दिखावे की जिंदगी – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

रघुराज जी एक माने हुए वकील हैं । उनकी वकालत बहुत अच्छी चलती है । उनके पास केसो की लाइन लगी रहती है । लोगों का मानना है जो केस वह लेते हैं निश्चय ही जीते हैं । वह बहुत ही बारीकी से केस की रीडिंग करके उसका दोनों पक्षों का वादी और प्रतिवादी हल … Read more

चक्रव्यूह – ऋतु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

पार्क में बैठे वीरेन जी को एहसास भी नहीं था कि अंधेरा घिर आया है, पंक्षी भी अब अपने घौसलों की ओर लौटने लगे हैं, उन्हें भी अब घर  लौटना चाहिए। लेकिन अब उनका मन घर लौटने को नही करता, जब से उनसे उनकी जन्म भूमि अपना कस्बा सुल्तानपुर छूटा है, वे निस्तेज से हो … Read more

सीमा रेखा – अर्चना सक्सेना : Moral Stories in Hindi

“उफ तंग आ गया हूँ मैं इस दिखावे की ज़िंदगी से। कितनी बार कहा है जितनी चादर है उतने ही पैर फैलाना सीखो लेकिन तुम्हें जब भी मायके जाना होता है तुम मेरी दो महीने की तन्ख्वाह जितने पैसे पन्द्रह दिन में उड़ा आती हो। सारी जमापूँजी खत्म होने को आई, आखिर कब तक ऐसे … Read more

मैं स्वयं को बदल लूंगी – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

बारिश कल रात से बंद होने का नाम नहीं ले रही थी भावना ने घर के कामों को खत्म किया और आफिस का काम करने बैठी पर यह क्या बारिश के कारण नेटवर्क ही नहीं मिल रहा था भावना के चेहरे पर झल्लाहट साफ़ दिखाई दे रही थी। क्योंकि, भावना को अपने आफिस का काम … Read more

बारिश और लाकडाउन – डॉ कंचन शुक्ला : Moral Stories in Hindi

” करीब चार दिनों से लगातार बारिश हो रही थी प्रेरणा हर दिन की तरह आज भी बालकनी में आई बाहर का प्राकृतिक सौंदर्य देखकर उसके चेहरे पर मुस्कान फ़ैल गई।सामने पार्क था उसमें विभिन्न प्रकार के फूल खिले हुए थे कालोनी की सड़कों के दोनों किनारों पर लगे नीम, अशोक,सहजन, अमलतास के वृक्ष हर … Read more

औलाद के मोह के कारण वह सब कुछ सह गई। – मधु वशिष्ठ : Moral Stories in Hindi

औलाद के मोह के कारण वह सब सह गई। पति के बिना बेटे और बेटी को पालना कोई इतना आसान थोड़े ही था। पति और सास की मृत्यु के बाद गांव में रहने खाने का कोई भी तो ठिकाना नहीं था। गायत्री अपने दोनों बच्चों को लेकर मायके आ गई। मायके में माता-पिता और भाई … Read more

खुशियां कभी पैसो से नहीं खरीदी जा सकती !! – स्वाती जैंन : Moral Stories in Hindi

शीनम , तुमने मुझे बताया क्यूं नहीं कि पापा ने फोन किया था तुमको कल , वहां मम्मी की तबीयत इतनी खराब हैं और तुमने मुझे बताना भी जरूरी नहीं समझा गुस्से में बोला रोहित !! रोहित , पहली बात तो यह कि वह तुम्हारी मम्मी हैं और आए दिन उनकी तबीयत खराब होती रहती … Read more

जब जागो तभी सवेरा – अर्चना सिंह : Moral Stories in Hindi

मेघा की मम्मी रेणु जी को मेघा के साथ रहते हुए मुश्किल से एक सप्ताह ही हुए थे लेकिन उन्होंने उसकी दिखावे वाली सोच को बहुत अच्छी तरह से भाप लिया था । ऊबने तो वो दो दिन से ही लगी थीं पर जिन परिस्थितियों में वो मेघा के पास आई थीं उन्हें टोकना सही … Read more

औलाद के मोह के कारण वो सब सह गई – अर्चना झा : Moral Stories in Hindi

मेरा चेहरा उतरा हुआ देखकर अरुणा ने तपाक से पूछा, अब क्या हुआ,अब तो सारी व्यवस्था अच्छे से हो गई, मंच सज गया, कुर्सियां लग गई, नाश्ते,खाने की व्यवस्था भी हो गई आगंतुकों के लिए,ऐसे मुंह क्यों लटकाया हुआ है, मैंने कहा यार ये एंकर बड़ी खड़ूस लगी मुझे, अजीब तरीके से बात करती है, … Read more

स्वार्थी संसार – अर्चना झा : Moral Stories in Hindi

नाजों से पहली सुमन को कहां पता था कि उसके जीवन में एक मोड़ ऐसा भी आएगा कि  सुमन वो सिर्फ नाम की यह जाएगी, न कोई सुंगध न ताजगी बस किसी मुरझाए फूल की तरह जिंदगी गुजारनी होगी , घर के कामों से थक कर ज़रा सा बैठी ही थी सुमन की सासूमां की … Read more

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