छुट्टियां गर्मी की, ये शब्द हमेशा से ही बड़ा लुभावना रहा है हेना ….
छोटे थे तो परीक्षा के बाद मामा नानी घर जाने की खुशी अलग ही होती थी। बड़े होकर शादी हुई तो मायके जाने की खुशी तो शब्दों से परे है ,बचपन को फिर से जीवंत करने के दिन ,बेपरवाह बिना अलार्म वाली सुबह , न सब्जी क्या बनेगी ये सोचना, न जिम्मेदारियाँ ,भतीजे भतीजियों के साथ बच्चा बन कर कैरम ताश लूडो के खेल , खेल में शर्त भी ओर हारने वाले के आइसक्रीम पिज़्ज़ा मंगाने पर मजे लेना ।
मां का दुलार पापा से पसन्द की चीजें मंगवाना भाभी का प्यार ,भैया का घुमाने ले जाना , खूब सारी बातें मस्ती मजा , कितना कुछ सब खजाने जैसा ही तो रहता है, जिसे हम जितना बटोर सकते हैं बटोरते हैं ।
ऐसे ही कहानी है भावना की जिसकी दो भाभियाँ उसकी शादी से पहले आ गईं थीं, इकलौती ननद होने पर प्यार दुलार खूब मिला, भाई तो सबके अच्छे होतें हैं, खुशनसीब है वो बहना जिसको भाभी भी प्यारी मिलें। शादी के बाद मायके आने पर उसकी भाभीयां पसन्द के खाने से लेकर , हर बात का ध्यान रखती । घूमना ,समय देना, मस्ती खूब होती , उनके मना करने पर भी सब्जी साफ कर देना ,रोटियां साथ बनाना बातों में पता भी न चलता कब बन जातीं ।
मैके जाने पर जो खुशी उमंग वह महसूस करती , उसकी कोशिश यही रही ,भाभी बन कर वही खुशी वह अपनी दोनों ननद को दे।
कई बार अपने जान पहचान में सुनती कि ननद बच्चे आये तो भाभी को ज्यादा मतलब ही नहीं , जॉब वाली हैं तो पहले ही बहाना की नहीं सम्भाल पाऊंगी 2 4 दिन ही बुलाना बड़ा बुरा सा लगता ये देख कर ,कैसे लोग पाना तो अच्छा चाहते हैं पर देना नही चाहते। अपनापन न हो तो जाने का मन भी नहीं होता , इसलिए कहते हैं मायका मां तक होता है, लेकिन मां समान भाभी मिले तो मायका हमेशा महकता रहता है।
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इस बार गर्मी की छुट्टीयां लग गईं थीं और उसकी 2 ननद ओर बच्चे आये , पसन्द के व्यंजनों से लेकर, ढेर सारी बातों के साथ खाना बनाना, घूमना शॉपिंग ,रील्स बनाना,खूब मस्ती की ।
सुबह पदिदेव के ऑफिस जाने के बाद बच्चे भी पूल में मस्ती करने चले जाते और सब के सब दूसरी चाय के साथ गप्पें लगाने में ,जब तक की वैष्णवी(हाउस हेल्प) न आ जाती बातों का सिलसिला चलता ही रहता।
उसकी सोच थी क्या हुआ अगर कुछ दिन दोपहर नींद नहीं हुई ,क्या हुआ कुछ दिन अलमारी सेट नहीं रही ,क्या हुआ कुछ दिन काम ज्यादा है
पर किसी को देने के लिए सबसे कीमती चीज आपका वक्त ही है, ये जो पल हैं सुनहरी याद बनकर हमेशा याद आएंगे इनमें जितने रंग भर सकते हैं भर लो ।
इन्हीं दिनों भावना की शादी के सालगिरह आई और सुबह सुबह बधाई के साथ ये फरमान भी सुनाया जाता है आज आप कुछ काम नहीं करोगे लंच हम देख लेंगे।
दोपहर में देखा तो दीदी ने केक मंगाया ओर सब्जी बाहर से, बिटिया और दीदी ने मिलकर सब प्लानिंग कर ली और भनक भी नहीं लगी , मम्मीजी ने गर्मागर्म रोटियां बनाई सबके लिए , ये सब कुछ वाकई दिल को खुश करने वाला था।
सालगिरह वाले दिन रविवार था, भीड़ के कारण दूसरे दिन होटल में पार्टी रखी ,सबने खूब मजे किये।
कुछ दिनों बाद जाने का दिन भी आ गया ,पूड़ी सब्जी अचार पैक हो गए रात की ट्रेन थी , दिनभर से मम्मीजी उदास थी दिल भर आ रहा था उनका बातों में ,आखिर दिन किंतने भी हों ऐसा लगता है जल्दी से निकल गए ।
शाम को चाय के साथ बातें, विदाई टीका हुआ छोटे बच्चे बोले मामीसाब हमेँ बहुत अच्छा लगा आपके पास ,वह खुश होकर बोलती है आपके पसंदीदा बर्गर दो बार बनाये इसलिए हेना सब हंसते हैं।
सबको टैक्सी में बिठा कर जब वापस लिफ्ट से आ रहे थे तो मम्मीजी की आंख में आँसू थे , इतने में उन्होंने अपने बेटे से कहा गर्व है मुझे मेरी बहु पे , उस समय ऐसा लगा जैसे कोई अवॉर्ड मिल गया हो ,जो उसने दिल से किया ,उसे शब्दों से पुरस्कृत भी किया गया। पतिदेव भी खासे खुश हुए ये सुनकर।
वाकई एक समय के बाद इंसान बस यही चाहता है कि उनके बच्चों में प्यार रहे अपनापन रहे, बेटियों का मायका बना रहे वो खुशी से आयें और दोगुनी खुशियाँ लेकर जाएं ।
इसी तरह सबका मायका बना रहे ताउम्र ……….
नन्दिनी
5 वा जन्मोत्सव