मायका : बेटियों का टूरिस्ट प्लेस   अरुण कुमार अविनाश

नैना देवी बहुत बीमार थी।  डॉक्टर ने अत्यधिक देखभाल की ज़रूरत बतायी थी। इलाज लंबा चलने वाला था – जिसमें उचित दवाइयों के साथ-साथ समुचित परहेज़ भी तजवीज़ की गई थी। स्थिति ये थी कि या तो महीनों अस्पताल में भर्ती रहतीं या घर में अस्पताल जैसा माहौल बना दिया जाता। आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं … Read more

स्वर से स्वर मिले – सरला मेहता

” अरे, ये कौन है ? ये तो स्वरा लग रही है। सफेद साड़ी व लम्बी दो चोटियों में कॉलेज आती थी। यथा नाम तथा मधुर आवाज़। सबने उसका नाम लता ही रख दिया था। और आज ये लकदक बनारसी साड़ी व गहनों में पूरी सेठानी लग रही है। ” कोई पहचान वाला देखता तो … Read more

खोया पीहर लौट आया – रीता मिश्रा तिवारी

टूल पर रखी चाय  ठंडी हो गई और मान्या वालकोनी में चुपचाप उदास बैठी थी। सामने ही रास्ते के उस पार के एक घर के आंगन में आम से लदा पेड़ था। पेड़ के नीचे चार पांच बच्चे धमा चौकड़ी मचा रहे थे। कोई उचक कर तो कोई गुलेल से कोई डंडा मारकर आम तोड़ने … Read more

बहु या बेटी –  किरण केशरे 

एक प्याली चाय’ मन को  कितनी संतुष्टि प्रदान करती है ! जब हम थककर चूर हो ,सर्दियों भरे दिन हो ,बारिश का हरियाली मौसम हो और साथ मे कोई मनपसंद स्नैक्स । “बस ऐसा लगता है  ,जैसे इससे बड़ा सुख कोई नही” । लेकिन मानू को ये सब कहाँ नसीब ,सुबह से शाम कब हो … Read more

आकाशवाणी  –  बालेश्वर गुप्ता

कहाँ हो तुम – – तुम्हें कुछ पता भी है – पता नही तुम कहां रहती हो – तुरंत आओ –       पिताजी जोर से चीख कर माँ को बुला रहे थे.     क्या आफत आ गयी जो इतना जोर से बोल रहे हो, यही तो हूँ, बताओ क्या आसमान टूट पड़ा है?      तुम्हारा चहेता बेटा, शादी … Read more

“निर्जला एकादशी” – ऋतु अग्रवाल

 “अरे! ओ बहुरिया, कल निर्जला एकादशी है। कल सब का निर्जला व्रत होगा। सुन रही हो ना सब की सब?” अम्मा ने अहाते में खड़े होकर आवाज लगाई।     “हाँ,हाँ, अम्मा जी! हमें याद है। हम सब कल निर्जला व्रत रखेंगी।” मंझली बहू ने अम्मा जी को दवाई देते हुए कहा।    अम्मा जी का भरा पूरा … Read more

निर्णय.. – विनोद सिन्हा “सुदामा”

मैं अपने घर की बाल्कोनी में बैठा चाय की चुस्कियाँ ले रहा था जो थोड़ी देर पहले मुझे मेरी माँ ने बनाकर दी थी वो भी अदरक डालकर… सच तो यह था कि मुझे माँ की हाथों की बनी चाय बहुत पसंद थी,मैं जब भी घर पर होता पत्नी को छोड़ मेरी माँ को ही … Read more

जूते…!! – विनोद सिन्हा “सुदामा”

नमन सुबह से मुँह फुलाए बैठा था.! माँ संगीता के लाख कहने पर भी वह न तो कुछ खा रहा था और ना ही पी रहा था बस जिद्द पर अड़ा एक ही रट लगाए था कि… मुझे नये जूते ला दो.! मुझे नये जूते ला दो.!! माँ बेचारी कहे जा रही थी..! बेटा अभी … Read more

बुलबुल* – अनु मित्तल  ‘ इंदु’

बात पांच साल पुरानी है ।मेरी बेटी की शादी हो गई थी ।  हमारे घर के पिछले स्टोर में से कुछ आवाजों ने हमें चौंका दिया । मैंने अपनी नौकरानी सुंदरी से कहा कि ज़रा स्टोर में देखो क्या आवाजें आ रही हैँ । हमने देखा कि एक बड़े से कुशन  पर बिल्ली के चार … Read more

यह अंत नहीं जीवन का”-तृप्ति उप्रेती

“पापा, आज बिजली का बिल भर दीजिएगा”। विहान ऑफिस जाते हुए सुरेश जी से बोला। सुरेश जी लाॅन में बैठकर चाय पी रहे थे। तभी सुहानी बाहर आई और उन्हें एक कागज देते हुए बोली, “पापा जी, जब आप बिल भरने जाएंगे ही तो यह राशन के सामान की लिस्ट भी किराने वाले को दे … Read more

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