मेरे पापा : मेरे हीरो! – प्रीति आनंद अस्थाना

आज सुबह दफ्तर पहुँचा ही था कि बॉस ने बुलवा भेजा। पता था कि आज क्लास लगेगी पर इतनी जल्दी? “देखो वर्मा, ये तीसरा प्रोजेक्ट भी हमारे पास से निकल गया। आजकल कुछ टिकता ही नहीं तुम्हारे हाथों में! एक एक कर तुम्हारे तीन प्रोजेक्ट कंपनी के हाथों से निकल गए हैं। अब एक ही … Read more

काकी – के कामेश्वरी

काकी मेरे साथ अस्पताल चलोगी क्या? कविता के डिलीवरी का समय है और कविता के पापा को भी अभी ही ऑफिस के काम से शहर से बाहर जाना पड़ गया है और मेरे तो हाथ-पैर काँप रहे हैं । आप जानती हैं न मुझे वैसे भी अस्पताल के नाम से ही डर लगता है ।तुम … Read more

“ताना” – मीनाक्षी राय

यह एक कहानी का शीर्षक है,जहां पर एक लड़की मीत  है, जो अपने ससुराल जाती है | उसके ससुराल वाले को पता चलता है कि इसकी बहन ने अलग जाति के लड़के  से शादी कर ली है, तो बहू को किन किन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है | इसको मैंने एक कहानी का रूप … Read more

नरमुंडा की दुनिया   – अनुज सारस्वत

#जादुई_दुनिया “मेरा तो जीना ही बेकार है,इससे अच्छा तो कही कुएं में डूबकर मर जाऊँ” जंगल के रास्ते घर जाते हुए खैंचूमल इतना सोच ही रहा था कि उसका पैर एक दलदली जमीन पर पड़ा और उसका सारा शरीर उस जमीन में घुसता चला गया  “अरे मार दियो रे मार दियो रे ” के करूण  … Read more

माँ की सुगन्ध – दीप्ति सिंह

 पिछले वर्ष माँ की ब्रेस्ट कैंसर से मृत्यु होने के उपरांत सरिता का मन रीता हो गया था मन में सिर्फ  माँ की याद बसी रहती। कितनी अच्छी थी माँ? जब भी सरिता जाती माँ खुशियों की पोटली बाँध देती। सावन की तो बात ही निराली थी सासससुर के जोड़े से लेकर दोनों बच्चों और … Read more

प्लानचिट का जादू – कमलेश राणा

#जादुई_दुनिया करीब 55 साल पहले मेरे पापा किसी धार्मिक स्थान पर जाते थे,,वहां लोगों की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्लानचिट चलाई जाती थी,,, बहुत सारे लोगों को समाधान  मिल भी  जाता था,,पारलौकिक शक्तियों के बारे में जानने की जिज्ञासा हर मन में होती है,,,मेरे पापा के मन में भी थी,,, उन्होंने प्लानचिट चलाने … Read more

संवेदनहीन दुनिया – संजय मृदुल

#जादुई_दुनिया आरव नींद में कसमसा रहा है, एक साई फाई फ़िल्म देखी है सोने के पहले, बंद आंखों में कुछ तैर रहा है। इक्कीसवीं सदी का पचासवाँ दशक, भारत का नक्शा बदल गया है। समुद्र के किनारे के अधिकांश शहर सागर तल में जा मिले हैं। अधिकांश धरती रेगिस्तान में बदल गयी है। लोग पहाड़ों … Read more

शुक्रिया अनजान दोस्त – संगीता अग्रवाल

#जादुई_दुनिया ” आज तो काफी रात हो गई निकलने में पता नही इतनी बारिश में इस तरफ कोई ऑटो भी मिलेगा या नहीं !” तृप्ति ऑफिस से निकलते हुए खुद से बोली। उसने अपने बैग से छाता निकाला साथ ही मोबाइल भी जिससे घर में फोन करके पति मनन से बोल सके। पर ये क्या … Read more

तुम कहां चली गई??? – रंजीता अवस्थी

रीना तुम कहां चली गई? अब इन बच्चों को मैं अकेले कैसे पाल पाऊंगा? ये बच्चे किसके सहारे बड़े होंगे? मयंक दहाड़े मार मार कर रो रहा था और उसके बच्चे ये समझ ही नहीं पा रहे थे कि मां कहां चली गई और पापा इतना रो क्यों रहे हैं? शुभम रोते हुए बोला…मम्मी अभी … Read more

तुलसीदल – नीरजा कृष्णा

आज दीपू की गुलाबजामुन खाने की बहुत इच्छा हो रही थी। मन तो दादा जी का भी बहुत था पर संकोचवश चुप थे। शुगर की बीमारी के कारण मीठे पर बहुत कंट्रोल रहता था। आज दीपू के आग्रह पर दादी जी ने चौके में कमान कस ली थी।  थोड़ी देर में पूजाघर में घंटी बजने … Read more

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