चलो न पापा – लक्ष्मी रानी लाल : Moral Stories in Hindi

सारी रात की मूसलाधार बारिश अब तक रिमझिम फुहारों में तबदील हो चुकी थी। श्यामल जी खिड़की के पास कब तक खड़े रहे, उन्हें भान न था । नि:शब्द धुंधलाती बरसती आँखों को चुपके से उन्होंने पोंछा । खिड़की के पास खड़े-खड़े उनके पाँवों में ऐंठन सी होने लगी थी । ‘पापा…. चाय! आप कब … Read more

खोल दो पंखो को – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

कुछ दिनों से रोहित देख रहे थे मीता अक्सर खोई -खोई सी एकटक सामने देखती रहती, उसका वजन भी कम हो रहा था, उसके चेहरे की खूबसूरती बढ़ाने वाली सदाबहार मुस्कुराहट की जगह एक खामोशी फैली हुई है, किसी काम में उसका मन नहीं लगता, कभी सब्जी जल जाती तो कभी दूध उफन कर गिर … Read more

दुनिया के सबसे कठिन काम – नेकराम : Moral Stories in Hindi

पत्नी ने खाना परोसते हुए कहा आखिर ऐसे कब तक चलेगा अपनी बेटी प्रियंका एक वर्ष की हो चुकी है और तुम्हें अभी तक कोई नौकरी नहीं मिली ,, मैं कितना खींचतान करके घर चला रही हूं मायके से भी अब मदद मिलनी बंद हो चुकी है आज के जमाने में परिवार चलाने के लिए … Read more

दरार – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi

 सब अड़ोसी पड़ोसी और रिश्तेदार यही सोच रहे थे कि यह भी कोई उम्र है जाने की। वह भी इतने बुरे तरीके से, मासूम से बच्चे को छोड़कर। भगवान इसके साथ ऐसा क्यों हुआ, ऐसा किसी के साथ ना हो। आरती का पार्थिव शरीर आंगन में पड़ा था। 5 साल के बच्चे पार्थ को स्कूल … Read more

Top Ten Shorts Story in Hindi – हिन्दी लघुकथा

श्राद्ध- श्वेता अग्रवाल शशांक ने पिता के श्राद्ध का भव्य आयोजन किया था। ब्राह्मण भोजन करके तृप्त हो रहे थे। वहीं, कमरे में उसकी बूढ़ी माॅं भूख से तड़प रही थीं। ब्राह्मण-भोज के बाद बहू ने उन्हें सूखी रोटी और नमक पकड़ा दिया।   “थोड़ी सी प्रसाद वाली सब्जी दे दो, सूखी रोटी नहीं खाई जाती,बहू।” … Read more

सास-ससुर बाट देखते होंगे – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

” सुधा, मैं चलती हूं..… देर हो रही है …. ” कहते जानकी मंदिर में हो रहे सत्संग के बीच में हीं उठ कर जाने लगी। ” जानकी रूक तो… कहाँ चल दी इतनी जल्दी , अभी अभी तो तू आई थी! ” थोड़ी देर और रूक जा बस आरती होते ही प्रसाद लेकर चलते … Read more

तू डाल-डाल मैं पात-पात.. – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

“क्या राज है अंजू, तू सास -ससुर के साथ रहती है, फिर भी सोसाइटी के हर एक्टिविटीज में भाग लेती है। सजी संवरी भी रहती,कैसे मैनेज करती है तू, हमें भी वो राज जानना है।”नीला ने अंजू से पूछा। “कुछ नहीं यार, बस दिमाग से काम लेती हूँ, वो लोग भी खुश और मै भी … Read more

मिर्ची वाले भटूरे — – नेकराम : Moral Stories in Hindi

हमारे मोहल्ले में साप्ताहिक बाजार लगता है शाम को थैला लेकर बीवी के पीछे-पीछे चलना मेरी हमेशा से ही आदत रही है बीवी हमेशा आगे आगे चलती सब्जी का मोल भाव करती और खरीद लेती मेरे पास जो थैला रहता उसमें सब्जियां रख देती यही हमारा हर सप्ताह का नियम था उस दिन भी साप्ताहिक … Read more

ए माई! हमको भी पापा संगे पूजा घूमना है – लोकृती गुप्ता : Moral Stories in Hindi

“ए पापा! अबरियो आप हमलोग के साथ नहीं न चलिएगा? “न रे लल्ला! तू लोग सब घूमने चल जाना। काहे पापा, हर बार आप ऐसे ही करते हैं बाकि सब हमरा दोस्त लोग मम्मी-पापा दूनु के साथ घूमने जाता है, फेसबुक पर फोटू भी डालता है। बस हम ही आपके बिना हर जगह जाते हैं। … Read more

अंधे की लकड़ी – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi

 डॉक्टर  रमेश आज  अस्पताल में  मरीज देखते-देखते काफी थक चुके हैं,परन्तु उनके चेहरे पर आत्मसंतुष्टि का भी भाव है।।वैसे तो डॉक्टर रमेश रोज सेवा-भावना से इलाज करते हैं,परन्तु कुछ दिन  पहले की घटना की  ने उनके अंतर्मन को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया था। उस दिन  एक औरत उनके पैर पकड़कर रोते हुए कह … Read more

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