काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ती – खुशी : Moral Stories in Hindi

रमा ब्याह कर एक भरे पूरे घर में आई जहां सास ससुर, ताऊ और ताई सास गायत्री देवी ननद देवर सब मिले। ताई को बहुत घमंड था कि उनके परिवार में सिर्फ लड़के है।उनके 3 लड़के और सासूजी के 2 पर सासू मां को एक बेटी गीता होने पर ताने सुनाती तूने खानदान की परंपरा तोड़ दी लड़की ला

दी।गीता बचपन से यही ताने सुनती आई थीं और भाई भी उसे धमकाते रहते बिचारी की हालत बत्तर थी। बहुओं का भी जीना गायत्री ने मुहाल कर रखा था सुबह ४ से १० बजे तक चक्करगिनी की तरह घूमती रहती। गीता की 

सेमां सीता कुछ ना बोल पाती। रमा शादी कर आई तो उसने देखा गीता को इतना डरी सहमी रहती हैं।जबकि रमा ऐसे माहौल से आई थी जहां पर आजादी थी लड़कियों को छूट थी बहुओं को खुल के जीने दिया  जाता था। यहां तो दम घुटता था।गीता को देख तो बहुत तरस आता वही हाल अब ताई

रमा का करने चली थी उसे भी सुनाती बहु ऐसे नहीं करते ये क्या बना दिया हमारे यहां तो ऐसे नहीं होता वैसे नहीं होता एक दिन गीता के पेट में बहुत दर्द था आज उसकी तबियत ज्यादा खराब थी रमा ने जल्दी से उसके लिए चाय नाश्ता लिया और उसके कमरे में चली गई। ताई पूजा करके निकल रही

थी और सामने से आती रमा उन्हें दिख गई बस वो शुरू हो गई तेरे मां बाप ने तुझे कुछ नहीं सिखाया किस्से पूछ कर तू ये रसोई के बर्तन उसके पास ले गई।वहां पड़े हैं बर्तन जिसमें उसे खाना देते है।रमा बोली वो टूटे हुए ताई चिल्लाने लगी सीता तेरी बहु मुझे जवाब देने लगी है। रमा के पति राघव को

बुलाया गया इसने मेरा धर्म भ्रष्ट कर दिया निकाल इसे यहां से छोड़ कर आ इसे इसके मां बाप की दहलीज पर पता नहीं क्या सिखाया पढ़ाया है जाहिलो ने । रमा बोली बस ताई जी बस मेरे मां बाप के बारे में बोलने वाली आप कौन होती हैं मेरी शादी की है उन्होंने बेचा नहीं है दोबारा मुझसे इस लहजे में बात की तो कानून की हवा भी मै खिलाना जानती हूं मेरा भाई वकील है याद रखना फिर सीता से बोली ये आपकी अपनी बेटी है क्या हाल बना रखा है इसका दिन रात ताने तीसने ताई जी सुनाती हैं और आप सुन लेती है अपनी बेटी के बारे में और ताई जी आपकी बहुओं का बड़प्पन है जो चुप चाप सब सुनती हैं पर सब आपके डर से इज्जत से नहीं अभी आप गीता के लिए एक बच्चे का बाप ढूंढ़ने चली थी। सब चुपचाप सुन रहे थे आपकी अपनी बेटी होती तो कन्यादान का सुख भी हर किसी को नहीं मिलता।और राघव और सुबोध आप कैसे भाई है जो अपनी बहन को ना समझ सके उसके लिए खड़े होने की जगह आप ने कान बंद कर लिए ताई जी आपकी काठ की हांडी बार बार नहीं चढ़ेगी बस बहुत हुआ गीता जी शादी मै अपने चाचा के बेटे विवेक से करवाऊंगी अब आप कुछ नहीं बोलेगी। आज गायत्री का मुंह उतर गया और उनकी बहुएं खुश थीं चलो आज सेर को भी सवा सेर मिला।उस दिन के बाद गायत्री की टोका टाकी कम हो गई और एक उचित मुहूर्त पर उसका विवाह हो गया आज सीता जी ने अपनी बहु से कहा बेटी तेरी वजह से आज मेरी गीता को नई जिंदगी मिली और कुछ महीनों में वो डरी सहमी गीता बेबाक हो गई क्योंकि उसे प्यार और अपनापन मिला ये परिवर्तन देख गायत्री ने भी बहुओं को छूट दी और रमा से माफी मांग ली।

स्वरचित कहानी 

खुशी 

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