क्लासमेट – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

         कहते हैं, सूरत तो चार दिन की चाँदनी है परन्तु सीरत उम्र भर साथ रहती है।इस सत्य को जानते हुए भी कुछ लोगों को अपनी सुंदरता पर इतना गुमान होता है कि खुद को भगवान समझ लेने की भूल कर बैठते हैं।उन्हीं में से एक थी शालू…..।         शालू को बचपन से ही अपने रूप और … Read more

बहुरानी – खुशी : Moral Stories in Hindi

ऐश्वर्या का बचपन बहुत ही अभावों में गुजरा ।पिताजी एक दफ्तर में क्लर्क मां घर को संभालती घर में दादी की हुकूमत चलती जो मां को बहु भी न समझती नौकरानी से ज्यादा हैसियत नहीं थी घर में पापा,दादी और आग में घी डाल ने बुआ भी आ जाती कभी कभी।मां सुबह से रात तक … Read more

बहुरानी – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

द्दुल्हन बनी बैठी थी सुनीता | बहुत ही सुंदर लग रही थी | सारे रिश्तेदार सुनीता को देखने आते | सब बोलते कमला जी आपकी बहु तो बहुत ही सुंदर है | कमला जी बोलती मेरी बहुरानी को नजर नही लगाओ , और मन ही मन बहुत खुश होती |सारा दिन बहुरानी बहुरानी करती रहती … Read more

अपनत्व भरा अधिकार – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

        देखो प्राची, अब सूरज ने तुमसे विवाह कर ही लिया है,और तुम इस घर मे आ ही गयी हो तो एक बात समझ लो मैं तुम्हे बहू मानने वाली नही।          पहले ही दिन अपनी सास शकुंतला जी के मुँह से ये वाक्य सुन प्राची तो अवाक रह गयी,क्या उत्तर दे वह समझ ही नही पा … Read more

मेरी बहु रानी – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मां जी… आप इस तरह  गिड़गिड़ाती हुई बिल्कुल अच्छी नहीं लगती, मुझे तो मेरी पहली वाली कड़क और तुनक मिजाज सासू मां चाहिए! नहीं बहू… मैंने तुम पर कितने जुल्म किए हैं किंतु फिर भी तुमने ही मेरी सेवा का ठेका क्यों लिया? मरने देती मुझे या मुझे मेरे कर्मों की सजा तो भूगतने देती, … Read more

बहुरानी – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

जब से भाभी मेरे घर में दुल्हन बन कर आई तभी से बाबूजी  अम्मा भाभी को दुलहीन कह के पुकारती थी, उस समय मेरी उम्र पंद्रह साल की थी… मैं सोचती थी मेरी सासू मां मुझे बहुरानी कह के पुकारे तो कितना अच्छा लगेगा.. दुल्हिन तो देहाती जैसा लगता है…अम्मा लकड़ी के चूल्हे के पास … Read more

अफसोस बस इसी बात का – रोनिता कुंडु : Moral Stories in Hindi

क्या देख रही हो अरुणा? अफसोस हो रहा है? यह सोच कर के काश मैं अपनी हठ छोड़ दी होती तो आज हम शर्मा जी के जैसे ही सपरिवार दिवाली मना रहे होते! सच बताओ उन्हें ही देख रही हो ना तुम? अशोक जी ने अपनी पत्नी अरुणा से कहा  अरुण जी:   कैसा अफसोस? … Read more

स्वर्ग यहां-नरक यहां – शुभ्रा बैनर्जी  : Moral Stories in Hindi

दीपावली की लंबी छुट्टी मिली थी स्वाति को।ऊपर से बेटी भी आ रही थी।उसके आ जाने से त्योहार की भागदौड़ नहीं करनी पड़ती थी स्वाति को। आते ही फरमान जारी हो गया उसका”मम्मी,इस बार दीवाली में कांजीवरम साड़ी ही पहनना पड़ेगा।पापा के दिए झुमके भी निकाल दूंगी।मैं भी पायल पहन ही लूंगी।सारे काम समय से … Read more

अफसोस – डाॅक्टर संजु झा: Moral Stories in Hindi

अपने घर की बालकनी में बैठी उमा एकटक सूरज को निहार रही थी।उसकी जिन्दगी की तरह शाम का सूरज ढ़लते दिन का आभास करा रहा था।उसकी जिन्दगी का सूरज भी तो बेवफा निकलकर रात के अंधेरे में गुम हो गया। उमा को सदैव अफसोस रहेगा कि उसकी खुद की गलती के कारण ही उसका प्यार … Read more

परिवर्तन – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

    अरे,सुमन ये अपने फ्लैट में लाइट क्यों नही है?पूरी सोसाइटी में तो बिजली आ रही है।         वो हम समय से पहले रिचार्ज कराना भूल गये थे ना,इसलिये आज बैलेंस समाप्त हो जाने के कारण बिजली कट गयी है।आज रात अंधेरे में ही काटनी पड़ेगी,सुबह 9 बजे के बाद ही री कनेक्शन हो पायेगा।         क्या——अपनी बिजली … Read more

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