Moral Stories in Hindi : लो सुमन.. तुम्हारी मनपसंद मिठाई काजू कतली लेकर आया हूं, तुम्हारे भतीजे शानू की शादी फिक्स हो गई है, 5 नवंबर को सगाई है ,और 25 नवंबर को शादी है! तोतैयारी अभी से शुरू कर दो, आखिर इकलौती बुआ हो और तुम्हारा लाडला भी तो है, चलो.. फटाफट मुंह खोलो और मुंह मीठा करो,!
भैया मुझे नहीं खानी यह काजू कतली, अरे सुमन.. छोड़ो पुरानी बातों को, जो हो गया.. उसे भूल जाओ, जितना पुरानी बातें याद रखोगी उतना ही दर्द तकलीफ बड़ेगी! सुमन कुछ समय के लिए अतीत में खो गई! सुमन और उसके भाई रतन को काजू कतली का विशेष शौक था, जब भी घर में काजू कतली की मिठाई आती, दोनों बहन भाई उसे पर झपट पढ़ते थे,
मम्मी पापा बहुत समजाते पर दोनों पर कुछ असर नहीं होता, दोनों की मनपसंद मिठाई थी काजू कतली.. समय आने पर सुमन की शादी एक अच्छे घर में हो गई, और उधर भाई की भी शादी हो गई !दिवाली पर सुमन के ससुर जी ने ऑर्डर देकर 8 किलो शुद्ध काजू कतली बनवाई ताकि वह अपने रिश्तेदारों में शुद्ध मिठाई भिजवा सके और घर में भी सभी को काजू कतली बेहद पसंद थी,
दिवाली के दो दिन बाद भाई दूज वाले दिन सुमन का भाई अचानक सुमन से तिलक करवाने आ गया, सुमन को तो पता भी नहीं था कि वह आने वाला है, क्योंकि कितने सालों से भाई का भाई दूज के दिन आना नहीं हो पाता था, हां राखी पर अवश्य आता था !खाना खा पी कर और तिलक करवा कर जैसे ही रतन जाने लगा की सुमन ने कहा.. अरे भाई त्योहार के दिन क्या बहन अपने भाई को ऐसे ही खाली हाथ भेजेगी,
आप इतना सब कुछ ले आए तो क्या मैं कुछ भी नहीं दूंगी, बच्चे भी तो बुआ की मिठाई का इंतजार कर रहे होंगे! आप 2 मिनट रुकिए बस मैं अभी आती हूं, सुमन ने घर पर रखी हुई काजू कतली में से आधा किलो का डिब्बा अपने भाई के लिए तैयार कर लिया, की तभी सासू मां वहां आई और बोली…
तुझे पता है काजू कतली का भाव₹500 किलो है और तू अपने भाई को इतनी महंगी मिठाई देने जा रही है !अरे अंदर लड्डू पड़े हैं वह रख दे, काजू कतली तेरे पीहर वालों के लिए नहीं बनवाई है! अगर ऐसे ही लुटाती फिरेगी तो हम और रिश्तेदारों को क्या देंगे, लेकिन मां मैंने तो भाई के लिए कुछ मंगवाया भी नहीं था और यह इतनी सारी मिठाई है और भाई और बच्चों को पसंद भी है,
इस कहानी को भी पढ़ें:
किस्मत मुट्ठी में – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi
कहा ना एक बार काजू कतली नहीं.. मतलब नहीं.. बिल्कुल शर्म लिहाज है कि नहीं, भाई ने ऐसा क्या दे दिया जो इतनी महंगी मिठाई भाई को दिए जा रही है! सास के द्वारा इतना जलील होने पर उसकी आंखों से आंसू आने लग गए, वह कमरे में आई तो देखा उसका भाई जा रहा था, शायद रतन ने भी यह बातें सुन ली थी और वह अपने आप को बहुत जलील महसूस कर रहा था
और उसे लग रहा था कि उसके कारण उसकी बहन को भी जलील होना पड़ रहा है,! जब वह घर से बाहर आया तब सुमन ने भाई के दिए पैसों में से₹200 देते हुए कहा… भैया घर जाते समय बच्चों के लिए चॉकलेट ले लेना और कहना उनकी बुआ ने इस बार चॉकलेट भेजी है, अगली बार उनकी पसंद की मिठाई लेकर आएगी!
और हां भैया.. यहां जो कुछ भी हुआ घर जाकर मत बताना, ऐसा कहते हुए सुमन रोने लग गई! अरे सुमन तू क्यों चिंता करती है, तेरा भाई है ना, मैं सब संभाल लूंगा, तू बस अपने ससुराल में अच्छे से रहना और मेरी चिंता बिल्कुल मत करना! सुमन के पति यह सब देखते हुए भी चुप रहे क्योंकि वह आज तक अपने माता-पिता के सामने नहीं बोले थे, किंतु वह अपनी पत्नी को ऐसे जलील होते हुए भी नहीं देख पा रहे थे!
उधर भाई अपने परिवार के लिए रास्ते में से काजू कतली का डिब्बा, चॉकलेट और नमकीन का पैकेट ले गया, जिसे देखकर बच्चे और सुमन की भाभी खुश हो गए! उस दिन के बाद से सुमन को काजू कतली से इतनी नफरत हो गई कि वह उसे देखते ही फेंक देती और उसे पुरानी बातें याद आने लगती! काजू कतली की वजह से उसे और उसके भाई को इतना शर्मिंदा होना पड़ा! 15 साल बाद आज सुमन का भाई उसके लिए काजू कतली का डिब्बा लिए खड़ा था
और सुमन आज भी खाने से मना कर रही थी किंतु रतन ने अपनी बहन को यह कहकर मिठाई खिला दी की.. मन में कड़वाहट रखने से कुछ नहीं होता बल्कि रिश्तो में खटास आ जाती है, मेरी प्यारी बहन.. जो हुआ वह भूल जा और उसके मुंह में काजू कतली का एक टुकड़ा जबरदस्ती खिला दिया!
सुमन ने भी भाई का मन रखने के लिए काजू कतली खा तो ली, किंतु वह कैसे उस जलालत का दर्द भूल जाए जो भाई-बहन के संबंधों से बढ़कर काजू कतली के दाम पर आ गया था! क्या काजू कतली भाई बहन के रिश्तो से भी महंगी है!
हेमलता गुप्ता स्वरचित
#ज़लील
कविता झा’काव्य ‘अविका”
Beautiful story and educational too. Such seniors must be taught a lesson, for killing the sentiments of youngsters.