कुछ लोग जीवन में अजनबी बनकर आते हैं पर बहुत महत्वपूर्ण बनकर हमारे हृदय में अपना घर बना लेते हैं।ऐसे लोग जीवन में बहुत कम ही मिलते हैं।जिन्हें हम इतनी तवज़्ज़ोह दे पाए।और मिल जाए तो उन्हें कभी खोना नहीं चाहते।
………..रात के अंधेरे में चिराग रौशन करने वाले उस फ़रिश्ते को निहारिका कभी खोना नहीं चाहती ।उसके, जीवन में आगमन से निहारिका में बहुत बदलाव हुए।निहारिका बस अपने मरते हौसले के अंतिम पड़ाव पर है,उसने खुद का आत्मसमर्पण कर दिया है।ज़िन्दगी से हारी हुई है।
…….निहारिका ने जब से भावों को जाना है तब से उसने कृष्ण को अपना सखा अपने हृदय के करीब सबसे अच्छा दोस्त मान लिया उससे जब चाहे तब अपनी बातें कह लेती है।झूठी मुस्कान सबमें बाटते बाटते थक चुकी है।बस सब छोड़ जा ही रही थी ।अब नहीं हो रहा,कि अचानक उसका आना हुआ ।
…..”व्योम” व्योम निहारिका की ज़िन्दगी में प्रवेश कर चुका ।व्योम सबमें अलग है, आम लड़कों की तरह नहीं है वो ,वो असाधारण है।अजीब सा खिंचाव हैं उसमें उसकी आवाज़ उसका अंदाज़ ,उसका गुस्सा तक आकर्षित करता है।उसकी कड़वी बातें तक अपनत्व का बोध कराती है।उसके हर बात में एक अजीब सा अपनापन होता है।उससे बात करके लगता हैं बस उसे सुनते रहे।वो बस तुम्हारा अपना है।कुछ भी न बोले।उसके दिल में प्यार का दरिया बहता है।जैसे किसी को चाहे तो टूटकर चाहेंगे।
…..अचानक उसका आना “निहारिका” के लिए प्राण वायु सा ही है।जब वो जीवन से उदासीन निराश हो चुकी ।”व्योम” से बात करके निहारिका की रूह जैसे जाग उठी।
“लगा जैसे कृष्ण मिल गया हो”।
ये निहारिका के जीवन में पहलीबार था जब कोई भाव से जुड़ पाया। जो अपनत्व जो भाव वो ढूँढती थी वो ” व्योम ” में महसूस होती।लगा कि अपना सारा दर्द उससे कह देगी बता देगी की वो जीवन के हर पहलू से निराश हो चुकी है।रिश्तें नाते प्यार दोस्ती हर किसी से शिकायत ज़िन्दगी जीने के लिए तड़पती,पर कुछ कहे बगैर ही जैसे चैन सा आने लगा।”निहारिका”, “व्योम” के साथ जितना रहती खुद को खुश पाती।”व्योम” के साथ की उसे आदत सी हो गई।”व्योम” उसकी ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।व्योम का बात भर कर लेना उसको सुकून दे देता।
निहारिका में जीने की नयी लहर जाग उठी।
व्योम की बातों को वो बड़े ध्यान से सुनती समझती। उसके बिना अब उसको बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।उसके कॉल का वो इन्तज़ार करती ।उससे जो बातें न हो तो उसका मन दुखी हो जाता।उससे मिलने की उसे बड़ी इच्छा होती कि कभी उससे मुलाकात हो जाए।क्यों कि वो उससे एक ऑनलाइन ऑफिसियल मीटिंग से मिली थी।और प्रभावित हुई थी। रूबरू हुए नहीं दोनों अभी तक।उसकी दोस्ती ने निहारिका को पूरी तरह बदल दिया। व्योम हमेशा निहारिका को हँसाने की कोशिश करता।उसे खुश रखने की कोशिश करता उसकी बातें सुनता समझता और सही राय भी देता।हँसी मज़ाक और उसे मस्ती करके छेड़ते रहता।कभी भी ऊलजलूल बात नहीं करता।एक अजीब सी सुरक्षा का अनुभव कराता उसका साथ।दूर रहकर भी बहुत करीब होने का एहसास और एक ऐसा मर्यादित सा भाव जो कभी उसके और निहारिका के बीच कभी नहीं टूटा।निहारिका व्योम से मिलने को बेताब थी कि कभी तो उससे मुलाकात होगी।उनकी रोज़ बातें हो जाया करती और निहारिका खुश हो जाया करती।बस उसके होने का एहसास भर निहारिका को नई उम्मीद से बांधे रखता।निहारिका के लिए वो एक ऐसा दोस्त है जिसे वो सबकुछ कह सकती है।जब भी उसे वो पुकारेगी वो ज़रूर आएगा।निहारिका का व्योम पर ये विश्वाश है ।
….”निहारिका” अब हमेशा उसकी ही बातें करती रहती ।उसकी सहेली “व्योम” के बारे में ही सुनती रहती उसने कहा-यार “निहा”तू बस व्योम की ही बातें करती रहती है कहीं तुम उससे प्या”…………..उसके इस शब्द के पूरे होने से पहले
निहारिका ने उत्तर दिया-“सिम्मी” प्यार नहीं यार प्यार नहीं उसे प्रेमिका वाला प्यार नहीं करती ,हां दोस्तो वाला प्यार ज़रूर करती हूँ। मुझे उसका साथ उसके होने का एहसास बहुत सुकून देता है
“पर उसे माँगना मेरे हक का नहीं है।और जो मेरा नहीं उस पर मैं हक नहीं जताती”।और वो किसी और का हो चुका है।”
उसकी मैं इज़्ज़त बहुत करती हूँ उसे सारी ज़िन्दगी अपने दोस्त जैसा चाहती हूँ।वो हमेशा ऐसे ही मेरा दोस्त बना रहे मुझे उसकी प्रेमिका या बीबी बनने की अधूरी ख्वाहिश नहीं रखनी।मैं उस बारे में सोचती ही नहीं।मुझे तो उसका इतना निश्छल साथ ही सुकून देता है। “दोस्त” जहां मैं उससे हर बात खुलकर कह पाती हूँ और वो भी मुझसे बेधड़क हर बात कह देता है।अच्छा बाबा बस कर मैं समझ गई तेरे प्यार और व्योम की तेरी दोस्ती को-सिम्मी ने कहा।
सिम्मी ने फिर पूछा-“निहा”एक बात पूछूँ ?
हां पूछ- अगर …….व्योम की ज़िन्दगी में कोई नहीं होता ……..तो उससे प्यार करती ?
निहारिका-“सिम्मी तुम फिर” “बताना न यार” “पता नहीं मैंने कभी सोचा नहीं व्योम तो बहुत अच्छे हैं उनके जैसा प्यार करने वाला केयरिंग लड़का कौन नहीं चाहेगा ?”
सिम्मी ने कहा-“अच्छा एक बार सोच के देख।”
निहारिका-“नहीं मुझे ऐसे ख्याल नहीं आते न ही ऐसा कुछ सोचना भी नहीं चाहती जो किसी और का है उस पर अपना हक जताने का सोचना ही क्यों ?बस कर अपनी बकवास और मुझे व्योम का दोस्त ही रहने दे फालतू की बातें न कर।””अच्छा चल छोड़”-सिम्मी ने कहा।
कुछ दिनों से निहारिका चुप सी हो गई कुछ बात भी नहीं करती और व्योम की भी बातें नहीं बताती।सिम्मी को अजीब लगा उसने पूछा- “निहा क्या हुआ है आजकल चुप चुप रहती हो पहले जैसी गुमसुम उदास सी होने लगी।”
निहारिका-कुछ नहीं यार कुछ दिनों से “व्योम” से बातें नहीं हुई उससे बात न हो तो मन उदास हो जाता है।जाने कहां हैं वो कॉल ही नहीं करता।हां उसने कहा था आऊँगा वापस बस मैं इन्तज़ार ही कर सकती हूँ।उसके आने का।पर बहुत दिन हो गए उसका कुछ अता -पता नहीं ।कोई सम्पर्क ही नहीं हो पा रहा।अचानक ज़िन्दगी में आया और कहीं गुम हो गया।पर उसने कहा था वो मुझे कभी छोड़ेगा नहीं।मुझे उसका इन्तज़ार है वो आएगा वापस ।”
सिम्मी-“निहा” मत उदास हो उसके आने से तुम बहुत बदली हो उसे ऐसे ही बनाए रख,उसकी मेहनत बर्बाद मत कर।जिस दिन वो वापस आएगा और तुमको रोता पायेगा उसे बुरा लगेगा।
निहारिका-हां मैं उसका इन्तज़ार करूँगी और खुश रहूँगी।पर सोचती थी मेरी शादी में वो हो।वो भी मिले मेरे पति से।
पर साल गुजर गए व्योम की कुछ खबर न मिली।वो उसके लिये उदास सी रहने लगी।उसे बहुत याद करती।
लव यू व्योम , मिस यु सो मच कहां चले गए तुम।सोचती रहती। निहारिका उसका इन्तज़ार करती रही।और निहारिका की शादी हो गई उसने अपनी शादी में व्योम को बहुत मिस किया।
अचानक एक दिन व्योम का मिस्ड कॉल निहारिका के सेल पर दिखा।निहारिका तो जैसे जी उठी।उस वक़्त उसकी ख़ुशी का ठिकाना ही नहीं था।उसने आतुरता से वापस कॉल किया।पर उसे कोई जवाब न मिला।उसकी विचलितता उसकी व्याकुलता उसके पति ने देखी,और पूछा-“निहा” क्या हुआ कौन हैं व्योम ? तुम इतनी व्याकुल क्यों हो रही हो।निहा ने सारी बात बताई उसके पति राकेश ने कहा- तुम चिंता न करो वो ज़रूर दुबारा कॉल करेगा।
दूसरे दिन सेल हाथ में ही था व्योम का कॉल आया-हेलो व्योम व्योम हेलो -निहा ने कॉल उठा कर कहा।उसकी आवाज़ में व्याकुलता साफ समझ आ रही थी।इधर व्योम की आवाज़ आई हेलो “निहु” उसकी आवाज़ सुन निहा तृप्त सी हो गई। वो कॉल पर ही सुरु हो गई।व्योम कहा हो यार तुमने आऊंगा कहकर आज तक यार मैने तुम्हारा कितना इन्तज़ार किया कैसे हो कहां हो और तुम्हारी फैमिली कैसी हैं निहा एकदम व्याकुल हो प्रश्न पर प्रश्न किये जा रही थी।व्योम ने उत्तर दिया-बस कर यार बस कितना झगड़ा करेगी मैं ठीक हूँ आता हूँ मिलने इस संडे। कहकर “निहा” कुछ कहती इससे पहले कॉल डिसकनेक्ट हो गई ।दुबारा कोशिश करने पर कॉल नहीं मिली।अब उसकी व्याकुलता और बढ़ गई उसका इन्तज़ार् उसे सोने जागने की सीमा से बाहर ले आया। उसने “सिम्मी” को कॉल किया सिम्मी ,व्योम, सिम्मी व्योम यार व्योम आ रहा है।उसकी खुशी सातवे आसमान पर थी।उफ़्फ़फ़ ….उसने राकेश और सिम्मी उसके इस बचपने और ख़ुशी से जैसे आजतक अनभिज्ञ थें।निहा के अंदर एक ऐसी लड़की भी छुपी है मैं जानता ही नहीं था- राकेश ने कहा।ये व्योम हैं कौन जिसने मेरी बीबी के जीवन में इतनी अहिमीयत रखी है।सिम्मी ने सारी बात बताई।
आखिरकार सन्डे आ ही गया आज पहलीबार वो व्योम से मिलेगी सिम्मी भी आई व्योम आया सिम्मी और राकेश उसे ले आए।निहा के अंदर प्यार और इन्तज़ार का गुस्सा भरा था व्योम ने निहा को आवाज़ दी निहा ने मुह फेर लिया- अरे निहु मेरी जान नाराज़ क्यों होती हो आया तो न बात नहीं करोगी मुझसे निहु निहु यार अच्छा ठीक है मैं वापस चला जाता हूँ।
निहारिका झटके से पलट कर उससे लिपट गई उसके गले लग गई और अपने आँसू न छिपा पाई।उसके डबडबाए पलको से वो गिर ही पड़े।
तेरे पलको के सिपी से मोती न गिरा।
ये बेशकीमती है सुन इसे ऐसे न गवां।
तुम ने बहुत रुलाया व्योम अचानक ज़िन्दगी में आए और पता नहीं कहा चले गए कोई खबर नहीं मैनें कितना इन्तज़ार किया तुम्हारा उफ़्फ़फ़फ़ तुम्हें क्या पता।तुमसे मुझे बहुत सारा झगड़ा करना है।वो उसे मारने लगी बिल्कुल बच्चों की तरह उसकी अदा हो गई थी। तभी राकेश बोला यार व्योम सचमें जब तुम्हरा कॉल आया इसकी छटपटाहट क्या बताऊँ ।सचमें ये रो रही है पर इतने दिनों में इतना खुश मैनें इसे कभी नहीं देखा।सिम्मी बोली हां व्योम इसने तुम्हें बहुत मिस किया है।
व्योम बोला-अच्छा बाबा सॉरी माफ कर तुम्हारा ख़याल था मुझे तभी तो वापस आया न जितना लड़ना है लड़ लेना।बस कर अब ।
अब नहीं जाऊँगा।देखो मेरे साथ कौन आये हैं मेरी फैमिली ।सबसे मिलोगी नहीं।
वो सभी एकदुसरे से मिले और ज़िन्दगी फिर से आगे चल पड़ी।
“व्योम ” निहारिका के जीवन को बदल गया।अगर वो न होता तो निहारिका शायद टूट कर बिखर गई होती।निहारिका के लिए व्योम जीवन का एक अटूट हिस्सा है।वो व्योम को कभी भूल नहीं सकती।
कभी कभी कोई इंसान हमारी ज़िंदगी मे एक ऐसी खास जगह बना लेते हैं।जिसकी जगह कोई नहीं ले पाता।वो हमें कब ज़िंदा कर जाता है पता ही नहीं चलता।
दीपा साहू “प्रकृति”