दरकते रिश्ते – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

   ईका और अनिमा दोनों अच्छी बहने है। ईका अनिमा की दूर की रिश्ते में भाभी की बेटी है। दोनों एक ही मोहल्ले में रहतीं हैं। दोनों इकट्ठे ही पढ़ने जाती हैं। बाकी का दिन का हिस्सा भी इकठ्ठे ही बितातीं। कभी ईका अनिमा के घर तो , कभी अनिमा ईका के साथ मार्केट गयी होती। दोनों की आपस में रिश्तेदारी होने से दोनों के माता-पिता इस व्यवहार बहुत खुश रहते। दोनों आपस की सभी बातें एक दूसरे के साथ शेयर करती।

दोनों में सभी तरह की बातें हो जाती। पढ़ाई में अच्छी होने के साथ कयी और कामों तथा खेल में भाग लेती। पर दोनों की कक्षा भिन्न होने पर दोनों का उठने बैठने का दायरा भिन्न था।

यही कारण था कि इधर ईका कुछ ऐसे सहेलियों के साथ समय गुजारने लगी थी कि जिनकी गिनती अच्छी  सहेलियों में नहीं कही जा सकती। वे ईका को पढ़ाई से तो दूर ले जा रहे थे साथ ही गलत विचारधारा से प्रभावित कर रही थी। वे उसे अनिमा के खिलाफ भी उसके कान भरती । अनिमा इन सबसे अनभिज्ञ उससे वहीं रिश्ता रखतीं, उसकी सहायता करती।

आज भी उसने विधालय के बाद उसके साथ मार्केट जाने के लिए प्रोग्राम बनाया। ईका पहले ही सहेलियों के साथ बना चुकी थी। पर वह उसकी खबर अनिमा को लगने नहीं देना चाहती थी, इस लिए उसने अनिमा के साथ भी बना लिया। पर आखिर समय पर ईका ने अनिमा के खिलाफ जाने का ही सोचा। उसे एक ऐसी फिल्म देखने जाना था जो कि एडल्ट फिल्म थी।

हालांकि दोनों की उम्र इतनी कम भी नहीं थी। पर घर के माहौल के हिसाब से उन्हें जाने की अनुमति नहीं थी। फिल्म के बाद खाने का भी प्रोग्राम था। जिसके लिए उसने अपनी सहेलियों से ही उधार लिया था। सो ईका ने अनिमा को मना कर दिया व घर पर कहा कि अनिमा के साथ ही जा रही है।

अनिमा ने ईका की इस बात को सामान्य तरीके से ही लिया पर ऐमबरायडरी में शौक होने के कारण तथा कल उसका होम साइंस का कंपीटिशन होने के कारण उसे ऐमबरायडरी का सामान लेने मार्केट जाना ही पड़ा अनिमा चाहती थी कि वह इस कंपीटिशन को किलियर करें क्योंकि जो छात्र इसे  किलियर करता , उसे ऐमबरायडरी उधोग में एडमिशन करने का सौभाग्य मिलता।‌

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इसलिए वह जी जान से कौशिश करना चाहती थी। वह घर पर कहकर गई कि वह मार्केट जा रही है। दोनों के घरों में यह समझा गया कि दोनों साथ ही गई हैं।

अभी वह मार्केट से सामान ले कर आ ही रही थी कि उसने ईका को पिक्चर हाल के बाहर देखा। वह सब सहेलियों के ऐसे गुरुप के साथ थी जो कहीं से भी अच्छे चरित्र की नहीं लग रही थी। वह इस गुरूप के बारे में पहले भी कई बातें सुन चुकी थी। की युवक भी उनके साथ थे।जो कि कहीं से भी अच्छे घरों से संबंधित नहीं लग रहे थे।

 ईका ये तू पिक्चर हाल में क्या कर रही है और ये सब लोग कौन हैं जो ठीक नहीं लग रहे। चल घर चल, घर पर सब इंतजार करेंगे। पर तभी एक तो ईका उसे सामने देख चिढ़ गई थी साथ सो अनिमा पर चिल्लाते हुए बोली, अनिमा तू मुझे रोकने वाली कौन होती है , मैं तो इन सबके साथ ही जाऊंगी, तू मेरे मामले में टांग मत अडा। कहती हुई वह उनके साथ आगे बढ़ना ही चाहती थी कि अनिमा ने उसका रास्ता रोककर कहा कि,

मैं तुझे इनके साथ नहीं जाने दूंगी, क्या हमारा साथ इतना ही है, इस पर ईका ने अनिमा का हाथ जोर से झटका तो झटके से उसका सिर सामने वाली रेलिंग से जा टकराया। व खून निकलने लगा पर ईका इस सब को दरकिनार कर आगे हो ली। अनिमा ने उन्हें जाते हुए सुना कि फिल्म के बाद वे युवक इन सबको कहीं और ले कर जाएंगे। अनिमा जो कि ईका को इस सबसे बचाना चाहती थी, वह अपनी चोट की परवाह न करते हुए घर की तरफ दौड़ी।

  घर वाले उसकी यह हालत देख की सवाल करने लगे। अनिमा बोली, ये सब छोड़ पहले ईका को बचाओ, और उसने सारी बात घर के लोगों को बतायी। इतने में अनिमा के भाई भाभी भी उनके घर आ गए। पूछने पर कि ईका कहां है , सारी बात बतायी।सब मिलाकर ईका को देखने चले गए व पुलिस को भी फोन कर दिया।

ईका हालांकि नाराज थी पर पुलिस के सच बताने  पर कि ये लोग अच्छे नहीं हैं, और उसे व सहेलियों को ग़लत जगह ले जाते ईकाई की आंखें खुल गईं वह अनिमा से रोती हुई बोली कि मैने, तुझे गलत समझा व तुझे झूठा साबित किया जबकि तू तो मेरा अच्छा ही सोच रही थी, तभी उसके भाभी भैया बोले, अनिमा ने आज दरकते रिश्ते में मजबूती प्रदान कर उसे नयी हिम्मत दी है। अब ईका को वहीं पहले वाला प्यार दे कर नया कीर्तिमान स्थापित करें। अनिमा सब भूलकर आने वाले कल की तैयारी में लग गयी।

 *पूनम भटनागर।

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