सुहानी ए सुहानी सुनो अरे सुनो भी यार सौरभ ने सुहानी को पीछे से आवाज़ दी।हां बोलो क्या है? मुझे नहीं करनी अब कोई बात जाओ हटो यहां से सुहानी ने सौरभ का हाथ झटकते हुए कहा।असल में सौरभ और सुहानी दोनों स्कूल के समय के दोस्त हैं जो कॉलेज में भी साथ-साथ ही पड़ते थे।
आज कालेज का आखिरी दिन था दोनों का पोस्ट ग्रेजुएट पूरा हो गया साथ ही सौरभ का एयरफोर्स के एग्जाम का रिजल्ट आ गया था। और उसे आज ही ट्रेनिंग के लिए निकलना था।इसी वजह से सुहानी नाराज थी। क्योंकि उसे सौरभ के बिना रहना पड़ेगा। सौरभ ने उसे पास बिठाया और उसके आंसू पौंछ कर प्यार से समझाते हुए कहा पगली
कहीं की ऐसे भी कोई रोता है। ट्रेनिंग के खत्म होते ही मैं वापिस आकर सीधे ही तुम्हारे पापा के पास जाऊंगा और उन्हें बताऊंगा कि मुझे आपकी लड़की से प्यार हो गया है।घत ऐसे भी कोई कहता है क्या सुहानी ने हाथ को झटकते हुए मुस्कुरा कर सौरभ से कहा और दोनों खिलखिला कर हंस पड़े।
अब मैं चलता हूं।मुझे आज शाम की ट्रेन पकड़नी है।मेरा इंतजार करना सौरभ हाथ हिलाते हुए वहां से चला गया।दिन तो जैसे पंख लगाकर उड़ने लगे।एक दो महीने तो सौरभ का फोन आता रहा और दोनों की बातें भी होती रही लेकिन कुछ दिनों से उसका फोन बंद जा रहा था।कई बार सुहानी फोन लगाती पर स्विच आफ ही बताता रहा।
सुहानी का जी घबराने लगा वह सौरभ को याद कर-करके आंसू बहती।एक दिन सुहानी की मां ने उसका बुझा चेहरा देखकर पूछा क्या बात है बेटा इतनी उदास उदास सी क्यों लग रही हो।मां के इतना पूछते ही सुहानी मां की गोद में सिर रख फूट-फूटकर रोने लगी।अरे रेरे क्या हुआ मेरी फूल सी बच्ची को क्यों रो रही हो मां ने पूछा। तब सुहानी ने अपने और सौरभ के बारे में सबकुछ बता दिया। छः महीने हो गए थे
सौरभ का न कोई फोन आया न ही खबर सुहानी के पापा उसके रिश्ते की बात चलाने लगे लेकिन सुहानी का अभी शादी करने का मन नहीं था वह सौरभ का इंतजार करना चाहती थीं।मै अब और इंतज़ार नहीं करूंगा सुहानी के पापा उसकी मां से ज़ोर से चिल्ला चिल्ला कर कह रहे थे।
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सुहानी का रिश्ता अभय नाम के लड़के से पक्का हो गया और झट मंगनी पट ब्याह भी हो गया लेकिन सुहानी ने अभी तक अपने पति से कोई बात नहीं की अभय एक बहुत ही संस्कारी लडका है। उसने भी सुहानी से स्पष्ट शब्दों में कह दिया जब तक तुम मुझे पति के रूप में स्वीकार नहीं करोगी मैं तुम्हें हाथ भी नहीं लगाऊंगा।
सुहानी की शादी को एक महीना ही हुआ था कि अचानक सुहानी के पास सौरभ का कॉल आया सुहानी सौरभ से बात करते ही खिल गई वह उससे मिलने के लिए कहने लगी।आज मार्केट जाने के बहाने मैं सौरभ से मिल लूंगी। सुहानी यह सोचकर मुस्कुरा उठी। अचानक अभय का कमरे में आना हुआ एक महीने में उसने सुहानी के चेहरे पर कभी इस तरह की खुशी नहीं देखी। मैं मार्केट जा रही हूं
सुहानी ने मुस्कुराते हुए कहा और चली गई। कुछ दिनों तक सुहानी ऐसे ही कुछ न कुछ बहाना बनाकर सौरभ से मिलने जाने लगी।अब अभय को सुहानी की इस हरकत पर संदेह होने लगा था।एक दिन अभय आफिस से निकला ही था कि उसे किसी के हंसने की आवाज सुनाई दी उसने पीछे मुडकर देखा तो सुहानी को किसी गैर मर्द के साथ देखकर दंग रह गया। सुहानी के भी अभय को सामने देखकर होश उड़ गए।
लेकिन अभय वहां से चुपचाप चला गया और सीधा वकील के पास पहुंचकर तलाक के काग़ज़ तैयार करवाकर घर वापिस आया। अब तक सुहानी घर पहुच गई थी सुहानी को देखते ही उसके सामने काग़ज़ फेंकते हुए बोला मैं साईन कर दिए तुम भी कर दो मेरी तरफ़ से तुम आजाद हो। सुहानी कुछ समझ नहीं पा रही थी। चुपचाप काग़ज़ उठाकर कमरे में चली गईंं।वह ख़ामोश पलंग पर बैठी थी।
उसे मां की बातें याद आने लगी मां की बातें भी उसे याद आने लगी मां ने कहा था।बेटा अब हमारी इज्जत तुम्हारे हाथ है। ससुराल में सबकी चहेती बनकर रहना। कभी किसी का दिल मत दुखाना। सोचते सोचते उसकी आंखें भर आईं तभी सौरभ का फोन आया अब फैसला करने का वक्त था
उसे सौरभ और अभय दोनों में से किसी एक को चुनना है। साथ ही साथ मां पापा की का भी ख्याल रखना था। उसने फोन उठाया और सौरभ को दो टूक जवाब देते हुए कहा मैं अब तुमसे कभी नहीं मिलूंगी। और रोते रोते अभय के पास जाकर मांफी मांगने लगी उसे अपनी ग़लती का एहसास हो गया था अब उसने अभय को पति के रूप में स्वीकार कर लिया था। उसने तलाक के काग़ज़ फाड़कर फेंक दिए और सौरभ के गले लगकर रोने लगीं। एक माफ़ी ने बिगड़ने से पहले रिश्ते सुधर गए।
निमिषा गोस्वामी
जिला जालौन उत्तर प्रदेश
मौलिक एवं स्वरचित