छुपी रुस्तम – डॉ संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : आज रूपा को लड़के वाले देखने आने वाले थे,सारे घर में सुबह से ही चहल पहल थी,रूपा खूबसूरत,पढ़ी लिखी,सरकारी जॉब पर कार्यरत एक आधुनिक लड़की थी।हालांकि उसका दिल नहीं था इस तरह विधिवत देख दिखाने के बाद शादी करने का पर अपने पापा के डर की वजह से और मम्मी के दवाब के कारण वो राजी हो गई थी।

लड़का भी किसी कॉलेज में लेक्चरर था,उन्हें रूपा पहली नज़र में ही भा गई थी,वो अलग बात है कि रूपा को वो लड़का यानि चेतन सिरे से पसंद नहीं आया था।कितना पोज़ कर रहा था हर बात के लिए,उसे लगा कि ये  बहुत डबल स्टैंडर्ड आदमी है और इसके साथ उसकी नहीं निभेगी।

रूपा की बड़ी बहन भव्या ,कहने को उससे साल भर बड़ी थी,पर रूपा की तरह खूबसूरत नहीं थी,घर के काम काज में दक्ष,मधुर स्वभाव वाली वो भी पढ़ी लिखी थी पर उसकी सादगी उसकी शादी में आड़े आ रही थी और कोई लड़का उसे पसंद नहीं करता था।

अब छोटी बहन उसकी वजह से कुआंरी तो न बैठती,बहरहाल पेरेंट्स ने रूपा की शादी तय कर दी थी चेतन के साथ।

शादी के दिन,रूपा,मंडप से भाग गई अपने बॉय फ्रेंड दीपक के साथ एक छोटा सा पत्र छोड़ गई थी, “बिन मर्जी की शादी पूरी जिंदगी टीस देगी,इसलिए मै जा रही हूं हमेशा के लिए मुझे माफ करना।”

उसके मां बाप के पैरों तले जमीन निकल गई,समाज को क्या मुंह दिखाएंगे?चेतन के पेरेंट्स के आगे वो गिड़गिड़ाए और रिक्वेस्ट की,अगर वो चाहें तो दूसरी बेटी को मंडप में बैठा दें,वो भी बहुत काबिल और गुणी है।

बिना चेतन को विश्वास में लिए,चेतन के मां बाप ने, समाज के डर से,इस बात के लिए हां कर दी।

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भव्या ससुराल आ गई।प्रथम रात को चेतन ने भव्या को अपने संग देखा तो फट पड़ा,मेरे साथ धोखा हुआ है…मां बाप ने लाख समझाया पर उसके कान पर जूं न रेंगी।उसने भव्या को पत्नी मानने से इंकार कर दिया।

भव्या चुपचाप ये अपमान सहती रही,उसकी तो कोई गलती न थी,वो अपने पेरेंट्स की खातिर सूली चढ़ी थी।अपने अच्छे व्यवहार से उसने जल्दी सास ससुर और सभी रिश्तेदारों का दिल जीत लिया।

अगर देखा जाए तो वो अपनी बहन रूपा से थोड़ी कम सुंदर थी,उसकी तरह गोरी और शार्प नैन नक्श वाली नहीं थी बाकी उससे ज्यादा सुघड़,चरित्रवान और शिक्षित थी पर चेतन को ये सब नहीं समझ आता था।

उसने भव्या को जबरदस्ती पत्नी का दर्जा तो दे दिया था पर वो उसे कहीं बाहर न ले जाता घुमाने और उनमें पति पत्नी वाले संबंध भी न थे।

समय बीतता गया।भव्या अपने मायके आती तो मां उसका मुरझाया चेहरा देखकर अपराध बोध से ग्रस्त हो जाती,अपनी इज्जत बचाने के लिए उन्होंने अपनी बेटी की बलि चढ़ा दी थी,ये बात उन्हें सालती।

बेटा!तुझे जब लगे कि तू वहां नहीं रह सकती,लौट आना घर,कोई कुछ नहीं कहेगा।

नहीं मां! मै ठीक हूं,चेतन मुझे पसंद नहीं करते पर सास ससुर बहुत प्यार करते हैं,चेतन का दिल भी मै जीत ही लूंगी एक दिन। उनका गुस्सा जायज है मां!वो कहती और मां उस ढेरो दुआएं देती।

वो फिर ससुराल चली आती।चेतन का व्यवहार उसके साथ वैसा ही रहता।उसे भव्या बहुत गंवार नज़र आती,हर वक्त घर के कामों में लगी रहनी वाली,सीधी ,सरल,न कोई स्टाइल, न टशन।चेतन की मां समझाती उसे,बेटा!हमारी तकदीर अच्छी थी जो हमें ये बहु मिली,इसकी बहन रूपा ,वो भले ही सुंदर थी सूरत से,उसकी सीरत तो ठीक नहीं थी तभी तो वो भाग गई शादी के मंडप से पर चेतन का दिल नहीं मानता।

समय का फेर देखिए…चेतन जो अपने घर अपनी पत्नी से नाखुश रहता,कॉलेज में खूबसूरत लेडी टीचर्स से हंस कर बोल लेता लेकिन एक बार किसी ऐसे केस में फंस गया।हालंकि उसकी गलती इतनी नहीं थी  लेकिन,किसी ऊंचे घराने की खूबसूरत टीचर ने उस पर केस कर दिया।

कॉलेज कमेटी बैठी,सब उच्च अधिकारी चेतन के पक्ष में थे पर दूसरी पार्टी अड़ी हुई थी कि चेतन को सस्पेंड किया जाए।बात फिर इस पर तय हुई कि चेतन की पत्नी की गवाही पर उसका दंड तय किया जाएगा।क्या वो उसके व्यवहार से खुश और संतुष्ट है?

बिना चेतन को बताए,आखिरी दिन,उन्होंने भव्या को रैंडम कॉल कर कॉलेज बुलाया और उसकी ,उसके पति के बारे में राय जाननी चाही।

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क्या चेतन का व्यवहार उसके प्रति मर्यादित है?क्या वो दूसरी स्त्रियों के प्रति आसक्त रहता है,उसे टॉर्चर करता है?

भव्या को इससे अच्छा मौका  कभी नहीं मिलता चेतन से बदला लेना का,आज तक उसकी की गई इंसल्ट का बदला वो उससे ले सकती थी पर वो भारतीय नारी थी,जानती थी कि चेतन को गलत फंसाया जा रहा है,वो उसका पति है,उसकी नौकरी जाते ही,उसके सास ससुर पर बन आयेगी।

उसने पलभर चेतन को देखा,वो मुंह नीचे झुकाए सजा के लिए तैयार बैठा था,कोई कारण नहीं कि भव्या उसके लिए पॉजिटिव बोलेगी,भव्या ने कुछ निश्चय लिया और बोलना शुरू किया…

“सर!मेरे पति एक अच्छे टीचर,अच्छे बेटे और पति हैं,उन्होंने आजतक मुझसे कभी ऊंचे स्वर में बात नहीं की,मुझे यही लगता है कि उन पर ये आरोप बेबुनियाद है,मुझे उनसे कोई शिकायत नहीं है।”

कमेटी ने और बहुत से प्रश्न पूछे भव्या से,वो हाइली एजुकेटेड और टैलेंटेड लड़की थी जिसके बारे में चेतन को भी पहली बार पता चला।

आप जॉब क्यों नहीं करतीं,क्या मिस्टर चेतन ने कोई प्रतिबंध लगाए हैं आप पर?

नहीं सर,मेरे सास ससुर काफी बूढ़े हैं,उन्हें देखभाल की जरूरत है और मेरे पति की आय इतनी है जिसमें हमारी दैनिक जरूरत पूरी हो जाती हैं,बस इसीलिए…

चेतन ने ,पहली बार,चौंक कर उसे प्यार से देखा।इतनी बुरी भी नहीं थी वो शक्ल सूरत में जितनी वो समझता था।क्या हुआ जो उसका रंग दूधिया गोरा नहीं,क्या हुआ जो वो फैशनेबल कपड़े नहीं पहनती,उसका दिल तो खरा सोना है।

कमेटी ने सारी बातें मद्देनजर रखते हुए,चेतन को उन आरोपों से बरी कर दिया।

वो भव्या को अपनी मोटरसाइकिल पर बैठा के घर ले जाने लगा था।

क्या तुम मेरे संग चलना पसंद करोगी बाइक पर?उसने भव्या से पूछा।

मै तो कब से इस दिन के इंतजार में ही थी!वो शरारत से बोली।

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तुम बड़ी छुपी रुस्तम निकलीं,कभी बताया नहीं तुमने डॉक्टरेट कर रखी है?नाम से पहले डॉक्टर क्यों नहीं लगाती?

अब घर बैठकर क्या डॉक्टर लगाऊं नाम के आगे,वैसे आपने कभी मौका ही नहीं दिया कुछ बताने का,अब संग समय बिताएंगे तो सब कुछ जान ही लेंगे।वो बोली।

तुम घूमना कहां जाना चाहोगी मेरे साथ,मेरे विंटर ब्रेक में?चेतन बोला।

भव्या मुस्कराई…जहां आप ले चलोगे वहीं जाऊंगी।

चेतन ने मोटरसाइकिल की स्पीड तेज कर दी और भव्या उससे सटकर बैठ गई,उसकी कमर को अपने हाथों से जकड़ कर।वो फुसफुसाई…धीरे चलाओ बाइक।

नहीं…आज और करीब आ जाओ,पहली बार महसूस हो रहा है कि मैं शादीशुदा हूं और मेरी बीबी इतनी प्यारी है।

समाप्त

डॉ संगीता अग्रवाल

वैशाली,गाजियाबाद

#गृहलक्ष्मी 

Betiyan(M)

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