छलावा – लतिका श्रीवास्तव | best hindi story

हताश निराश अदिति तेजी से अपना सामान पैक कर रही थी..हड़बड़ी में जितनी तेजी से वो अपना सूटकेस ठूंस रही थी उतनी ही तेजी से वो बड़बड़ाती भी जा रही थी।

अरे मैडम कहां की तैयारी कर ली आपने सुबह सुबह ही और अपनी इस खासम खास दिलो जान से प्यारी सहेली भावना उर्फ भूनु को हिंट तक नहीं दी…भावना ने कमरे में घुसते ही उसका हाल देख कर कहा

जा रही हूं मैं ये हॉस्टल छोड़कर तुझको छोड़कर …तुझको बताती भी कैसे!!टाइम है तेरे पास मेरे लिए दोपहर को तो तेरा सबेरा होता है और आधी रात को दिन निकलता है अलग ही दुनिया में रहती है तू…और वो मेरे मम्मी पापा मगन है अपनी अपनी दुनिया में मुझे हॉस्टल में भेजकर मानो तीर्थ करने चले गए हैं…..मार्क्स लाना कितना कठिन लग रहा है मुझे मैं क्या करूं …टॉप कैसे कर पाऊंगी..कोई मेरी मुश्किलें समझता ही नहीं ..!!

अरे तो जा कहां रही है कौन पैदा हो गया तेरी मुश्किलें सुनने सुलझाने वाला या वाली ये भी बताती जा…भावना ने तब भी हंसकर ही छेड़ा उसे।

ये जो तेरी हंसी है ना बंद हो जाएगी जब मैं नाम बताऊंगी तुझे ….तिलमिलाते हुए अदिति ने कहा तो भावना थोड़ी संजीदा हो गई “..कौन है बताना जरा मैं भी जानूं तेरे भागीरथी का नाम ..!

अनिकेत है…. वो जो मुझे सुनता ही नही दिल से समझता भी है … तुझसे मेरे मम्मी पापा से बढ़कर मेरा ख्याल रखता है इस सेमेस्टर में मेरे मार्क्स कम आने पर मैं जब कैंटीन में अकेली बैठी थी तो मेरे पास आकर कितनी दिलासा दी थी उसने मेरा दुख उससे बात करके हल्का हो गया था…. उसी ने मेरे लिए पीजी ढूंढा है उसके परिचित हैं…मैं वहीं जा रही हूं …वो भी रहेगा साथ में मेरी पढ़ाई में मदद करेगा इस साल मेरा फाइनल है मुझे टॉप करवाएगा उसने वादा किया है….हांफते हुए अदिति ने कह दिया ।

सन्न सी रह गई भावना।

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क्या कह रही है आदी तू!!वो अनिकेत एक नंबर का आवारा है भरोसे के लायक नहीं है…!भावना ने कहा तो अदिति चिढ़ गई  …हां हां अब मेरा दोस्त बन गया है ना इसीलिए तुझे बुरा लगने लगा वो…कल तक तो तू उसके गीत गाते नहीं थकती थी।

अदिति मैं उसे जान गई हूं इसीलिए समझा रही हूं…जो खुद दो साल से फेल हो रहा हो वो तुझे टॉप कैसे करवाएगा!!उसकी आदत है अदिति लड़कियों को बरगलाने की फुसला कर गुमराह करने की…उसने मेरे साथ भी यही कोशिश की थी लेकिन समय रहते मैं सुधर गई….!!

मैं क्यों विश्वास करूं तेरी बातों का…अदिति टस से मस नहीं हुई।

क्योंकि मैं सत्य बोल रही हूं तू पढ़ने लिखने वाली सीधी लड़की है वो समझ गया थोड़ा सा मीठा बोलकर तुझे भावनात्मक रूप से कमजोर करना उसके लिए बाएं हाथ का खेल था …अलग से पीजी लेकर उसके साथ रहना ऐसा सोचा भी कैसे तूने !!पढ़ाई करवाने के लिए नहीं अपनी गलत इच्छाएं पूरी करने की वो कुत्सित योजना बना रहा है….एक बार तू उसके बहकावे में आकर उसके साथ चली गई तो वापिस लौट पाएगी इस जिंदगी में!!

ना घर की रहेगी ना घाट की…समझी!

अब अदिति थोड़ी शिथिल पड़ गई

मम्मी पापा ने तुझे अच्छे से पढ़ाई करने के लिए घर से दूर यहां हॉस्टल में भेजा है कितना महंगा हॉस्टल दिलवाया है उन्होंने अपनी बेटी के लिए …महीने में एक बार आते भी तुझे मिलने… तू अपने मम्मी पापा के बारे में अनिकेत के बहकावे में आकर गलत राय क्यों कायम कर रही है… मार्क्स कम क्यों आए ये तेरी मुश्किल है क्या उन लोगों ने तुझे डांटा !! नहीं ना !! बेटी बड़ी हो गई है तुझ पर पूरा भरोसा करते हैं  दोनों कि अब अपनी मुश्किलें खुद सुलझा सकती है…उनकी मुश्किलों के बारे में तूने सोचा है कभी जो तेरे इस तरह के निर्णय से किस हद तक बढ़ जाएंगी!!

सूटकेस अदिति के हाथ से छिटक कर जमीन पर गिर पड़ा था साथ ही मम्मी पापा की फ्रेम्ड फोटो भी गिर पड़ी थी

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नहीं पापा मैं आप लोगों को गिरने नहीं दूंगी आपके विश्वास में अपना विश्वास जोड़ कर और दृढ़ बनाऊंगी…कहते हुए एक नए विश्वास के साथ उसने फोटो स्टडी टेबल पर सजा कर रख दी… सॉरी भूनू….थैंक्स तूने सत्य का आईना दिखा कर मुझे संभाल लिया…तब तक भावना ने आगे बढ़ कर उसे गले से लगाते हुए मीठी डांट लगाई..चल चल अब पूरा सामान फिर से रख सारा रूम फैला दिया है तूने…! दोनों की हंसी  मानो सारी मुश्किलों का हल हो गई थी।

#घर का न घाट का 

लतिका श्रीवास्तव

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