अरमान निकालना – रंजीता पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

रुचि ने अपने पति रोहित से पूछा  ,रोहित  मां पापा  का बहुत मन है , कुंभ जाने का ,मै ले के चली जाऊ क्या? आप  दो दिन मम्मी जी और पापा जी ,ध्यान रख लेते तो ठीक था । रोहित ने बोला पागल तो नहीं हो गई? किसी और के साथ भेज दो , उनका … Read more

टूटे रिश्ते जुड़ने लगे – लतिका पल्लवी : Moral Stories in Hindi

“माँ कहाँ हो, कहाँ हो? किचेन से बाहर निकलो देखो कौन आया है” यह सुन कर मैं किचेन से बाहर आई. देखा की आज मेरे भाई-भाभी, देवर-देवरानी, ननद-नन्दोई सभी अपने बच्चों के साथ मेरे ड्राइंग रूम में खड़े थे और मुझे देखते ही हैप्पी ऐनवर्सरी कहने लगे।  आज मेरी पच्चीसवी वैवाहिक वर्षगाठ है। बच्चों ने  … Read more

रिश्ते तोड़ना आसान जोड़कर रखना मुश्किल क्यों? – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“ छोटी देख कनु की शादी तय हो गई है… तुम सब कब आओगी… जल्दी से आ जाना मुझे सहूलियत हो जाएगी।” जेठानी गरिमा के फोन पर ये कहते ही मनस्वी के समझ नहीं आया वो खुशी ज़ाहिर करे या पुरानी बातों को लेकर ना आने का बहाना बनाएं। देवरानी की चुप्पी से गरिमा ने … Read more

मदद – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

तू बिल्कुल नहीं समझता  अक्लू , इतना रात तक कहां भटक रहा था ?  आप काहे नहीं सोए बाबूजी  मैं थोड़ा काम से गया था ।   मैं सोने ही वाला था ,कि तुम्हारी दादी खाँसने लगी ,उसे ही पानी देने गया ,तो तू नदारद था। तेरा लंगोटिया रघु के साथ घूमता होगा है, न?  … Read more

विपत्ति में अपने पराये की पहचान – डॉ बीना कुण्डलिया : Moral Stories in Hindi

भाभी का फोन सुनते ही भावना एक बार तो चक्कर खा गिरते बची । उसकी आंँखों में आँसू बहने लगे । स्मृति पटल पर बीते दिन घूमने लगे। कितना फर्क पड़ गया इन तीन वर्षों में उसकी शादी के एक वर्ष के अन्दर रेल दुर्घटना में माता पिता का स्वर्गवास उसके बाद उनकी बरसी पर … Read more

सुगन्धा – विनय मोहन शर्मा  : Moral Stories in Hindi

माधव एक ख्यात नाम बैरिस्टर थे और दिल्ली में तीसहजारी कोर्ट में प्रेक्टिस करते थे। वह अपने वकील साथियों में ही नहीं अपितु अपने मुविक्कलों में भी प्रशंसा के पात्र थे। बैरिस्टर साहब ने अपने जीवन काल में कोई भी मुकदमा हारा नहीं था, विजय श्री तो उनके गले में विजय माला डालने को सदा … Read more

रिश्ते की डोर-श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

सरला जी की बहू निम्मी की आज पहली रसोई थी। सरला जी अपनी बहू की मदद करना चाह रही थी लेकिन रिश्ते की चाचियाँ, मामियाँ, ननदें उन्हें किसी ना किसी बहाने से रोक ले रही थी। उधर किचन में निम्मी की हालत खराब हो रही थी। उसने तो आज तक चाय-कॉफी के अलावा कुछ बनाया … Read more

टूटता रिश्ता …रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

…”नितिन क्या कर रहे हैं आप… ऐसा मत करिए… नहीं… छोड़िए मेरा हाथ…!” ” तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई…!” ” मुझे छोड़िए… विधि रो रही है… छोड़िए मुझे…!’  नितिन ने झटके से उसे दरवाजे के बाहर कर दिया… और फटाक से दरवाजा उसके मुंह पर पटक दिया… अंदर विधि जोर-जोर से रो रही थी… ” नितिन… … Read more

गलतफहमी – बीना शुक्ला अवस्थी : Moral Stories in Hindi

आरवी ने जैसे ही शोभिता का फोन रखा, उसकी बेटी ने हॅसते हुये कहा – ” मम्मी जितना खुलकर और खुश हो कर आप अपने दिल की बातें शोभिता मौसी से करती हैं, उतना खुलकर तो अपनी बहन, मम्मी और भाभी से भी नहीं करतीं हैं। क्या आपको याद है कि कभी आप लोगों में … Read more

ममता का त्याग – विभा गुप्ता  : Moral Stories in Hindi

   ” मीनू…शादी के बाद तुम मुझे आप कहोगी ना..।”    ” हर्गिज़ नहीं..शादी के बाद तुम अपना भाव बढ़ा लोगे..तो मैं तुमसे शादी नहीं करूँगी..।”  ” अच्छा…मुझसे नहीं करोगी..तो फिर किससे…।” कहते हुए मयंक उससे दिल्लगी करने लगा तो मीनू ने ‘जाओ..मैं तुमसे बात नहीं करती..।’ रूठते हुए फ़ोन डिस्कनेक्ट कर दिया।          मीनू के पिता रामदयाल … Read more

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