दो आँखें  – पुष्पा जोशी

‘मम्मा प्लीज जाते समय लाइट बंद करते जाना, मुझे लाइट में नींद नहीं आती।’ ‘बेटा समायरा ! छोटा बल्ब जलने दो,क्या तुम्हें अंधेरे में डर नहीं लगता?’ ‘कैसे लगेगा मम्मा ? तुम्हारी दो आँखें उसे मेरे पास आने ही नहीं देती,कितना ध्यान रखती हो मेरा, बेचारा डर…..डर कर भाग जाता है,और हाँ, कभी भूलकर सपने … Read more

 जमीन तो बिकनी ही थी – नीलम नारंग

मोहना कनाडा से आई शमशेर की चिठ्ठी पढ़ कर गुरदित को सुना रहा था | गुरदित की आँखों में ख़ुशी और दुःख के आंसू एक साथ बह रहे थे | चिठ्ठी के  शब्द कम सुनाई दे रहे थे  अतीत की बातें ज्यादा याद आ रही थी | “शमशेर ओ शमशेर कहाँ है , यार तेरा … Read more

सपने में भी नहीं सोचा था – लतिका श्रीवास्तव

सुबह सुबह मोबाइल बज उठा मिताली जी ने जल्दी से चश्मा ढूंढ कर आंखों में लगाया हड़बड़ी में ठीक से लग ही नहीं पा रहा था फिर मोबाइल ऑन किया तो उनके पोते तुषार का फोन था…..” हेलो हां बेटा ….सब ठीक तों है ना!…..क्या कह रहे हो  ये तो मैने सपने में भी नहीं … Read more

मैं मां बन गई – संगीता अग्रवाल

मैं सुमेधा आज मेरी खुशी का ठिकाना नहीं है क्योंकि मैं  मां बनने वाली हूं। आप मुझे बधाई देंगे हैना? पर जब मैं आपको बताऊंगी मैं अविवाहित हूं तो आप मुझे बेशर्म , कुलटा और ना जाने किस नाम से नवाजेंगे। पर रुकिए रुकिए इससे पहले की आप मुझे अपशब्द कहें कम से कम मेरी … Read more

एक ननद  ऐसी भी – नीलिमा सिंघल

अमन और रश्मि के विवाह को 3 साल बीत गए थे,, पर अमन की माँ ने कभी दिल से नहीं अपनाया था रश्मि को ,,उनको यही डर लगा रहता कि कहीं बेटा मुहँ ना मोड़ ले,,,अमन ने बहुत बार माँ को समझाना चाहा पर सीमा जी जैसे कुछ सुनना ही नहीं चाहती थी,,, रश्मि को … Read more

फ़ैसला – प्रीति आनंद अस्थाना

“मैं नहीं रह सकता अब एक भी दिन इस जाहिल औरत के साथ! इसके शक्ल से चिढ़ हो गई है मुझे!” अविनाश की तेज आवाज़ सुन शोभना जी ड्रॉइंग रूम में पहुँची तो वहाँ का नज़ारा कतई ख़ूबसूरत नहीं था। काँच के टुकड़े ज़मीन पर बिखरे हुए थे। कार्पेट गीला हो रहा था। अविनाश का … Read more

दादा -दादी की कहानी – बेला पुनेवाला

  मैं hostel में दादा दादी को याद कर अपनी सहेली प्रिया को उनके बारे में बता रही थी, की ” मेरे दादा और दादी दुनिया में सबसे प्यारे और सबसे अनोखे दादाजी और दादी है, उनकी love story बड़ी दिलचस्प है, और वो दोनों भी।             मेरे दादाजी और दादी एक दूसरे से जितना लड़ते है, … Read more

किस्मत – सुमन अग्रवाल “सागरिका”

डोर वेल की आवाज……शायद पूजा होगी शारदा ने जाकर दरवाजा खोला देखा तो सामने बहू (पूजा) ही थी। बहू– माँ जी मेरा सिर दुख रहा है मेरे लिए अच्छी सी अदरक वाली कड़क चाय बना देना साथ में गरमागरम करारे पकौड़े शारदा रसोई में गई पूजा के लिए चाय व पकौड़े ले आई फिर शाम … Read more

वो “अपनी” सी –  तृप्ति शर्मा

लिफ्ट की तरफ जाते हुए ,उससे लगभग टकराने से बची थी मैं, बचाने के लिए अपना हाथ दिया उसने, परिचित सा वो अहसास ,,जिसे सालों से जीने के लिए बहुत जतन किए थे मैंने। वही चेहरा,वैसी ही बड़ी बड़ी आंखें, जिंदगी जीने की चाहत लिए । आप ठीक तो है उसकी आवाज सुनी तो दबे … Read more

“घर का मर्द” – अंजु अनंत

गंगा जल्दी-जल्दी कदम बढ़ाती हुई शांति कुंज की तरफ बढ़ रही थी, आज उसे फिर से देर हो गई थी काम पर जाने में। दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर खुद काम के लिए निकलती है, उसका पति बुधराम शराबी है। काम-धाम करता नहीं है, इसी कारण गंगा को लोगों के घरों में काम करना पड़ता … Read more

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