एक माफ़ी ने बिगड़ने से पहले रिश्ते सुधार दिए। – निमिषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi

सुहानी ए सुहानी सुनो अरे सुनो भी यार सौरभ ने सुहानी को पीछे से आवाज़ दी।हां बोलो क्या है? मुझे नहीं करनी अब कोई बात जाओ हटो यहां से सुहानी ने सौरभ का हाथ झटकते हुए कहा।असल में सौरभ और सुहानी दोनों स्कूल के समय के दोस्त हैं जो  कॉलेज में भी साथ-साथ ही पड़ते … Read more

नफरत की दीवार – चंचल जैन : Moral Stories in Hindi

राघव, राधिका और मानव बचपन के दोस्त थे। साथ-साथ पढ़ते, खेलते, इधर-उधर घुमते, धमाचौकडी करते। न उनको चिंता थी, न उनके घरवालों को। निश्चल मैत्री की खुशबू सबके मन को आह्लादित करती। सबके परिवार में सरस प्रेमभाव था। एक दूजे के सुख-दुख में वे हमेशा साथ रहते। राघव, राधिका मेहनती थे। मन लगाकर पढ़ाई करना, … Read more

गुड नाइट डायरी – चाँदनी झा : Moral Stories in Hindi

“तुमने जो सूरज को लेकर अपने मन में “नफ़रत की दीवार” खड़ी कर ली है, क्या वो सही है? सूरज मेरा दोस्त बाद में बना, पहले वो तुम्हारा दोस्त है। तुमको मेरे और सूरज के रिश्ते में शक है? तो,…मुझसे भी नफ़रत होनी चाहिए। ये क्या दोहरापन है, उसको म्यूट कर रखा है, अनफ्रेंड कर … Read more

ममता का दायित्व – रश्मि वैभव गर्ग : Moral Stories in Hindi

कृष्णकली नाम था उसका ..प्यार से सब कली ही बुलाते थे। ग़रीबी के साये में ही आँख खोली थी उसने। कली अपने माँ बाप की सबसे बड़ी संतान थी।उससे छोटी तीन बहिनें और थी। जीवन की कठिनाइयों में शिक्षा प्रायः गौण ही हो जाती है। दसवीं की परीक्षा में कली पूरक आई थी। पिता पर … Read more

‘एक माफी और ढेर स्नेह’ – अन्जना मनोज गर्ग : Moral Stories in Hindi

     नयी-नयी शादी हुयी थी कनिका की। पगफेरे की प्रथम रस्म के साथ ही पति देवेश के साथ वह शहर आ गयी थी साथ में सासूमाँ भी आयी थी ताकि आधुनिक कान्वेंट शिक्षित कनिका को घर सँभालना सिखा सकें। सासूमाँ गाँव की भोली-भाली अपने उसी पुराने और सरल तरीके से काम करने वाली महिला थी। आजकल … Read more

दोस्ती – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

 मधु, मालती दोनों पक्की सहेली थी। लगता था जैसे इन दोनों के बीच में “और” लगाना ही नहीं है,एक का नाम लो तो दूसरे का नाम अपनेआप मुँह पर आ जाता था। उनका कोई भी काम एक दूसरे के बगैर होता ही नहीं था। जब सहेलियाँ है तो स्कूल कॉलेज तो साथ जाएंगी ही परन्तु … Read more

एक माफी मांग लेने से यदि रिश्ते बच रहे हैं तो बचा लीजिए – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

ये क्या बहू आज फिर से तुमने राजमा बना दिया अभी परसों ही तो बनाया था , मुझसे हजम नहीं होता पेट भारी भारी हो जाता है बहुत गरिष्ठ होता है मेरा पेट साफ नहीं होता है ‌। नहीं आज फिर से राजमा नहीं बनाया है परसों का ही है बच गया था तो क्या … Read more

छोटी सी सलाह – स्मृति गुप्ता : Moral Stories in Hindi

इतने काम के बीच वसुधा का मन किसी और ही सोच में डूबा था। डोरबैल सुनते ही,  दरवाजा खोला सामने प्यारी सखी वैशाली खड़ी थी, दोनों पड़ोसी होने के साथ, एक ही ऑफिस में काम भी करती हैं, इनमें बहनों सा रिश्ता है।   नीर (वसुधा की बेटी) की शादी को अब महीना भी नहीं बचा … Read more

विभीषिका – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

दरकते स्त्री पुरुष सम्बन्धों की विभीषिका, जहां तहां अपने रक्तिम चिन्न्ह बिखेरकर एक दर्द भारी दास्तां लिख जाती है। जेल के बाहरी परिसर में एक चालीस साल का पुरुष, मैला सा पायजामा, कंधे पर लाल अंगोछे से बार बार चेहरे का पसीना पौंछते हुए बेताबी से चक्कर लगा रहा था। फिर उसने पीपल की छाँह … Read more

मेरी माँ है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

  ” सुमन बेटी..आज तुम्हारी परीक्षा का पहला दिन है.. दही-चीनी खाकर जा.. पेपर अच्छा होगा..।” कहते हुए शारदा सुमन को दही खिलाने के लिये आगे बढ़ी, तभी सुमन उनका हाथ रोकते हुए बोली,” कोई ज़रूरत नहीं है..।” और स्कूल जाने लगी।उसके पिता बेटी को डाँटने ही वाले थे कि शारदा ने उन्हें रोक दिया।     सुमन … Read more

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