गुल्लक – प्रमोद रंजन

आज फिर सिन्हा साहब के दोनों बच्चों की लड़ाई अपने चरम पर थी। यूं लग रहा था कि आज वो दोनों एक दूसरे की जान ले कर ही मानेंगे वजह, दौर दिनों के बाद उनके बेटे का जन्मदिन था। उसके लिए कपड़े और उपहार खरीदते समय उनकी नजर दुकान में रखे एक गुल्लक पर पड़ी … Read more

वो ख्वाब, जो पूरे ना हो सके – सुषमा यादव

## ख्वाब #  टाॅपिक पर आधारित रचना,, सुषमा यादव,, प्रतापगढ़, उ प्र, ,,, जिंदगी के कुछ ख्वाब ऐसे होते हैं,, जो पूरे नहीं होते,,सारी उम्र दिल में टीस सी उठती रहती है,, मेरे भी कुछ ख़्वाब थे,जो आज तक किसी से कह नहीं सकी,,जो पूरे होते,होते रह गये,, ,,, मैं एम ए अर्थशास्त्र विषय से … Read more

एक टुकड़ा ख्वाब – श्वेता शर्मा

भारत सरकार के द्वारा पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है । इसी क्रम में मेरे विभाग को  कॉलेज के छात्रों के बीच एक प्रश्नोत्तरी करवाने का निर्देश हुआ । तो लग गयी हमारी पूरी टीम भारत सरकार के हुक्म को मानने मे। चूंकि आदेश सरकारी था सो सारे नियमित काम … Read more

चरित्रहीन – प्रीती सक्सेना

    शादी को एक माह हो गया, मैं,,, शीला,, आज अपने पीहर जा रही हूं,,, भाई, कल ही लेने आ गया था,, खुशी के कारण मन ही नहीं लग रहा था,, लग रहा था,, पंख लग जाएं और मैं,,, झट से अपने माता पिता के पास पहुंच जाऊं,,, सास, ससुर के पैर छुए,, हसरत से पति … Read more

क्या सही क्या गलत – गीता वाधवानी

आज सुगंधा बहुत खुश थी, बहुत खुश। लेकिन मन ही मन कोई द्वंद चल रहा था शायद सही और गलत का। वह उस में उलझ कर रह गई थी।  आज उसकी बेटी नेहा को बहुत अच्छे विद्यालय में नौकरी मिल गई थी। नेहा का फोन आने के बाद से, सुगंधा उसी के इंतजार में बैठी … Read more

अनोखा रिश्ता – के कामेश्वरी

कमली अपनी माँ के पार्थिव शरीर के पास बैठकर को रही थी । उसका इस दुनिया में माँ के सिवा कोई नहीं था । अब माँ के चले जाने से वह बहुत अकेली पड़ गई थी । कमली सुंदर जवान और अठारह साल की बच्ची थी। गली के सारे मर्द उससे  हमदर्दी जता रहे थे … Read more

नेकी** – रंजना बरियार

निशा की आँखों से अनवरत आँसू बहे जा रहे थे.. वो चुपचाप रोटी बेलती जा रही थी!अंकल के खाने का समय हो गया,वो डायबेटिक हैं उनके हर डायट का समय निर्धारित जो है। आंटी नाराज़ होंगी उन्हें समय पर खाना  नहीं मिलने पर! निशा वनिता आँटी के घर आया का काम करती है ।वनिता आंटी … Read more

“अलबेली” – सीमा वर्मा

“उठ जा री अलबेली, सुबह के सात बज रहे हैं। अब क्या सारा दिन सोती ही रहेगी ?” “अभी घर के भी सारे काम पड़े हुए हैं “। “उफ्फ ये अम्मा भी ना ठीक से नींद भी नहीं लेने देती है।” “कभी-कभी तो लगता है मेरा जन्म ही काम वाली बनने के लिए हुआ है। … Read more

ताली एक हाथ से नहीं बजती – नीरजा कृष्णा

“मम्मी जी!ताली कभी भी एक हाथ से नहीं बज सकती है, ये कह कर मैं छोटे मुँह बड़ी बात कर रही हूँ , क्यों कि आप मुझसे हर बात में बड़ी हैं…उम्र में भी और तजुर्बे में भी।” सरला जी नेहा की बात सुन कर बहुत चौंक गई,” नेहा बेटी! क्या हो गया ? अचानक … Read more

पगला बंदा – श्रीप्रकाश श्रीवास्तव

पगला बंदा को मुन्नीबाई से एकतरफा प्यार हो गया। प्यार तो प्यार भले ही एकतरफा क्यों न हो? सच्चे आशिक को अपनी माशूका की एक झलक ही काफी होती है। वह मुन्नीबाई की एक झलक के लिए ही प्यासा था। खबर लगती कि फंलाने गांव में मुन्नीबाई का नाच होने वाला है। वह बेचेैन हो … Read more

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