भाभी की सीख – अनुपमा

मानसी मानसी कहां हो , जल्दी बाहर आओ तुम्हे कुछ दिखाना है । आशु आवाज देता हुआ सीधे मानसी के कमरे मैं चला गया और उसे लगभग खींचता हुआ बाहर ले आया और उसे अपनी नई बाइक दिखाने लगा । मानसी और आशु पड़ोसी थे ,साथ है बचपन से , नर्सरी से कॉलेज भी साथ … Read more

वो बदनाम गलियां – संगीता अग्रवाल

क्या ये बदनाम गलियां ही अब मेरा मुकदर होंगी… क्या मैं कभी खुल कर नही जी पाऊंगी….क्या मुझे यहीं घुट घुट कर जीना पड़ेगा । मेरा नाम मेरी पहचान मेरा वजूद सब खो जायेगा..,? कांता बाई के कोठे के अंधेरे कमरे में पड़ी सत्रह साल की वैशाली ये सब सोच रही थी। वो जितना इस … Read more

स्वार्थी – अनुज सारस्वत

******** “चल बेटा तैयार हूं मैं, गंगा मैया की बड़ी कृपा है ,बुला ही लेती हैं ,और देखो तेरी पोस्टिंग भी अपने किनारे करवा ली ,यह संयोग नही है” बाईक पर बैठते हुए जयंत की माँ ने कहा “अरे मम्मी आप मेरे साथ ही रहा करो कितनी बार कहा है ,लेकिन आपको वही पुराना घर … Read more

 नयी सुबह – नीरजा रजनीश जायसवाल

नींद सुनन्दा की आंखो से कोसों दूर थी ।पलंग पर करवटे बदलते हुए अपने कानों में गूंजती स्निग्धा की आवाज़ उसे बार बार आहत कर रही थी “मम्मा अगर आज पापा होते तो भी क्या मेरी यही हालत होती? “ बिटिया का ये सवाल उसे बार बार ग्लानि का अनुभव करा रहा था विगत चार … Read more

 मेरी -भाभी –     सीमा वर्मा

आज पूरे चौबीस घंटे के बाद बुखार टूटा है। सारा बदन जैसे दर्द में जकड़ा हुआ सा है कुछ समझ नहीं पा रहा था आखिर हुआ क्या है मुझे ? रुचिका ने कमरे के बाहर से दरवाजे पर ही खड़ी हो कर बताया , ” यों तो डरने वाली बात नहीं है लेकिन संपर्क से … Read more

स्वयं सिद्धा.(भाग 2) –  प्रीती सक्सेना

 भाग 1   समर,,,, आज मैं,, मेरा अस्तित्व,, तुमसे पूरी तरह जुदा हो गए, तुम्हारा नाम,, मेरे नाम के साथ जुड़ा हुआ नहीं रहा,, मैने तुम्हें और तुम्हारी यादों को मलिन कपड़ों की भांति,, अपने बदन से उतारकर,, दूर फेंक दिया,, अब मैं अपने को बहुत हल्का महसूस कर रही हूं। आज संडे है,, काफी दिन … Read more

फीस – रीता मिश्रा तिवारी

**** आज स्कूल गई और जब अपने क्लास में गई तो सौम्या नज़र आई । वो पढाई में बहुत ही होनहार और साथ ही नृत्य और टेनिस में भी बहुत अच्छी छात्रा है।  परीक्षा के दौरान वो बीच में ही परीक्षा छोड़ गायब हो गई। मुझे थोड़ी चिंता भी हुई की ऐसी क्या बात हो … Read more

मायके का विकल्प – डा. पारुल अग्रवाल

#मायका-  नीरू और उसके बच्चों की गर्मी की छुट्टियां शुरू होने वाली थी, उसकी सारी दोस्तों और बच्चों के भी दोस्तों ने नानी के घर जाने के लिए टिकट करा लिए थे। पर नीरू के लिए ये समय हर साल बहुत कसक वाला होता था । बच्चें भी उससे पूछते कि सब लोग अपने नाना-नानी … Read more

जीरो साइज़ –  के कामेश्वरी

मानवी रोते हुए घर के अंदर आती है और अपने कमरे में जाकर दरवाज़ा बंद कर लेती है । मानवी की माँ सरस्वती रसोई में खाना बनाने में व्यस्त थीं उन्हें मालूम ही नहीं चला कि मानवी कब घर आ गई है ।दोपहर हो गई और मानवी का कहीं पता नहीं था । उसको फ़ोन … Read more

ईमान – उषा गुप्ता

“भैया,रिक्शा जरा जल्दी चलाओ ना !” मिसेज गोस्वामी उतावली हो रही थी अपने बेटे और पोते को देखने के लिए। ” अरे भागवान ,रिक्शा ही तो है हवाई जहाज नहीं …बस पहुंचने ही वाले हैं।” मिस्टर गोस्वामी ने दिलासा देते हुए कहा। जैसे ही रिक्शा बड़ी सी कोठी के गेट पर रुका ,दोनों ने फटाफट … Read more

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