सह यात्री -बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

   पापा-पापा, आप कहाँ हो?पंडित जी आने ही वाले हैं।आप नहाकर तैयार हो जाओ।आप हो कहाँ?     बोलते बोलते रोहन पापा के कमरे की ओर बढ़ गया,देखा पापा तो मम्मी की तस्वीर के सामने खड़े है,एकटक उधर ही देखते हुए,कुछ बुदबुदाते हुए।पापा अक्सर ही ऐसे ही मम्मी के फोटो के सामने घंटो बैठे रहते,सबकुछ भूलकर।ऐसे में रोहन … Read more

ठग अपने ही घर – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ नीना आज फिर से तुमने मेरे वॉलेट से पैसे निकाले… कितनी दफ़ा कहा है जब भी निकाला करो मुझे बता दिया करो।” ऑफिस से घर आकर मयंक पत्नी  पर ग़ुस्सा करते हुए बोला  “ पर मैंने कोई पैसे नहीं निकाले कुछ दिनों से तुम मुझसे यही कह रहे हो अरे जब निकालूँगी तो बता … Read more

ईर्ष्या का अंजाम हमेशा बुरा ही होता हैं -स्वाती जैन : Moral Stories in Hindi

बहु , नाश्ता बना या नहीं ?? तुम्हारे पापाजी और कुंदन को ऑफिस जाने लेट हो रहा हैं कविता जी अपने कमरे से गुस्से में बोली !! जी मम्मी जी बन गया हैं बस गर्म गर्म नाश्ता ही परोस रही हुं , राही अपने ससुर जी और पति कुंदन को नाश्ता परोसते हुए बोली !! … Read more

पापा आप कैसे अपनी माँ की बुराई सुनते हैं -संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

वाह क्या सब्जी बनी है…. आज माँ की याद आ गई…. परवल की सब्जी भी इतनी शानदार बन सकती है… ये तो मुझे माँ के हाथों से बनी परवल की सब्जी खा कर ही पता चला था….!! वरना मुझे तो परवल बिल्कुल भी पसंद नहीं थी….। अनजाने में ही सब्जी की तारीफ करते करते नकुल … Read more

अब तो अनर्थ नहीं होगा-हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मम्मी जी… मैं मेरी सहेलियों के साथ किटी पार्टी में जा रही हूं, आप अंदर से दरवाजे बंद कर लीजिए, मुझे आने में तीन-चार घंटे लग जाएंगे आप तब तक आराम कीजिए! मैं आने के बाद सारा काम कर लूंगी! ठीक है बहु…. 1 मिनट… हे राम… “यह क्या अनर्थ कर दिया तुमने”! क्या हुआ … Read more

हमसफ़र – संध्या सिन्हा : Moral Stories in Hindi

क़रीब तीन  बरस  बीत गए मृदुल को मेरे जीवन से गए. किंतु मैं तो आज भी उसी मोड़ पर खड़ी हूं, जहां वो मुझे छोड़ कर चला गया था. गहरे अवसाद में चली गई थी मैं. पर किसी के जाने से जीवन रुक नहीं जाता जीना तो पड़ता ही है. द शो मस्ट गो ऑन…” … Read more

हमसफर – साक्षी तिवारी : Moral Stories in Hindi

सौंदर्या सकुचाई सी आईने के सामने बैठी थी । बगल में रखी लाल रंग की बनारसी साड़ी जैसे उसे मुंह चिढ़ा रही  थी ।  “ये अचानक क्या सूझी सुदीप को । शादी के तीन साल बाद रिसेप्शन ? आखिर इसकी जरूरत क्या थी?” वो परेशान सी बोले जा रही थी। तभी दरवाजा खुला और सुदीप … Read more

ये क्या अनर्थ कर दिया तुमने – रीतू गुप्ता : Moral Stories in Hindi

शिवी अपनी २० दिन की बेटी के साथ अपने कमरे में सो रही थी। साथ ही उनकी देखभाल के लिए उसकी जेठानी गौरी लेटी हुई थी। घोर गर्मी थी, सब ऐ . सी . चला कर आराम से सो रहे थे, क्यूंकि शिवि और बेबी अभी ऐ सी में नहीं सो सकते थे तो वो … Read more

पत्नी हमसफर है ना की गुलाम – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

बहू… यह क्या तुमने विनीत के आने से पहले ही खाना खा लिया, अरे हमारी तो छोड़ो कम से कम अपनी पति की इज्जत कर लिया करो, बहू का फर्ज होता है कि जब तक परिवार के सभी लोग खाना ना खा ले तब तक वह खाना ना खाए,  तुम्हें पता नहीं कितनी भूख लगती … Read more

भेदभाव जाति पाति का -माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

जानकी देवी गांव से अपने पोते की शादी के लिए शहर अपने बेटे रामनाथ के घर आई हुई है,लेकिन जबसे घर आई हैं तबसेघर में अजीब सा सन्नाटा छाया हुआ है। जब दो दिन हो गए उनको तब उन्होंने अपनी बहू से कहा कि उसे होने बाली बहू का फोटो तो दिखाओ कम से कम।कैसी … Read more

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