा डरते हुए बोला)
क्योंकि
वैष्णवी ही राधिका है मेरे बच्चों
यशोदा और राघव एक दूसरे को देखते है और वैष्णवी से लिपट है ।
नही मेरी बच्ची राधिका नही है
मेरी बच्ची केवल मेरी बच्ची है ( यशोदा ने रो रोकर बुरा हाल कर लिया)
और गुस्से में बुढिया को वहां से उठकर चले जाने को कह दिया और बोली जिस थाली में खाई हो उसी में छेद करना चाहती हो तुम..?
ये सब मनगढ़ंत कहानियां सुनकर तुम एक माता को उसके बच्चे से छीन नही सकती…
राघव को तो जैसे सांप सूंघ गया
आप कुछ बोलो ना जी
आप इसको यहां से चले जाने के लिए क्यों नहीं कह रहे हो….(रोते हुए यशोदा बोली)
बुढ़िया यानी की साध्वी को यशोदा की स्थिति समझ में गई थी इसलिए वहां कुछ भी बोलना उचित न समझी और राघव को यह बताकर की इस कहानी का उल्लेख किसी से मत करना और अभी यशोदा अपनी बच्ची के प्रेम में डूबी है इसलिए मैं उसका दिल दुखाना नही चाहती…
एक बार राधिका के रूप में इस बच्ची के माता पिता और भाई का दिल दुखा चुकी हूं
अब बिना यशोदा के आज्ञा के मैं इस घर के सामने भी नही आऊंगी क्योंकि यशोदा जिसने मुझे शुरू से मां कहकर बुलाया है मैं उस बच्ची को और नही रूला सकती इसलिए मैं गांव के मंदिर पर ही रहूंगी राघव ….
ध्यान रहे मेरे बच्चे
जैसे जैसे दिन बढ़ेंगे वैष्णवी को अपनी और भी बातें याद आने लगेगी फिर वो किसी के संभाले न संभलेगी…
मेरे से भी वो नाराज है पिछले जन्म की घटना के कारण
मुझे पहले उसको मनाना पड़ेगा तब वो मेरी बात मानेगी…
इसलिए कोशिश करना यशोदा को समझाकर जल्दी से मिलने का…
क्योंकि वैष्णवी के पिछले जन्म के पिता इसके पिछले जन्म राधिका का इंतजार अभी भी कर रहे है…
इतना कहकर बुढ़िया चली जाती है
इधर यशोदा अपनी बच्ची को लेकर गोद में इस तरह से चिपकाती है जैसे उस समय अगर यमराज भी वैष्णवी को लेना आ जाए तो यमराज भी यशोदा का रूप देखकर एक बार भय से पीछे हट जाए…
यशोदा का ऐसा रूप देखकर एकबार तो राघव की भी हिम्मत नही हुई उसके पास जाने की….
लेकिन कहते है न एक सनातनी स्त्री के लिए उसके पति से बढ़कर उसके लिए इस दुनिया में कोई भी नही होता यहां तक की वो अपने बच्चे का भी त्याग कर देगी लेकिन पति का नहीं
लेकिन यहां यशोदा के लिए जितना उसके पति प्रिय थे उतनी ही उसकी बच्ची वैष्णवी…
राघव ने प्यार से यशोदा के कंधे पर हाथ रखा ..
यशोदा राघव और वैष्णवी से लिपटकर रोने लगी। राघव ने उसे शांत कराकर कहा कोई नहीं छीन सकता हमारी वैष्णवी को हमसे ।
वैष्णवी कोई साधारण लड़की नही है इसे हम दोनो को स्वयं वैष्णो माता ने प्रसाद के रूप में दिया है।
फिर माता का प्रसाद हमसे कौन छीन सकता है….?
क्या वैष्णो माता पर विश्वास नहीं है यशोदा तुम्हे?
हां हां ..मुझे पूरा भरोसा है
तो अब शांत हो जाओ
वो बुढिया चली गई है ।
क्या …?
वो चली गई …(यशोदा)
हां,तुमने ही तो जाने को कह दिया था इसलिए वो चली गई….
नही नही जी
मैने तो बस गुस्से में कह दिया था
वो तो स्वयं देवकन्या है , बेचारी देवलोक से इस मृत्युलोक में भटक रही है पिछले 40 वर्षों से
मैने उनका अपमान किया है उन्हे जाने को कहकर…
( इतना कहकर यशोदा रोने लगी …..)
रोना बंद करो यशोदा
वो तुमसे नाराज होकर नही गई है
उनसे तुम्हारा रोना देखा नही गया इसलिए उन्होंने कहा कि राधिका के माता पिता का दिल दुखाकर इतना भोग रही हूं और जिसने मुझे शुरू से मां कहकर पुकारी है , बैठकर खाना खिलाती है अब उस बच्ची का दिल मैं नही दुखा सकती इसलिए जबतक मैं सामने रहूंगी यशोदा रोते रहेगी ऐसा कहकर वो चली गई हैं।
यशोदा को अब आत्मग्लानि महसूस हो रही थी की जिसकी वजह से वैष्णवी आज उनके साथ है उस माता का इतना अपमान किया और वो फिर भी मुझसे नाराज़ नहीं है।
यशोदा ने कहा
आप माता जी को कल बुलाकर लाइए
मुझे उनसे माफी मांगनी है
ठीक है ( राघव बोला)
उसी रात जब यशोदा और राघव के बीच में वैष्णवी सो रही थी तो अचानक वैष्णवी उठकर अपने कड़े उतारने लग जाती है
और जैसे ही वो अपने नीचे के कपड़े उतरने की कोशिश करती है यशोदा की नींद खुल जाती है और वो राघव को उठाकर ये दृश्य दिखाती है और वैष्णवी को कपड़े उतारने से रोकती है।
सुबह सुबह यशोदा और वैष्णवी के उठने से पहले ही राघव उठकर मंदिर जाता है और साध्वी को दंडवत होकर प्रणाम करता है।
खुश रहो लंबी आयु हो मेरे बच्चे को…
क्या हुआ राघव इतना सुबह सुबह क्यों आए
राघव ने रात वाली घटना माता को सुना दी
अब समय नजदीक आ रहा है राघव अब देर करना वैष्णवी के लिए अच्छा नहीं होगा
क्या यशोदा शांत हुई?
हां हां .. माताजी
उसने आपको बुलाया है । वो अपने आपको आपके अपमान करने के लिए दोषी मान रही है….
हा हा…..
नादान है वो
जिस कोख में पली हुई बच्ची के कारण मुझे मुक्ति मिलनी है भला मैं उससे नाराज हो जाऊ तो मैं नरक की भोगी न बन जाऊंगी…
जाओ उससे कहना मैं कुछ देर में आती हूं
राघव घर चला गया
कुछ देर बाद….
बुढ़िया दरवाजे पर दस्तक देती है …
यशोदा दौड़ जाती है
और जैसे ही दरवाजे पर पहुंचती है यशोदा अवाक रह जाती है……
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