माँ अब काम आपकी बहू ही आएगी!!  – मनीषा भरतीया

ट्रिन ट्रिन ट्रिन ट्रिन फोन की घंटी बजी करीब सुबह के 9:30 बज रहे थे….. और रेशमा किचन में काम कर रही थी…. उसके हाथ आटे में सने हुए थे क्योंकि उसे उसके पति (रवि) को टिफिन जो देना था…. सुबह-सुबह सभी गृहणी की तरह वह भी बहुत व्यस्त रहती थी….. फिर वह आटे में … Read more

बाबुल बादल प्रेम का हम पर बरसा आई – लतिका श्रीवास्तव

#पितृ दिवस पर मन के भाव इस बार कोई कहानी नहीं सीधे सीधे शब्दों में अपने श्रद्धेय पिता के बारे में अपने मन के ही भाव व्यक्त करने की कोशिश कर रही हूं मेरे पापा मम्मी उस विशाल वट वृक्ष की भांति हैं जिनकी अविरल अगाध स्नेहिल शीतल छाया और सुदृढ़ आधार ने हम सबको … Read more

चित्कार – रीता मिश्रा तिवारी

आज श्यामा की शादी बड़े धुमधाम से जमींदार सूरज सिंह के बेटे बैंक अधिकारी कृष्णा सिंह से संपन्न हो गया।  दूध सी रंगत की चांद सी सुंदर श्यामा कृष्णा के नजरों से एक पल के लिए भी ओझल होती तो परेशान हो जाता पागलों की तरह प्यार जो करता था। पत्नि के जाने के बाद … Read more

‘फैसला’ – पूनम वर्मा

विमला अपने कमरे में बिस्तर पर लेटे हुए छत को एकटक निहार रही थी । कमरे में हल्की रौशनी थी पर उसका भविष्य बिल्कुल अंधेरे में था । आज पति को गुजरे तेरह दिन बीत चुके थे । श्राद्धकर्म समाप्त हो चुका था । तीनों बेटे अपने परिवार के साथ बैठक में कुछ मशविरा कर … Read more

गोल टेबल – दर्शना जैन

सौरभ एक फर्नीचर की दुकान के बाहर खड़ा दुकान के अंदर देख रहा था। दुकान मालिक ने आकर कहा – भाईसाहब कुछ चाहिए क्या? अंदर आइये ना। सौरभ ने कहा,” भाई, कुछ खरीदना नहीं है। आपकी दुकान में रखे गोल टेबल पर नजर पड़ी तो कुछ याद आ जाने से मैं रूक गया। ऐसी टेबल … Read more

अहसास –   बालेश्वर गुप्ता

पितृ दिवस पर – – –                 आज वर्षो पूर्व का स्वाद याद आ गया. गोलगप्पे खूब चाव से खाता था. उम्र बढ़ जाने के कारण अब ऐसी चीजो को खाने से डॉक्टर भी मना करते हैं और शरीर भी. पर इस मन का क्या करे? अजीब सी बेचैनी है. बाहर खुद ठेले पर जाकर गोलगप्पे … Read more

कहीं वो रास्ते में तो नहीं… – रश्मि स्थापक

कहीं वो रास्ते में तो नहीं… “भई रोज तो केवल नौ बच्चे अनुपस्थित थे,आज दस कैसे?” स्कूल के प्रिंसिपल ने परीक्षा कंट्रोल रूम में परीक्षा इंचार्ज से पूछा जो ऑनलाइन अनुपस्थिति भेज ही रहे थे।” ” सर अब तो लगभग आधा घंटा होने को है…इसके बाद तो किसी को अंदर आने की परमिशन भी नहीं … Read more

मृगमरीचिका – नीलम सौरभ

व्यवसायिक प्रतिस्पर्धा में सबको पीछे छोड़कर सफलता के उच्चतम शिखर पर जा बैठने का स्वप्न इतना सम्मोहक होता है कि कई बार महत्वाकांक्षी मानव को उस लक्ष्य के सिवाय कुछ भी दिखाई नहीं देता। कदाचित यह लक्ष्य किसी ‘मृगमरीचिका’ के समान होता है, समीप पहुँचते ही और दूर दिखने लगता है। मृगमरीचिका! …मरुस्थल में प्यास … Read more

पिता के नाम पत्र – रीटा मक्कड़

आदरणीय पापा जी.. आप क्यों चले गए हमे छोड़ कर।इतनी जल्दी क्यों थी आपको जाने की। अभी तो बहुत कुछ करना बाकी था।अभी बहुत सी बातें थी मेरे मन मे जो अनकही ही रह गयी और वो अभी तक कह नही पायी ..कहूँ भी तो किससे.!!! जो बातें सिर्फ और सिर्फ आपसे ही कह सकती … Read more

पापा – नीलिमा सिंघल

नमित को आज तरक्की मिली थी कंपनी का CEO बन गया था, उसकी शान में पार्टी रखी हुई थी, सब बहुत खुश नजर आ रहे थे बुके का ढेर लगा देखकर नमित थोड़ा अनमना सा हो गया था, जाम पर जाम टकराए जा रहे थे पार्टी पूरे शबाब पर थी पर नमित का ध्यान बार … Read more

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