बदलते रिश्ते (भाग-6) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

दोनों के बीच ऐसे कोई प्यार वाली भावना ही नहीं है। आजकल तोह मुझे वैसे ही अपनी बुद्धि पर बहुत आशंका होने लगी थी। अगले दिन सुबह  नाश्ता करके मैं और भईया तैयार हो गए थे,  भईया ने सफेद कुर्ता उसके साथ पुरानी नीली जीन्स और मैंने सफेद रंग की कुर्ती और सलवार पहना था। … Read more

बदलते रिश्ते (भाग-5) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

 जैसे ही उन्होंने अपना परिचय देना शुरू किया, क्लास में सिटीओं की आवाज ने, उनकी आवाज को कहीं दबा ही दिया।  और इन आवाजों में, ज्यादातर आवाजें लड़कियों की थी! तोह यह था, प्रोफेसर साहब का हमारे  साथ पहले लेक्चर का दिन। आगे के दिनों में, उनका रोबिला व्यक्तित्व, उनकी विषय पर पकड़, उनका समझाने  … Read more

बदलते रिश्ते (भाग-4) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

 उर्मि एक दम से खड़े हो जाती है, चलने के लिए। पुजा के पंडाल की सजावट देखते ही बन रही थी,  अपने ही मोहल्ले की पहचान नहीं आ पा रही थी, सड़क के दोनों और चुन्ना बिछा हुआ था,  झालर लगे हुए हैं पुरे पंडाल में,  काफी  रोशनी के इंतजाम किए गए हैं, लाल कारपेट … Read more

बदलते रिश्ते (भाग-3) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

उर्मि और मैं अपने कॉलेज की बातें एक दूसरे को बताने लगे, मोहल्ले में क्या नया हुआ, और भी ना जाने क्या क्या…  इतने में मम्मी की आवाज आई, वह खाने के लिए हमें बुला रहे थे,  आज तोह पापा भी जल्दी आ गए थे, मैं पापा के गले लग गई। मेरा और पापा का … Read more

बदलते रिश्ते (भाग-2) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

मैंने उसे दरवाजे से ही लोटा दिया। अतीत की यादें, मस्तिष्क के हर कोने में मानो रमी हुई हैं, हर कोने ने बहुत हिफाजत से उन यादों को संजोया हुआ है। ‘किताब के पन्नों की तरह, पन्ना पलटता मेरा अतीत, मेरे सामने घूम रहा है ’ बस आज जरा सा मौका मिला नही, सब घूमड, … Read more

बदलते रिश्ते (भाग-1) – अंबिका सहगल : Moral stories in hindi

मैं, तापसी माथुर उर्फ पापा की तपु,  कितनी चिढ़ थी मुझे तब इस नाम से,  और पापा थे की ऑफिस से आते ही शुरू हो जाते, “तपु कहाँ है? तपु  ने आज स्कूल में क्या किया?”  और ना जाने क्या क्या।  और मैं बस इंतजार करती, पापा कब मुझे मेरे सही नाम से पुकारेंगे,  और … Read more

“काजल की कोठरी” – अर्चना त्यागी : Moral Stories in Hindi

सुमन अपनी शादी को लेकर काफी उत्साहित थी। बड़ी मुश्किल से उसके पिता एक बड़े घर में उसका रिश्ता तय कर पाए थे। अकेला लड़का था। पारिवारिक व्यवसाय में लगा हुआ था। लड़के के पिता तो थे किन्तु माताजी का देहांत हो चुका था। चाचा, चाची और उनके तीन बच्चे थे। पिता और चाचा मिलकर … Read more

सच्चा साथ – डॉ० मनीषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

आज तन्वी और आदित्य की सालगिरह थी। तीसरी। मगर फ्लैट में कोई शोर-शराबा नहीं था। न फूलों के गमले, न महंगे उपहारों के पैकेट। सिर्फ़ चाय की खुशबू और धीमे बजते हुए उस पुराने गाने की मधुर तान – “तुम मुझे यूँ भुला न पाओगे…” जो उनकी कॉलेज के दिनों की याद दिलाता था। तन्वी … Read more

शिक्षक का सम्मान – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

   ” आप क्या कह रहे हैं रामलाल..ये शादी तो आपने ही तय की थी और आप ही…।शादी-ब्याह कोई गुड्डे-गुड़िया का खेल तो नहीं कि जब चाहा तोड़ दिया..।” ओमप्रकाश जी हाथ जोड़कर विनती भरे स्वर में बोले।तब अकड़ते हुए रामलाल बोले,” भाई..#इज्जत इंसान की नहीं, पैसे की होती है।प्रशांत तो एक टीचर है..उसकी भला क्या … Read more

शुभ विवाह – अमित रत्ता : Moral Stories in Hindi

अंजू ने उसे आते हुए खिड़की से छुपकर देखा था तो वो थोड़ा मुस्कुराते हुए कहती है कि आपको मेरी हाइट कम नही लग रही। इस पर मानव भी मुस्कुराता है और कहता है कि मैंने कहाँ माप के देखी है। फिर वो दोनों सामने लगे बड़े शीशे के पास खड़े हो जाते हैं अंजू … Read more

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