प्रतिघात – रवीन्द्र कान्त त्यागी : Moral Stories in Hindi

इन्सपैक्टर चतुर सिंह की खटारा सी धूँआ छोड़ती मोटरसाइकिल थाना परिसर में आकर रुकी तो एक हवलदार बालकराम भागा हुआ बाहर आया और बेताबी से चिल्लाया “साब जी, रेप हो गया कस्बे में।” “अच्छा” उन्होने बेहद ठंडे स्वर में कहा और बरामदे में पड़ी कुर्सी पर थके से बैठ गए। सामने मेज पर रखे पानी … Read more

 वही हार – विमला गुगलानी : Moral Stories in Hindi

सच ही कहते है कि जब तक ख़ुद पर न बीते असलियत समझ नहीं आती। कैसे हम दूसरों की छोटी से छोटी बात में आसानी से बड़े बड़े नुक़्स निकाल लेते है, लेकिन जब वही काम ख़ुद करना पड़ता है, तो पता चलता है कि कैसी कैसी रूकावटें सामने आती हैं।रूचि के बेटे व्यास की … Read more

 तकदीर फूटना – निमीषा गोस्वामी : Moral Stories in Hindi

आज तो भंडारे का भोजन मिलेगा जल्दी-जल्दी सब काम खत्म करके मालिक से छुट्टी ले लेता हूं। फिर मंदिर जाकर भंडारा खा लूंगा कम से कम एक रात का खाना तो बचेगा।भानू यह सब सोचते हुए माल का ट्रक खाली कर रहा था। बड़े-बड़े बाक्स को उठाकर गोदाम में रख रहा था बस ये आखिरी … Read more

 अपना घर अपना ही होता है – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

सुमन चार भाई – बहनों में सबसे बड़ी थी। पिता जी कम उम्र में जिम्मेदारियों का बोझ उसके कंधे पर डाल कर दूसरी दुनिया बसा लिए थे। उनकी सहकर्मी थी रंजना जिसके प्रेम जाल में फंस कर मां और बच्चों को छोड़कर दूसरे शहर जा कर विवाह कर लिया था। मां बहुत टूट गई थी… … Read more

 “प्रायश्चित” – प्रीती श्रीवास्तवा : Moral Stories in Hindi

‘पलक ‘दरवाजे पर खड़ी होकर के अपने (पति) ‘रोमन’ से; चहकते हुए बड़े उत्साह के साथ, अपने बगल में एक बुजुर्ग महिला की तरफ इशारा करते हुए बोलती है ,’रोमन’ देखो कौन आया है ….,उन बुजुर्ग महिला को देखते ही रोमन भड़क उठता है। और बोलता है आप यहाँ !क्यों आईं हैं ,अभी तुरंत यहाँ … Read more

 “इज्जत इंसान की नहीं पैसे की होती है” – प्रतिमा श्रीवास्तव : Moral Stories in Hindi

बड़ी बुआ जी की शान शौकत और रुतबा समाज में तो था ही साथ में परिवार में भी खूब चलती थी।जो देखो उनका गुणगान करते नहीं थकता था। बुआ जी को भी अपनी अमीरी पर बहुत घमंड था। जब भी मायके आती सब के लिए कीमती तोहफे लातीं और पैसे भी बताया करती कि फला … Read more

 प्रायश्चित – ऋतु यादव : Moral Stories in Hindi

संस्कृति का हंसता खेलता परिवार उस समय उजड़ गया जब अचानक पति सोहम रोड एक्सीडेंट में उसे छोड़कर चले गए। रह गई अकेली संस्कृति और उसके दो बच्चे। कहने को रुपए पैसे की कोई कमी नहीं थी, सोहम ने इंश्योरेंस, किराए और कई ऐसी स्कीम्स पर इन्वेस्ट कर रखा था कि संस्कृति और बच्चों का … Read more

 सम्मान किसका? – डा० विजय लक्ष्मी : Moral Stories in Hindi

समीर की उंगलियाँ जब भी ब्रश थामती थीं, रंग जैसे सांस लेने लगते थे। कैनवास पर फैला हर रंग, उसकी आत्मा की गहराइयों से निकला एक भाव लगता था। लेकिन हैरत की बात थी कि इन रंगों की आवाज़ कभी किसी ने सुनी ही नहीं। बीते बीस वर्षों से समीर अपनी कला में रमा था।खेलने … Read more

 क्या करूं बहन मेरी तो तक़दीर ही फूटी है। – मंजू ओमर : Moral Stories in Hindi

अरे क्या हुआ भाभी जी आप तो बेटा बहू के पास गई थी ,कब वापस आ गई।आप तो कुछ दिन रहने के लिए गई थी न । कुछ दिन क्या अब तो आपको उन्हीं के पास रहना चाहिए ।विजय भाई साहब की इतनी तबियत खराब रहती है कितना कितना तो उनका आपरेशन हो चुका है … Read more

 इज़्ज़त किसकी – डॉ ऋतु अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

 “तू निकल यहाँ से! हमारे पास नहीं है तुझे खिलाने के लिए फालतू पैसे! काम का न काज का दुश्मन अनाज का। तेरी पढ़ाई-लिखाई पर इतना खर्चा किया। सोचा कि पढ़ाई पूरी होने के बाद तू नौकरी करेगा तो कुछ घर में सहारा लगेगा पर नहीं जी, इन्हें तो दिवास्वप्न देखने से ही फ़ुर्सत नहीं … Read more

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