कभी-कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता है – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

क्या हुआ मम्मी.. हमें तो जैसे ही भाभी  ने बताया कि आपकी तबीयत सही नहीं है हम तो दौड़े चले आए देखने, पर  आप तो सही लग रही हो, वैसे डॉक्टर ने क्या बताया? कुछ नहीं बेटा.. कुछ दिनों से हाथ पैरों में दर्द थकान कमजोरी और चक्कर से आते थे, कल तुम्हारे पापा के साथ दिखाने गई

तो उन्होंने कहा थोड़ा सा कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है जो कि दिल के लिए सही नहीं है अब अपनी उम्र के हिसाब से अपने खान-पान और आराम पर ध्यान दो सुबह शाम योग और घूमने फिरने के लिए कहा है, थोड़ा  तेल मसाले कम करना है और ज्यादा से ज्यादा आराम करना है, बस यही सब बताया है!

शुक्र है मम्मी हम तो डर ही गए थे वैसे आप अपनी सेहत का बिल्कुल ध्यान भी नहीं रखती हैं दिन भर घर के कामों में लगी रहती हैं ना अपने घूमने फिरने का ना अपने खान-पान का ध्यान रखती हैं, चलिए मम्मी फिर हम आज शाम को ही निकल जाते हैं, वहां बच्चे अकेले हैं और  हमारे यहां रहने से भाभी का भी काम बढ़ जाता है!

मीनू की बात सुनकर उसकी भाभी रतन बोली… अरे दीदी कैसी बातें कर रही हो भला आपके रहते मेरा काम कभी बड़ा है क्या? ऐसी कोई बात नहीं है.. हां आप मम्मी जी को जरूर अच्छे से  समझा देना क्योंकि मैं जब इनको समझाती हूं कुछ कहती हूं तो इन्हें अच्छा नहीं लगता और दिनभर यह घर के काम करती रहती हैं!

हां भाभी ठीक है और फिर शाम को मीनू अपने पति के साथ घर वापस लौट गई! तब शारदा जी से उनके पति ने पूछा… क्यों शारदा अभी दो दिन पहले तक तो तुम अच्छी भली  थी घर का सारा काम भी भाग कर करती हो यहां तक की तुम्हारे घुटनों में दर्द के बावजूद भी तुम आराम नहीं करती

और इतनी चुस्त—रहने के बावजूद भी तुमने मीनू से झूठ क्यों बोला? हम तो किसी डॉक्टर के पास भी नहीं गए न हीं तुम्हारा चेकअप करवाया ना ही कुछ? हां हां.. पता है मुझे कोई बीमारी नहीं है लेकिन कभी-कभी मुझे भी आराम करने का मन करता है मैं सारा दिन घर के काम करती रहती हूं

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तो इस कारण बहू ने घर के सारे काम ही मेरे पर डाल दिए और खुद निश्चित होकर रहती है वह अपनी सहेलियों के साथ घूमती फिरती है मूवी देखने जाती है सैर सपाटे को जाती है पीछे से बच्चों को छोड़ जाती है, वह यह नहीं  देखती कि अब उसकी सास की भी उम्र हो चली है वह इतना सारा काम कैसे कर पाएगी?

अतः मैंने सोचा इस तरह बीमारी का बहाना लगाकर शायद बहू थोड़ा बहुत घर के  कामों में मदद करने लग जाए और देखो मेरा विचार काम कर गया, बहु को मेरी कितनी चिंता है मुझे आज पता चला! वह मम्मी मम्मी करती हुई मेरे आगे पीछे घूम रही है मुझे कुछ भी नहीं करने दे रही, मैं सिर्फ इतना ही तो चाहती हूं

की और दिन भी बहु मेरे साथ साथ  काम करें, शायद  यह मेरी बीमारी के बहाने से ही कुछ सीख जाए, वैसे मेरी बहू दिल की बुरी नहीं है बस काम करने में थोड़ी आलसी है, लेकिन अब  देखो कैसे मेरी सेवा कर रही है कभी सूप कभी दलिया कभी कम मिर्च मसाले का खाना बनाकर ला रही है

यहां तक की मेरे पास भी बैठती है, और मुझे क्या चाहिए और एक दिन में यह बात बहू को बता भी दूंगी और समझा भी दूंगी की बहू कभी-कभी सेवा करवाने के लिए बीमार  होने का दिखावा भी करना पड़ता है, जब वह अपने पति से यह सब कह रही थी

उनकी बहू खड़ी होकर सब बातें सुन रही थी और धीरे-धीरे मुस्कुरा रही थी फिर उसने अपनी सास से कहा… मम्मी आप बिल्कुल सही कह रही हैं मैं बहुत लापरवाह हूं, अगर आप सच में बीमार पड़ जाती तो हमारा क्या होता इसलिए आज से मैं आपकी सेहत का भी ध्यान रखूंगी और इस घर का भी ध्यान रखूंगी और बहू की बातें सुनकर तीनों फिर हंसने लगे! 

   हेमलता गुप्ता स्वरचित 

   #कभी-कभी सेवा करवाने के लिए बीमार होने का दिखावा भी करना पड़ता है

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