समझौता एक्सप्रेस… – विनीता राहुरीकर : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : “वह नए वाले बिस्किट तो ले आओ जरा जो मैं परसों लेकर आया था, देखें तो क्या खास है उसमें दुकान वाला तो बड़ी तारीफ कर रहा था उनकी” रोहित ने चाय का कप उठाते हुए कहा। “इतने बिस्किट तो रखे हैं ट्रे में लेकिन तुम्हें हर बार वही चाहिए … Read more

पापमोचनी एकादशी

पापमोचनी एकादशी व्रत 28 मार्च दिन सोमवार को रखा जाएगा. पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को पापमोचनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की पूजा (Lord Vishnu Puja) करते हैं और पापमोचनी एकादशी व्रत कथा का पाठ करते हैं. इस व्रत कथा के श्रवण … Read more

बचत – गरिमा जैन

हमारे रिश्ते को जैसे किसी की नजर लग गई थी एक जमाने में लोग हमें सास बहू नहीं बल्कि दोस्त कहा करते थे हाथ में हाथ डाले हम बाजार में ऐसे घूमते जैसे कितनी पक्की सहेलियां है ना मेरी बहू कभी मेरी बात काटती और मैं भी हमेशा छोटी-छोटी बातें  दिल में नही रखा करती … Read more

राखी – डॉ.अनुपमा श्रीवास्तवा

“माँ…सुबह-सुबह क्या खटर -पटर कर कर रही हो किचेन में?” “अरे बेटा कुछ नहीं, तू बहन के घर जा रहा है…सोचा कुछ अच्छा बना देती हूं ले जाने के लिए। दो-दो खुशियां हैं इसीलिए। “दो दो खुशियां?” “हाँ और नहीं तो क्या! एक तो राखी का दिन और दूसरा एक साल बाद तू बहन के … Read more

जैसी भी हो मेरी ज़िन्दगी की हीरोइन हो – रश्मि प्रकाश

#ख्वाब हर महिला की तरह रमा भी बस एक ही ख़्वाब देखती रहती थी छरहरी काया की मालकिन हो और पति बस उसपर लट्टू हुआ रहे पर इन दिनों रमा को लग रहा था वो पहले जैसी नहीं दिख रही और फिर क्या जब देखो खुद को शीशे में निहारती रहती । आज भी अपने … Read more

सयानी – नीरजा कृष्णा

वो ऑफ़िस से लौटी। हमेशा की तरह घर में लड़ाई झगड़ा मचा हुआ था। धड़कते दिल से घुसी…वही रोज वाली किचकिच… अम्माँ सलोनी के पीछे पड़ी थीं,”जरा उठ जा ।थोड़ी मेरी मदद कर दे। अभी शालू थकी हारी आएगी, उसके लिए कुछ नाश्ता बनवा ले। सुमित भी दो बार कुछ खाने को माँग चुका है। … Read more

 डर…  – हरेन्द्र कुमार

सुजीत 8 बजे सुबह घर से ऑफिस के लिए निकला, उनकी श्रीमती मधु ने आवाज लगाई : – प्याज के साथ हरा मिर्च भी डाल दिया है टिफिन में, दो रोटी और राजमा भी। आज कल खाया नहीं जा रहा था सुजीत से दो रोटी भी। पिछले कुछ दिनो से सुजीत गुमसुम बैठा रहता था, … Read more

मदद – पुष्पा कुमारी “पुष्प

“शोभा बिटिया!.कब आई ससुराल से?” दो घर छोड़कर पड़ोस में रहने वाले कुंती काकी ने दरवाजे पर कदम रखते ही सामने रसोई में अपनी भाभी की मदद करती शोभा को देख टोक दिया। “आइए बैठिए काकी!.शोभा कल ही अपने ससुराल से आई है।” शोभा की मांँ कुंती काकी को देख खुश हुई और वहीं पड़ी … Read more

बस इतना सा ख्वाब है – नीरजा कृष्णा

आज मोहन के स्कूल में वादविवाद प्रतियोगिता आयोजित थी।सभी बच्चों को अपने अपने सपनों को बुनने और उन पर चर्चा करने के लिए मैदान उपलब्ध कराया गया था। प्रत्येक बच्चे को पांच मिनट के समय मेंअपने सपने…अपने ख्वाब में रंग भरने हैं ….अपनी कल्पना की कूची चलानी थी।   सबके बड़े बड़े ऊँचे ऊँचे ख्वाब … Read more

छत वाला प्यार – रीटा मक्कड़

आज भी वो दिन आंखों के सामने एक चलचित्र की भांति घूमते रहते हैं।जब लोगों का प्यार छत्तों पर परवान चढ़ा करता था। तब आज की तरह एक दूसरे से बात करने को फोन तो होते नही थे। कि जो अच्छा लगे जल्दी से उसको संदेश भेज दो या फिर फोन करके अपने दिल की … Read more

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