एक छोटी सी बात – प्रतीक खंडेलवाल

शीतल सुनो यार जल्दी टिफिन बना दो ऑफिस को लेट हो रहा हूं और वो मेरी घड़ी कहां है और ये पर्स में से पैसे लिए थे क्या…   रवि ने कहा

इंसान हूं कोई मशीन नहीं मैंने कोई पैसे नहीं लिए और तुम्हारे सारे कामों का ठेका मेरा नहीं है खुद भी चीजों को संभाल कर रख लिया करो ….शीतल का जवाब

अरे यार तुम्हें पता है ना मैं लेट होता हूं तो गुस्सा आता रहता है

हां हां समझ गई वैसे भी अब मुझे ही तो समझना है सब कुछ…..शीतल ने कहा

फिर रवि ने कहा- अरे तो क्या हो गया यार मुझे ऑफिस में बहुत कम करने होते है वैसे भी तुम तो दिन भर घर ही तो रहती हो

शीतल – तुम ऑफिस जाते हो तो मैं भी घर का काम करती हूं तुम खुद करके देखो दिन भर घर में कितना काम होता है तुम्हें लगता होगा दिन भर घर बैठकर आराम फरमाती हूं

अरे यार तुम छोटी सी बात को इतना क्यों बढ़ा रही हो

सही है मैं ही तो बढ़ाती हूं बातों को सही है सही है….

(वास्तविकता में बात तो छोटी ही थी जो अब बढ़ चुकी थी)


दोनों की बातें बढ़ती जा रही थी

रवि भी ऑफिस जाना भूल लड़ने में मशगूल हो चुका था

दोनों एक दूसरे की कमियां गिनाने लगे

बातें बढ़ती गई और शीतल ने कह दिया मैं अपने पापा के घर ही ठीक थी तुमसे शादी करके तो मैंने बहुत बड़ी गलती कर दी…

रवि भी गुस्से में बोल पड़ा क्यों कि शादी और कर ली तो चले जाओ वापस  मैंने कहा तुम्हें यहां रोक कर रखा है

अब शीतल का गुस्सा भी सातवें आसमान पर था वह भी बोल पड़ी …..जा रही हूं अपने मायके …. और अपना बैग पैक करने लगी

रवि भी गुस्से में बोला जाओ जाओ और  मुझे अपना वापस मुंह मत दिखाना

शीतल बैग लेकर निकल पड़ी अपने मायके

सीधे बस स्टॉप से अपने मायके पहुंची वहां मां-बाप के लिपट कर रोने लगी मां-बाप से अपने बच्चों के आंसू देखे नहीं जाते ऐसे में उन्हें परिणाम की परवाह नहीं होती बस अपने बच्चे सही लगते हैं

शीतल के पापा ने रवि को फोन लगाकर खूब बुरा भला कह सुन लिया बात इतनी बिगड़ गई कि नौबत तलाक तक आ गई फिर क्या था तीन-चार दिन में शीतल के पापा अपने ही  दोस्त जो वकील थे उस को घर ले आए और तलाक के पेपर बनवा लिए


फैमिली कोर्ट में दोनों को बुलाया गया वहां से तलाक के लिए 3 महीने का वक्त मिला

5- 7 दिन तो गुजर गई पर अब शीतल और रवि दोनों को एक दूसरे की याद सताने लगी

मन ही मन दोनों सोच तो रहे थे कि बात तो छोटी सी थी पर बात कुछ ज्यादा ही बिगड़ गई जिसकी उम्मीद शायद उन्हें भी नहीं थी

पर दोनों में से कोई  बात करने की पहल करने के लिए झुकने को तैयार नहीं था

ऐसे ही चलते चलते एक महीना गुजर गया

1 साल पहले आज वही दिन था जब दोनों एक दूसरे से पहली बार मिले थे और साथ ही दोनों के घरवालों ने रिश्ता पक्का किया था

बहुत ही खुश थे दोनों

और एक दूसरे को चोरी चोरी निगाहों से देख भी रहे थे

3 दिनों बाद उनकी सगाई की तारीख भी थी ,…

सगाई भी काफी अच्छे ढंग से हुई थी और होती भी क्यों ना

दोनों अपने मां-बाप की इकलौती संताने थी

बड़े नाजो से पाली हुई …..


सगाई के बाद दोनों का चोरी-चोरी मिलना जारी था ही जैसा कि सबका होता है

और दोनों की अंडरस्टैंडिंग भी गजब की थी एक दूसरे के मन की बात बिना कहे समझ जाते थे

शायद यही कारण था कि कुछ लोग इनकी अरेंज मैरिज को भी लव मैरिज ही समझते थे

4 महीनों में दोनों की शादी हो गई

(दोनो के घरों में कोई आर्थिक समस्या भी नहीं थी)

रवि एक  कंपनी में आईटी इंजीनियर था दस लाख का पैकेज था

सब अच्छा चल रहा था

सब कुछ तो बस एक छोटी सी बात पर बिगड़ चुका था

जिसका एहसास शायद दोनों को ही था और मन ही मन पछतावा भी जरूर हो रहा होगा

धीरे-धीरे डेढ़ महीने गुजर गए शीतल और रवि दोनों ने एक दूसरे को देखा भी नहीं ।

एक दिन अचानक शीतल बेहोश हो गई और उसे तुरंत हॉस्पिटल ले जाया गया ( हॉस्पिटल का डॉक्टर रवि का दोस्त था उसने रवि को सूचना दे दी)

खबर सुनते ही रवि भी दौड़ा चला आया आखिर प्यार इतनी जल्दी मिटता थोड़े ही है

डॉक्टर ने चेक किया और कहा


*बधाई

हो शीतल मां बनने वाली है*

शीतल यह सुनकर खुशी से झूम उठी पर सबसे ज्यादा खुशी से पागल तो रवि हो रहा था और होता भी क्यों ना आखिर वो बाप बनने वाला था

उनके झगड़े और तलाक की बातें कहीं कुछ दिमाग में नहीं रहा और रवि ने सीधे जाकर शीतल को बाहों में भर लिया आखिर बच्चे की खुशी होती ही इतनी प्यारी है

दोनों एक दूसरे के लिपट कर रोने लगे और आपस में माफी मांगने लगे दोनों को ही अपनी गलतियों का एहसास हो रहा था दोनों के दिलों में दफन प्यार आखिर उमड़ ही पड़ा और दोनों को एक दूसरे से ही शिकायत भी थी कि आखिर उन्होंने बातें बढ़ने ही क्यों दी आखिर में दोनों आज एक दूसरे से यह वादा लेकर फिर एक हो गए कि फिर से झगड़ा नहीं करेंगे और हुआ भी तो बातों को सोच समझकर ही फैसला लेंगे ऐसे जल्दी में लिया हुआ फैसला बहुत ही गलत साबित हो सकता है

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लेखक : प्रतीक खंडेलवाल

राजस्थान (लेखाकार)

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